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सच बोलने वालों को हमेशा खुशियाँ मिलती हैं – बीरबल की कहानी
बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन बहुत ही रोचक घटना घटी। दरबार में सभी दरबारी अपनी-अपनी जगह बैठे हुए थे। बादशाह अकबर अपने सिंहासन पर विराजमान थे और बीरबल अपनी जगह पर मुस्कराते हुए बैठे थे।
अचानक दरबार में एक व्यापारी आया। वह बहुत परेशान लग रहा था। उसने बादशाह के सामने सिर झुकाया और कहा, “जहाँपनाह, मैं आपसे न्याय की गुहार लगाता हूँ।”
बादशाह अकबर ने पूछा, “क्या बात है? तुम इतने परेशान क्यों हो?”
व्यापारी ने कहा, “हुजूर, मेरे पास एक बहुत कीमती हीरा था। कल रात मेरे घर चोरी हो गई। मुझे शक है कि मेरे तीन नौकरों में से किसी एक ने यह चोरी की है।”
बादशाह ने तुरंत आदेश दिया कि उन तीनों नौकरों को दरबार में हाजिर किया जाए। थोड़ी देर बाद तीनों नौकर दरबार में आ गए। उनके नाम थे राम, श्याम और गोपाल।
बादशाह ने तीनों से पूछा, “तुम में से किसने हीरा चुराया है?”
तीनों ने एक साथ कहा, “हुजूर, हमने कोई चोरी नहीं की है।”
बादशाह परेशान हो गए। वे समझ नहीं पा रहे थे कि सच्चा कौन है। तभी उन्होंने बीरबल की तरफ देखा और कहा, “बीरबल, तुम इस मामले को सुलझाओ।”
बीरबल मुस्कराए और बोले, “जहाँपनाह, मैं एक तरीका जानता हूँ जिससे पता चल जाएगा कि सच्चा कौन है। क्योंकि सच बोलने वालों को हमेशा खुशियाँ मिलती हैं।”
बीरबल ने तीनों नौकरों से कहा, “तुम तीनों को मैं एक-एक जादुई छड़ी देता हूँ। यह छड़ी झूठ बोलने वाले के हाथ में रात भर में एक इंच बढ़ जाती है।”
यह कहकर बीरबल ने तीनों को एक-एक समान लकड़ी की छड़ी दी और कहा, “कल सुबह इन छड़ियों को लेकर आना।”
अगली सुबह तीनों नौकर अपनी-अपनी छड़ी लेकर दरबार में आए। बीरबल ने देखा कि राम और श्याम की छड़ी वैसी ही थी जैसी कल दी गई थी, लेकिन गोपाल की छड़ी एक इंच छोटी थी।
बीरबल ने मुस्कराते हुए कहा, “गोपाल, तुमने ही चोरी की है।”
गोपाल घबरा गया और बोला, “नहीं हुजूर, मैंने कोई चोरी नहीं की।”
बीरबल ने समझाया, “गोपाल, तुमने डर के मारे अपनी छड़ी को एक इंच काट दिया है। तुम्हें लगा कि छड़ी बढ़ जाएगी, इसलिए तुमने उसे छोटा कर दिया। लेकिन यह तो सामान्य लकड़ी की छड़ी थी।”
यह सुनकर गोपाल का चेहरा उतर गया। वह समझ गया कि वह पकड़ा गया है। उसने सिर झुकाकर कहा, “माफ करें हुजूर, मैंने ही हीरा चुराया है। मैं इसे वापस कर दूंगा।”
बादशाह अकबर बीरबल की बुद्धिमानी से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा, “वाह बीरबल! तुमने बिना किसी सबूत के सच्चाई का पता लगा लिया।”
बीरबल ने विनम्रता से कहा, “जहाँपनाह, झूठ बोलने वाला हमेशा डरता रहता है। उसे हर वक्त यह चिंता सताती रहती है कि कहीं उसका झूठ पकड़ा न जाए। लेकिन सच बोलने वालों को हमेशा खुशियाँ मिलती हैं क्योंकि उनके मन में कोई डर नहीं होता।”
व्यापारी को अपना हीरा वापस मिल गया। उसने बीरबल का धन्यवाद किया। राम और श्याम खुश थे कि उनकी सच्चाई सामने आ गई।
बादशाह ने गोपाल को माफ कर दिया लेकिन उसे चेतावनी दी कि वह फिर कभी ऐसा न करे। गोपाल ने वादा किया कि वह आगे से हमेशा सच बोलेगा।
उस दिन के बाद से गोपाल ने कभी झूठ नहीं बोला। वह हमेशा सच बोलता था और उसे देखकर लगता था कि सच बोलने वालों को हमेशा खुशियाँ मिलती हैं। उसका चेहरा हमेशा प्रसन्न रहता था और उसे मानसिक शांति मिली थी।
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सच्चाई की हमेशा जीत होती है। झूठ बोलने वाला व्यक्ति हमेशा डर और चिंता में जीता है, जबकि सच बोलने वाले को मानसिक शांति और खुशी मिलती है। सच बोलने वालों को हमेशा खुशियाँ मिलती हैं – यह जीवन का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है जिसे हमें अपनाना चाहिए।
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