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जामवंत द्वारा हनुमान को शक्ति स्मरण कराना
बहुत समय पहले की बात है, जब भगवान राम माता सीता की खोज में व्याकुल थे। लंका में रावण द्वारा सीता माता का हरण हो चुका था और सभी वानर योद्धा उन्हें खोजने में लगे हुए थे।
समुद्र के किनारे खड़े होकर सभी वानर चिंतित थे। विशाल समुद्र को पार करना असंभव लग रहा था। अंगद, जामवंत, और अन्य वानर योद्धा सोच रहे थे कि कैसे इस विशाल जल राशि को पार किया जाए।
“हे वानर वीरों!” जामवंत ने गंभीर स्वर में कहा, “हमें कोई ऐसा योद्धा चाहिए जो इस समुद्र को पार कर सके।”
सभी वानरों ने अपनी-अपनी शक्ति बताई। कोई दस योजन तक जा सकता था, कोई बीस योजन तक। परंतु सौ योजन चौड़े समुद्र को पार करने की शक्ति किसी में नहीं थी।
तभी जामवंत की नजर हनुमान जी पर पड़ी, जो चुपचाप एक कोने में बैठे हुए थे। उनके चेहरे पर उदासी थी और वे अपनी शक्तियों को भूल चुके थे।
“हनुमान!” जामवंत ने प्रेम से पुकारा। “तुम यहाँ चुप क्यों बैठे हो? क्या तुम्हें अपनी महान शक्तियाँ याद नहीं हैं?”
हनुमान जी ने विनम्रता से कहा, “हे जामवंत जी, मैं तो एक साधारण वानर हूँ। मुझमें कोई विशेष शक्ति नहीं है।”
यह सुनकर जामवंत मुस्कराए। वे जानते थे कि हनुमान जी को अपनी असीम शक्तियों का ज्ञान नहीं था। जामवंत द्वारा शक्ति स्मरण कराना आवश्यक था।
“वत्स हनुमान!” जामवंत ने स्नेह से कहा, “तुम पवन पुत्र हो। तुम्हारे पिता वायु देव हैं। तुम्हारी माता अंजना एक महान तपस्विनी थीं।”
जामवंत ने आगे कहा, “जब तुम बालक थे, तो सूर्य को फल समझकर खाने के लिए आकाश में उड़ गए थे। इंद्र के वज्र से भी तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ा था।”
हनुमान जी के नेत्र चमकने लगे। धीरे-धीरे उन्हें अपनी शक्तियों का स्मरण होने लगा।
“तुम पर्वत उठा सकते हो, समुद्र पार कर सकते हो, और आकाश में उड़ सकते हो।” जामवंत ने उत्साह से कहा। “तुम्हारे अंदर अपार बल, बुद्धि और साहस है।”
जामवंत द्वारा शक्ति स्मरण कराना का प्रभाव दिखने लगा। हनुमान जी का सीना गर्व से फूल गया। उनके चेहरे पर तेज आ गया।
“हाँ!” हनुमान जी ने जोर से कहा। “मुझे याद आ रहा है। मैं पवन पुत्र हूँ। मैं समुद्र पार कर सकता हूँ।”
सभी वानर खुशी से चिल्लाने लगे। हनुमान जी ने अपना विशाल रूप धारण किया। उनका शरीर पर्वत के समान हो गया।
“जय श्री राम!” कहकर हनुमान जी ने एक विशाल छलांग लगाई और समुद्र पार करने के लिए आकाश में उड़ गए।
इस प्रकार जामवंत द्वारा शक्ति स्मरण कराना सफल हुआ। हनुमान जी ने लंका पहुँचकर सीता माता का पता लगाया और राम जी के पास वापस आकर सारी जानकारी दी।
शिक्षा: इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि कभी-कभी हम अपनी शक्तियों को भूल जाते हैं। एक अच्छे मार्गदर्शक की आवश्यकता होती है जो हमें हमारी क्षमताओं का स्मरण कराए। जामवंत जी की तरह हमें भी दूसरों की शक्तियों को पहचानना चाहिए और उन्हें प्रेरणा देनी चाहिए।
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