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जादुई बाग की अनोखी कहानी

बहुत समय पहले, बगदाद शहर में एक गरीब लकड़हारा रहता था जिसका नाम हसन था। वह रोज जंगल जाकर लकड़ियाँ काटता और बाजार में बेचकर अपना गुजारा करता था। एक दिन जब वह जंगल के गहरे हिस्से में लकड़ियाँ काट रहा था, तो उसकी कुल्हाड़ी एक पुराने पत्थर से टकराई।

पत्थर हटाने पर उसे एक गुप्त बगीचा दिखाई दिया जो जमीन के नीचे छुपा हुआ था। सीढ़ियों से उतरकर जब हसन उस बगीचे में पहुंचा, तो उसकी आंखें चकाचौंध हो गईं। यह कोई साधारण बगीचा नहीं था, बल्कि एक जादुई बाग था जहाँ हर पेड़ पर सुनहरे फल लटक रहे थे।

बगीचे के बीच में एक सुंदर फव्वारा था जिसमें चांदी जैसा पानी बह रहा था। अचानक एक मधुर आवाज सुनाई दी, “कौन है जो हमारे परी लोक में आया है?”

हसन ने देखा कि एक खूबसूरत परी उसके सामने खड़ी थी। परी का नाम गुलनार था और वह इस जादुई बाग की रक्षक थी। “डरो मत, हसन,” परी ने कहा, “तुम्हारा दिल साफ है इसलिए तुम यहाँ आ सके हो।”

गुलनार ने बताया कि यह जादुई बाग सदियों से यहाँ छुपा हुआ था। “इन सुनहरे फलों में अद्भुत शक्ति है,” उसने समझाया, “जो भी इन्हें सच्चे दिल से खाता है, उसकी सभी बीमारियाँ दूर हो जाती हैं।”

हसन ने पूछा, “क्या मैं इन फलों को अपने साथ ले जा सकता हूँ? मेरे गाँव में बहुत से बीमार लोग हैं।” परी मुस्कराई और बोली, “तुम्हारी नेकी देखकर मैं खुश हूँ। तुम रोज यहाँ आकर तीन फल ले जा सकते हो, लेकिन याद रखना – ये फल केवल जरूरतमंदों के लिए हैं।”

हसन ने वादा किया और तीन सुनहरे फल लेकर घर गया। उसने सबसे पहले अपनी बीमार माँ को फल दिया। माँ के खाते ही उसकी सारी बीमारी गायब हो गई। फिर उसने गाँव के अन्य बीमार लोगों को भी फल दिए।

कुछ दिनों बाद, शहर के एक लालची व्यापारी जहांगीर को इस बात का पता चल गया। वह हसन के पीछे छुपकर गुप्त बगीचे तक पहुँच गया। जब परी गुलनार दिखाई नहीं दी, तो उसने सोचा कि वह बहुत सारे फल चुरा लेगा और अमीर बन जाएगा।

जैसे ही जहांगीर ने लालच से फलों को तोड़ना शुरू किया, अचानक तेज हवा चलने लगी। परी गुलनार प्रकट हुई और गुस्से में बोली, “तुमने इस पवित्र जादुई बाग को अपवित्र किया है। तुम्हारे लालच की सजा मिलेगी।”

जहांगीर के हाथ में जो फल थे, वे तुरंत पत्थर बन गए। परी ने कहा, “जब तक तुम अपने लालच को नहीं छोड़ोगे, ये पत्थर फल नहीं बनेंगे।” डरकर जहांगीर वहाँ से भाग गया।

अगले दिन हसन जब परी लोक पहुँचा, तो गुलनार ने उसे सब कुछ बताया। हसन ने कहा, “मैं जहांगीर से बात करूंगा। शायद वह समझ जाए।” परी ने हसन की दयालुता देखकर उसे एक विशेष उपहार दिया – एक जादुई बीज।

“इस बीज को अपने घर के पास लगाओ,” गुलनार ने कहा, “यह एक छोटा जादुई बाग बन जाएगा जहाँ हमेशा फल लगते रहेंगे। लेकिन याद रखना, ये फल केवल भलाई के लिए इस्तेमाल करना।”

हसन ने जहांगीर को समझाया कि लालच कभी खुशी नहीं देता। जहांगीर को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने माफी मांगी। परी गुलनार ने उसे माफ कर दिया और पत्थर फिर से सुनहरे फल बन गए।

हसन के घर के पास लगा बीज एक सुंदर बगीचा बन गया। वह रोज गाँव के जरूरतमंद लोगों की मदद करता रहा। जहांगीर भी अब अपनी दौलत गरीबों की मदद में लगाने लगा।

इस तरह जादुई बाग की कहानी सभी को सिखाती है कि सच्चाई, दयालुता और निस्वार्थ सेवा ही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है। लालच और स्वार्थ हमेशा दुख लाते हैं, जबकि नेकी और भलाई से जीवन में खुशियाँ आती हैं।

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