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गरीब ब्राह्मण और खजाना – बुद्धिमान कौवे की कहानी
एक छोटे से गाँव में गरीब ब्राह्मण पंडित रामदास रहते थे। वे बहुत ही सीधे-सादे और धर्मपरायण व्यक्ति थे। उनके पास न तो कोई जमीन थी और न ही कोई धन-दौलत। वे रोज मंदिर में पूजा-पाठ करके और लोगों के घर जाकर कथा-कहानी सुनाकर अपना गुजारा करते थे।
पंडित जी के घर के पास एक पुराना पीपल का पेड़ था। उस पेड़ पर काका कौवा अपने परिवार के साथ रहता था। काका कौवा बहुत ही बुद्धिमान और दयालु था। वह रोज देखता था कि गरीब ब्राह्मण पंडित जी कितनी मुश्किल से अपना जीवन बिता रहे हैं।
एक दिन की बात है, काका कौवा भोजन की तलाश में दूर जंगल में गया था। वहाँ उसने देखा कि एक पुराने खंडहर के नीचे कुछ चमकीला दिख रहा है। जब वह पास गया तो देखा कि वहाँ सोने के सिक्कों से भरा एक बड़ा घड़ा दबा हुआ था।
“अरे वाह! यह तो खजाना है!” काका कौवा खुशी से चिल्लाया। “लेकिन मैं इसका क्या करूँगा? मुझे तो सिर्फ दाना-पानी चाहिए। यह खजाना तो पंडित जी के काम आएगा।”
काका कौवा तुरंत अपने मित्र चीकू गिलहरी के पास गया। चीकू गिलहरी भी बहुत चतुर थी और हमेशा दूसरों की मदद करने को तैयार रहती थी।
“चीकू बहन, मैंने जंगल में एक बड़ा खजाना देखा है। यह हमारे पंडित जी के काम आ सकता है। लेकिन समस्या यह है कि वह बहुत भारी है और हम उसे उठा नहीं सकते।” काका कौवा ने अपनी समस्या बताई।
चीकू गिलहरी ने सोचा और फिर बोली, “काका भाई, हमें कोई तरीका सोचना होगा जिससे पंडित जी खुद ही उस जगह पहुँच जाएं।”
दोनों मित्रों ने मिलकर एक योजना बनाई। अगले दिन जब पंडित जी मंदिर से लौट रहे थे, तो काका कौवा उनके सामने आकर जोर-जोर से काँव-काँव करने लगा। फिर वह थोड़ा आगे उड़कर फिर से काँव-काँव करने लगा।
पंडित जी को लगा कि कौवा कुछ कहने की कोशिश कर रहा है। वे कौवे के पीछे-पीछे चलने लगे। काका कौवा उन्हें सीधे उस जगह ले गया जहाँ खजाना दबा हुआ था।
वहाँ पहुँचकर पंडित जी ने देखा कि जमीन में कुछ गड़ा हुआ है। जब उन्होंने खोदा तो उनकी आँखें चमक उठीं। वहाँ सोने के सिक्कों से भरा एक बड़ा घड़ा था!
“हे भगवान! यह कैसा चमत्कार है!” पंडित जी की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। “लगता है भगवान ने मेरी सुध ली है।”
पंडित जी ने खजाना घर ले जाकर सुरक्षित रख दिया। अब उनकी सारी परेशानियाँ दूर हो गईं। वे अपनी जरूरतें पूरी कर सकते थे और गाँव के गरीब लोगों की भी मदद कर सकते थे।
काका कौवा और चीकू गिलहरी यह सब देखकर बहुत खुश थे। उन्होंने अपनी बुद्धि का सही उपयोग करके एक अच्छे इंसान की मदद की थी।
कुछ दिन बाद पंडित जी ने पेड़ के नीचे काका कौवा के लिए रोज दाना-पानी रखना शुरू कर दिया। वे समझ गए थे कि यह सब काका कौवा की बदौलत ही हुआ है।
एक दिन पंडित जी ने काका कौवा से कहा, “काका, तुमने मेरी इतनी बड़ी मदद की है। तुम्हारी वजह से ही मुझे यह खजाना मिला है। अब मैं गाँव के सभी गरीब लोगों की मदद कर सकूंगा।”
काका कौवा खुशी से बोला, “पंडित जी, यही तो मैं चाहता था। खजाना सिर्फ पैसा नहीं होता, बल्कि दूसरों की मदद करने की भावना भी एक बड़ा खजाना है।”
कहानी की सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सच्चा खजाना वही है जो दूसरों के काम आए। बुद्धि और दयालुता का सही उपयोग करके हम न केवल अपनी बल्कि दूसरों की भी मदद कर सकते हैं। गरीब ब्राह्मण की तरह सादा जीवन जीने वाले लोग भी भगवान की कृपा से सफल हो सकते हैं, और काका कौवा की तरह छोटे जीव भी बड़े काम कर सकते हैं।














