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सीमा की चौकसी – अकबर बीरबल की कहानी
मुगल साम्राज्य के महान सम्राट अकबर के दरबार में एक दिन बड़ी चर्चा हो रही थी। राज्य की सीमा की चौकसी को लेकर कई मंत्री अपनी-अपनी राय दे रहे थे।
“हुजूर, हमारी सेना बहुत मजबूत है, लेकिन सीमाओं पर और भी सख्त पहरा लगाना चाहिए,” एक मंत्री ने कहा।
दूसरे मंत्री ने कहा, “महाराज, सीमा की चौकसी के लिए हमें और भी सैनिक भेजने चाहिए।”
अकबर बादशाह सभी की बातें सुन रहे थे। तभी उन्होंने बीरबल से पूछा, “बीरबल, तुम्हारा क्या विचार है? क्या वाकई हमारी सीमा की चौकसी में कमी है?”
बीरबल मुस्कराए और बोले, “जहांपनाह, सीमा की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन सबसे पहले हमें यह जानना चाहिए कि असली सीमा कहां है।”
“क्या मतलब?” अकबर ने आश्चर्य से पूछा।
बीरबल ने कहा, “हुजूर, कल सुबह मैं आपको दिखाऊंगा कि सीमा की चौकसी कैसे करनी चाहिए।”
अगली सुबह बीरबल अकबर को लेकर राजमहल के बाहर निकले। वे एक छोटे से गांव में पहुंचे जहां एक बूढ़ा किसान अपने खेत में काम कर रहा था।
बीरबल ने किसान से पूछा, “बाबा, आपका खेत कहां से कहां तक है?”
किसान ने अपने खेत की सीमा दिखाते हुए कहा, “बेटा, यहां से उस पेड़ तक मेरा खेत है। मैं रोज इसकी चौकसी करता हूं कि कहीं कोई जानवर फसल को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहा।”
“और अगर कोई आपकी सीमा में घुस जाए तो?” बीरबल ने पूछा।
“तो मैं प्यार से समझाता हूं। अगर फिर भी नहीं मानता तो गांव के मुखिया को बताता हूं,” किसान ने जवाब दिया।
वहां से आगे बढ़कर वे एक स्कूल के पास पहुंचे। वहां बच्चे खेल रहे थे। बीरबल ने एक बच्चे से पूछा, “बेटा, तुम्हारे खेल की सीमा कहां है?”
बच्चे ने कहा, “अंकल, हमारे खेल की सीमा यहीं तक है। हम इसकी चौकसी करते हैं कि कोई छोटा बच्चा खेल में चोट न खाए।”
अकबर समझ नहीं पा रहे थे कि बीरबल क्या दिखाना चाहते हैं।
अंत में वे एक मंदिर के पास पहुंचे। वहां एक पुजारी जी बैठे थे। बीरबल ने पूछा, “पंडित जी, आपकी सीमा क्या है?”
पुजारी जी ने मुस्कराते हुए कहा, “बेटा, मेरी सीमा तो पूरा संसार है। मैं सभी की भलाई की चौकसी करता हूं। मेरा धर्म है कि सबका कल्याण हो।”
वापस महल लौटते समय अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल, तुमने मुझे यह सब क्यों दिखाया?”
बीरबल ने विनम्रता से कहा, “जहांपनाह, सीमा की चौकसी सिर्फ सैनिकों का काम नहीं है। हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी की सीमा की चौकसी करता है।”
“किसान अपने खेत की, बच्चे अपने खेल की, और पुजारी जी पूरे समाज की। जब हर व्यक्ति अपनी सीमा की सही चौकसी करता है, तभी पूरा राज्य सुरक्षित रहता है।”
अकबर की आंखें चमक उठीं। “तुम सही कह रहे हो बीरबल। राज्य की सुरक्षा सिर्फ सीमाओं पर सैनिक रखने से नहीं होती। जब हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझता है, तभी राज्य मजबूत बनता है।”
उस दिन के बाद अकबर ने न सिर्फ सीमा की चौकसी बढ़ाई, बल्कि प्रजा को भी अपनी जिम्मेदारियों के बारे में जागरूक बनाया। उन्होंने समझा कि सच्ची सुरक्षा तब होती है जब हर व्यक्ति अपने कर्तव्य की सीमा को समझकर उसकी चौकसी करता है।
सीख: सच्ची सुरक्षा तब मिलती है जब हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी की सीमा को समझकर उसकी ईमानदारी से चौकसी करता है। राज्य की मजबूती सिर्फ सेना में नहीं, बल्कि हर नागरिक के कर्तव्यबोध में छुपी होती है। समाज के प्रति जिम्मेदारी और व्यापार में चौकसी भी इसी तरह की कहानियों में देखी जा सकती है।















