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हातिम ताई और गरीब लकड़हारा – बीरबल की बुद्धि

बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन एक अजीब सा मामला आया। दरबार में एक धनी व्यापारी हातिम ताई और एक गरीब लकड़हारा दोनों खड़े थे। दोनों के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हो रहा था।

हातिम ताई ने कहा, “हुजूर, यह लकड़हारा मेरे बगीचे से लकड़ी चुरा रहा था। मैंने इसे रंगे हाथों पकड़ा है।”

गरीब लकड़हारा रोते हुए बोला, “बादशाह सलामत, मैं चोर नहीं हूं। मैंने तो केवल सूखी टहनियां उठाई थीं जो जमीन पर गिरी पड़ी थीं। मेरे बच्चे भूखे हैं और मेरे पास खाना खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं।”

अकबर बादशाह परेशान हो गए। एक तरफ हातिम ताई जैसा धनी व्यापारी था जो दरबार को बहुत कर देता था, दूसरी तरफ एक गरीब लकड़हारा था जिसकी आंखों में सच्चाई दिख रही थी।

“बीरबल, तुम इस मामले को सुलझाओ,” अकबर ने कहा।

बीरबल ने दोनों को ध्यान से देखा। हातिम ताई के कपड़े महंगे थे और उसके हाथों में सोने की अंगूठियां चमक रही थीं। वहीं लकड़हारा के कपड़े फटे-पुराने थे और उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें थीं।

बीरबल ने पूछा, “हातिम ताई, तुमने इस लकड़हारे को कहां पकड़ा था?”

“मेरे बगीचे में, वह मेरे आम के पेड़ की डालियां तोड़ रहा था,” हातिम ताई ने जवाब दिया।

बीरबल ने लकड़हारे से पूछा, “तुम वहां क्या कर रहे थे?”

लकड़हारा बोला, “हुजूर, मैं रोज सुबह जंगल जाता हूं लकड़ी लेने। रास्ते में हातिम ताई का बगीचा पड़ता है। वहां कुछ सूखी टहनियां गिरी थीं, मैंने सोचा इन्हें उठा लूं।”

बीरबल मुस्कराया और बोला, “अच्छा, तो तुम दोनों मेरे साथ उस जगह चलो जहां यह घटना हुई है।”

सभी लोग हातिम ताई के बगीचे पहुंचे। बीरबल ने आम के पेड़ को देखा। पेड़ हरा-भरा था और उस पर ताजे फल लगे थे। जमीन पर कुछ सूखी पत्तियां और छोटी टहनियां बिखरी पड़ी थीं।

बीरबल ने हातिम ताई से कहा, “तुमने कहा था कि यह लकड़हारा तुम्हारे आम के पेड़ की हरी डालियां तोड़ रहा था?”

“जी हां, बिल्कुल सही कहा है,” हातिम ताई ने जवाब दिया।

बीरबल ने लकड़हारे के पास रखी लकड़ी की गठरी को देखा। उसमें केवल सूखी टहनियां और पत्तियां थीं, कोई हरी डाली नहीं थी।

फिर बीरबल ने पेड़ को ध्यान से देखा। पेड़ की कोई भी डाली टूटी हुई नहीं दिख रही थी। सभी डालियां स्वस्थ और हरी-भरी थीं।

बीरबल ने हातिम ताई से पूछा, “अगर इस लकड़हारे ने तुम्हारे पेड़ की डालियां तोड़ी हैं, तो वे डालियां कहां हैं? और तुम्हारे पेड़ पर टूटने का कोई निशान क्यों नहीं दिख रहा?”

हातिम ताई घबरा गया। उसे समझ आ गया कि बीरबल ने उसकी चाल पकड़ ली है।

बीरबल ने आगे कहा, “हातिम ताई, सच यह है कि तुमने इस गरीब लकड़हारे पर झूठा आरोप लगाया है। यह केवल गिरी हुई सूखी टहनियां उठा रहा था, जिससे तुम्हारा कोई नुकसान नहीं हो रहा था।”

अकबर बादशाह को गुस्सा आया। उन्होंने हातिम ताई से कहा, “तुमने एक गरीब आदमी पर झूठा आरोप लगाया है। यह बहुत गलत बात है।”

हातिम ताई ने माफी मांगी और कहा, “हुजूर, मुझे लगा था कि यह चोरी कर रहा है। मैं गलत था।”

बीरबल ने हातिम ताई से कहा, “तुम्हारे पास इतना धन है, फिर भी तुम एक गरीब आदमी को सूखी टहनियां उठाने से रोक रहे हो। यह कैसी दरियादिली है?”

फिर बीरबल ने लकड़हारे से कहा, “तुम एक ईमानदार आदमी हो। तुमने केवल वही लिया जिसकी किसी को जरूरत नहीं थी।”

अकबर बादशाह ने हातिम ताई को सजा देते हुए कहा, “तुम इस लकड़हारे को एक महीने तक रोज दस रुपए दोगे। और आगे से कोई गरीब आदमी तुम्हारे बगीचे से गिरी हुई सूखी लकड़ी उठाना चाहे तो तुम उसे मना नहीं करोगे।”

हातिम ताई ने सिर झुकाकर हामी भरी। लकड़हारा खुशी से रो पड़ा और बीरबल के पैर छूकर धन्यवाद दिया।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सच्चाई हमेशा जीतती है। धन और शक्ति के नशे में आकर गरीबों पर अत्याचार करना गलत है। बीरबल की तरह बुद्धि और न्याय से हर समस्या का समाधान हो सकता है।

सामाजिक न्याय और धन और शक्ति की कहानियों से हमें यह भी सीख मिलती है कि सच्चाई और ईमानदारी का महत्व हमेशा बना रहना चाहिए।

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