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गुलाब चोर और बीरबल की चतुराई

बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन बहुत हंगामा मचा हुआ था। राजमाली रामदास रोते-रोते दरबार में आया और बादशाह के सामने गिड़गिड़ाने लगा।

“हुजूर, मेरे साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है!” रामदास ने कहा। “कोई गुलाब चोर मेरे बगीचे से सबसे सुंदर गुलाब चुरा ले गया है।”

बादशाह अकबर ने पूछा, “क्या बात है रामदास? कौन से गुलाब की बात कर रहे हो?”

“हुजूर, वो लाल गुलाब जो मैंने खास आपके लिए तैयार किया था। कल रात कोई गुलाब चोर आया और उसे चुरा ले गया। अब मैं आपको क्या भेंट करूंगा?” रामदास ने दुखी होकर कहा।

अकबर को बहुत गुस्सा आया। उन्होंने तुरंत सिपाहियों को आदेश दिया कि इस गुलाब चोर को ढूंढकर लाया जाए। लेकिन कई दिन बीत गए, फिर भी चोर का कोई पता नहीं चला।

एक दिन बीरबल दरबार में आए तो देखा कि बादशाह बहुत परेशान हैं। बीरबल ने पूछा, “हुजूर, आप इतने चिंतित क्यों लग रहे हैं?”

अकबर ने पूरी कहानी बताई। बीरबल ने मुस्कराते हुए कहा, “हुजूर, मैं इस गुलाब चोर को तीन दिन में पकड़ लूंगा।”

“कैसे?” अकबर ने आश्चर्य से पूछा।

“हुजूर, आप मुझ पर भरोसा रखिए। लेकिन मुझे रामदास से कुछ सवाल पूछने होंगे।”

अगले दिन बीरबल ने रामदास को बुलाया और पूछा, “रामदास, तुमने कहा था कि गुलाब चोर ने रात में चोरी की थी। क्या तुमने उसे देखा था?”

“नहीं बीरबल साहब, मैंने नहीं देखा। सुबह उठकर पता चला कि गुलाब गायब है।”

“और वो गुलाब कितना बड़ा था?”

“बहुत बड़ा और खूबसूरत था। उसमें सौ से ज्यादा पंखुड़ियां थीं।”

बीरबल ने और भी कई सवाल पूछे। फिर वे बगीचे में गए और वहां की जांच की। उन्होंने देखा कि बगीचे में कोई पैरों के निशान नहीं थे।

तीसरे दिन बीरबल दरबार में आए और बोले, “हुजूर, मैंने गुलाब चोर को पकड़ लिया है।”

सभी दरबारी चौंक गए। अकबर ने पूछा, “कहां है वो चोर?”

बीरबल ने रामदास की तरफ इशारा करते हुए कहा, “हुजूर, यही है आपका गुलाब चोर।”

रामदास घबरा गया और बोला, “बीरबल साहब, आप क्या कह रहे हैं? मैं चोर कैसे हो सकता हूं?”

बीरबल ने समझाया, “रामदास, तुमने कहा था कि रात में चोरी हुई, लेकिन बगीचे में कोई पैरों के निशान नहीं थे। दूसरी बात, गुलाब के पौधे पर कोई टूटा हुआ तना भी नहीं था।”

“इसका मतलब?” अकबर ने पूछा।

“हुजूर, इसका मतलब यह है कि कोई गुलाब चोर नहीं आया था। रामदास ने खुद ही गुलाब तोड़ा था और किसी को बेच दिया था। फिर झूठ बोलकर आपसे नया गुलाब का पौधा मांगने आया था।”

रामदास का चेहरा पीला पड़ गया। वह बीरबल के पैरों में गिर गया और बोला, “माफ करिए बीरबल साहब। मैंने गलती की है। मेरे घर में बीमारी के कारण पैसों की जरूरत थी, इसलिए मैंने गुलाब बेच दिया था।”

अकबर को रामदास पर गुस्सा आया, लेकिन बीरबल ने कहा, “हुजूर, रामदास ने गलती जरूर की है, लेकिन उसकी मजबूरी भी थी। उसे माफ कर दीजिए और उसकी मदद कीजिए।”

अकबर ने रामदास को माफ कर दिया और उसके इलाज के लिए पैसे भी दिए। रामदास ने वादा किया कि वह फिर कभी झूठ नहीं बोलेगा।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि झूठ बोलना गलत है और सच्चाई हमेशा सामने आ जाती है। मुसीबत के समय में भी ईमानदारी से काम लेना चाहिए।

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