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सबसे बड़ा मूर्ख कौन – मूर्खता की पहचान की कहानी
बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन बहुत ही रोचक घटना घटी। दरबार में सभी दरबारी अपनी-अपनी जगह बैठे हुए थे और बादशाह अकबर अपने सिंहासन पर विराजमान थे। अचानक बादशाह अकबर के मन में एक विचित्र प्रश्न आया।
“बीरबल!” अकबर ने आवाज लगाई। “हमारे मन में एक प्रश्न आया है। तुम हमें बताओ कि इस संसार में सबसे बड़ा मूर्ख कौन है?”
यह प्रश्न सुनकर सभी दरबारी चौंक गए। कोई भी इस प्रश्न का उत्तर देने की हिम्मत नहीं कर रहा था। सभी की नजरें बीरबल पर टिक गईं।
बीरबल ने मुस्कराते हुए कहा, “जहांपनाह, यह बहुत ही गहरा प्रश्न है। मुझे इसका उत्तर देने के लिए कुछ समय चाहिए।”
“ठीक है बीरबल, हम तुम्हें तीन दिन का समय देते हैं। तीन दिन बाद तुम्हें हमारे सामने उत्तर प्रस्तुत करना होगा।” अकबर ने आदेश दिया।
बीरबल ने सिर झुकाकर आदेश स्वीकार किया और दरबार से चले गए। घर पहुंचकर वे इस प्रश्न के बारे में गहराई से सोचने लगे। सबसे बड़ा मूर्ख कौन है? यह प्रश्न उनके मन में बार-बार आ रहा था।
दूसरे दिन बीरबल बाजार गए। वहां उन्होंने देखा कि एक व्यापारी अपनी दुकान के सामने खड़ा होकर चिल्ला रहा था, “आइए, आइए! सबसे अच्छा सोना यहां मिलता है। केवल दस रुपए में एक तोला सोना!”
बीरबल ने देखा कि बहुत से लोग उस व्यापारी के पास जा रहे थे और सोना खरीद रहे थे। बीरबल समझ गए कि यह नकली सोना है, लेकिन लोग लालच में आकर इसे खरीद रहे हैं।
तीसरे दिन बीरबल ने एक और दृश्य देखा। एक आदमी अपने घर की छत पर खड़ा होकर चांद को पकड़ने की कोशिश कर रहा था। वह कह रहा था, “मैं चांद को पकड़कर अपने घर में रख लूंगा, फिर रात में दीया जलाने की जरूरत नहीं होगी।”
अब बीरबल के पास अपने प्रश्न का उत्तर था। तीसरे दिन वे दरबार में पहुंचे।
“बीरबल, बताओ, सबसे बड़ा मूर्ख कौन है?” अकबर ने पूछा।
बीरबल ने विनम्रता से कहा, “जहांपनाह, मैंने तीन दिन तक इस प्रश्न पर विचार किया है। मेरे अनुसार सबसे बड़ा मूर्ख वह व्यक्ति है जो बिना सोचे-समझे किसी भी बात पर विश्वास कर लेता है।”
“इसका मतलब?” अकबर ने पूछा।
बीरबल ने समझाया, “जहांपनाह, मैंने बाजार में देखा कि लोग दस रुपए में सोना खरीद रहे थे। वे जानते थे कि असली सोना इतना सस्ता नहीं हो सकता, फिर भी लालच में आकर वे धोखा खा गए। यह मूर्खता है।”
“और दूसरी बात?” अकबर ने जिज्ञासा से पूछा।
“मैंने एक व्यक्ति को चांद पकड़ने की कोशिश करते देखा। वह असंभव कार्य को संभव मानकर अपना समय बर्बाद कर रहा था। यह भी मूर्खता है।”
अकबर ने कहा, “लेकिन बीरबल, हमने तुमसे सबसे बड़ा मूर्ख कौन है, यह पूछा था। तुमने तो मूर्खता के प्रकार बताए हैं।”
बीरबल मुस्कराए और बोले, “जहांपनाह, सबसे बड़ा मूर्ख वह है जो दूसरों की मूर्खता की पहचान करने में इतना व्यस्त रहता है कि अपनी मूर्खता को नहीं देख पाता।”
यह सुनकर अकबर चौंक गए। “तुम्हारा मतलब?”
“जहांपनाह, जब आपने यह प्रश्न पूछा तो आप भी यही तो कर रहे थे। आप दूसरों की मूर्खता जानना चाहते थे, लेकिन यह नहीं सोचा कि यह प्रश्न ही कितना अनुचित है। हर व्यक्ति में कुछ न कुछ मूर्खता होती है, और कुछ न कुछ बुद्धिमानी भी।”
अकबर को बीरबल की बात समझ में आ गई। वे हंसते हुए बोले, “बीरबल, तुमने फिर से हमें एक महत्वपूर्ण सबक सिखाया है। सच में, दूसरों की कमियां ढूंढने से पहले हमें अपनी कमियों पर ध्यान देना चाहिए।”
सभी दरबारी बीरबल की बुद्धिमानी की प्रशंसा करने लगे। बीरबल ने न केवल प्रश्न का उत्तर दिया था, बल्कि सभी को एक गहरी सीख भी दी थी।
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि मूर्खता की पहचान करने से पहले हमें अपने आप को देखना चाहिए। दूसरों की कमियां ढूंढने में समय बर्बाद करने से अच्छा है कि हम अपनी कमियों को सुधारने पर ध्यान दें। सच्ची बुद्धिमानी यही है कि हम अपनी गलतियों को स्वीकार करें और उनसे सीखें।
इस संदर्भ में, समझदार बंदर की कहानी भी हमें यह सिखाती है कि बुद्धिमानी और मूर्खता के बीच का अंतर समझना कितना महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा, व्यापारी का उदय और पतन कहानी में भी हमें लालच और मूर्खता के परिणामों के बारे में बताया गया है।
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