
हार नहीं माननी चाहिए | प्रेरणास्पद कहानी
हार नहीं माननी चाहिए | प्रेरणास्पद कहानी एक समय की बात है, प्रतापगढ़ के राजा की कोई संतान नहीं थी. लेकिन राज्य को आगे बढ़ाने के लिए एक उत्तराधिकारी की जरूरत थी. इसलिए राजा ने एक फैसला किया कि वह अपने ही राज्य से किसी एक बच्चे को चुनेगा जो उसका उत्तराधिकारी बनेगा. इस इरादे से राजा ने अपने राज्य के सभी बच्चों को बुलाकर यह घोषणा की कि वह इन बच्चों में से किसी एक को अपना उत्तराधिकारी चुनेग. ये भी पढ़े घमंडी हाँथी और चींटी उसके बाद राजा ने उन बच्चो को एक एक थैली बंटवा दी और कहा, “कि आप सब लोगो को जो थैली दी गई है उसमे अलग-अलग फूलों का बीज हैं. हर बच्चे को सिर्फ एक एक बीज ही दिया गया है आपको इसे अपने घर ले जाकर एक गमले में लगाना है, और 6 महीने बाद हम फिर इस आप सब के इस
























