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हम्माम बाग़ का रहस्य – अकबर बीरबल की कहानी
बादशाह अकबर के महल में एक सुंदर हम्माम बाग़ था। इस बगीचे में रंग-बिरंगे फूल, सुगंधित पेड़ और एक खूबसूरत तालाब था। लेकिन कुछ दिनों से इस हम्माम बाग़ का रहस्य सबको परेशान कर रहा था।
रोज रात को बगीचे से अजीब आवाजें आती थीं। माली और पहरेदार डर के मारे वहाँ जाने से कतराते थे। कुछ लोगों का कहना था कि वहाँ कोई भूत रहता है, तो कुछ कहते थे कि कोई चोर छुप कर रहता है।
एक दिन बादशाह अकबर ने दरबार में यह समस्या रखी। “हमारे हम्माम बाग़ में कुछ अजीब हो रहा है। रात को वहाँ से डरावनी आवाजें आती हैं। कोई वहाँ जाने की हिम्मत नहीं करता।”
दरबारियों में से एक ने कहा, “हुजूर, वहाँ जरूर कोई भूत-प्रेत का साया है। हमें किसी तांत्रिक को बुलाना चाहिए।”
दूसरे दरबारी ने सुझाव दिया, “जहाँपनाह, हो सकता है कोई चोर वहाँ छुप कर रहता हो। हमें सिपाहियों को भेजना चाहिए।”
बीरबल चुपचाप सब सुन रहा था। अकबर ने उससे पूछा, “बीरबल, तुम्हारा क्या विचार है इस हम्माम बाग़ के रहस्य के बारे में?”
बीरबल ने विनम्रता से कहा, “हुजूर, मैं आज रात खुद जाकर इस रहस्य का पता लगाऊंगा। लेकिन मुझे अकेले जाने दीजिए।”
अकबर चिंतित हुआ, “लेकिन बीरबल, अगर वहाँ सच में कोई खतरा हो तो?”
“जहाँपनाह, डर से भागने से रहस्य का समाधान नहीं होता। सच्चाई का सामना करना पड़ता है,” बीरबल ने जवाब दिया।
रात का समय हुआ। बीरबल अकेले हम्माम बाग़ की तरफ चल पड़ा। चाँदनी रात में बगीचा बहुत सुंदर लग रहा था, लेकिन एक अजीब सी खामोशी थी।
अचानक बीरबल को आवाज सुनाई दी – “हूँ… हूँ… हाँ… हाँ…” यह आवाज तालाब की तरफ से आ रही थी। बीरबल डरा नहीं, बल्कि धीरे-धीरे उस आवाज की तरफ बढ़ा।
तालाब के पास पहुँचकर बीरबल ने देखा कि पानी में कुछ हलचल हो रही है। वह चुपचाप एक पेड़ के पीछे छुप गया और इंतजार करने लगा।
थोड़ी देर बाद तालाब से एक बड़ा सा कछुआ बाहर निकला। वह धीरे-धीरे किनारे पर आया और “हूँ… हूँ…” की आवाज करने लगा। फिर एक और कछुआ निकला, फिर एक और। जल्दी ही पूरा तालाब का किनारा कछुओं से भर गया।
बीरबल समझ गया कि यही था हम्माम बाग़ का रहस्य। ये कछुए रात को पानी से बाहर निकलकर सांस लेने और आराम करने आते थे। उनकी सांस लेने की आवाज ही लोगों को डरावनी लग रही थी।
अगली सुबह दरबार में बीरबल ने सबको सच्चाई बताई। “हुजूर, हम्माम बाग़ में कोई भूत-प्रेत नहीं है। वहाँ बड़े-बड़े कछुए रहते हैं जो रात को पानी से बाहर निकलते हैं।”
अकबर हैरान रह गया, “लेकिन बीरबल, इतनी डरावनी आवाज कछुओं की कैसे हो सकती है?”
बीरबल मुस्कराया, “जहाँपनाह, जब हम किसी चीज से डरते हैं तो छोटी सी आवाज भी हमें बहुत बड़ी लगती है। डर हमारी कल्पना को बढ़ा देता है।”
बादशाह अकबर ने कहा, “तो अब हम इन कछुओं का क्या करें?”
“हुजूर, ये कछुए हमारे बगीचे की सुंदरता बढ़ाते हैं। ये तालाब को साफ रखते हैं और मच्छरों को खाते हैं। हमें इन्हें यहीं रहने देना चाहिए,” बीरबल ने सुझाव दिया।
अकबर खुश हो गया, “वाह बीरबल! तुमने न केवल हम्माम बाग़ के रहस्य को सुलझाया बल्कि हमें एक महत्वपूर्ण सबक भी दिया।”
उस दिन के बाद से कोई भी हम्माम बाग़ से नहीं डरता था। लोग रात को भी वहाँ जाकर कछुओं को देखते और उनकी प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेते।
सीख: इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि डर अक्सर हमारी कल्पना की उपज होता है। बिना जाने-समझे किसी चीज से डरना गलत है। सच्चाई का सामना करने से ही समस्या का समाधान मिलता है। बीरबल की तरह हमें भी साहस के साथ हर परिस्थिति का सामना करना चाहिए।









