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गधे के कान – चापलूसों को सबक देने की कहानी
बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन बहुत ही रोचक घटना घटी। दरबार में कई चापलूस दरबारी बैठे हुए थे जो हमेशा बादशाह की झूठी तारीफ करते रहते थे।
उस दिन बादशाह अकबर ने अपने बाल कटवाए थे। नाई ने बहुत ही अजीब तरीके से उनके बाल काटे थे, जिससे वे देखने में बिल्कुल गधे के कान जैसे लग रहे थे। लेकिन दरबारियों ने इसकी सच्चाई बताने की हिम्मत नहीं की।
जैसे ही बादशाह दरबार में आए, सभी चापलूस दरबारी उनकी तारीफ करने लगे।
“हुजूर, आज आप बहुत ही सुंदर लग रहे हैं!” एक दरबारी ने कहा।
“जी हाँ महाराज, आपके बाल तो बिल्कुल देवताओं जैसे लग रहे हैं!” दूसरे ने कहा।
“बादशाह सलामत, आपका यह नया हेयर स्टाइल तो बेमिसाल है!” तीसरे दरबारी ने झूठी खुशामद की।
बादशाह अकबर को लगा कि सच में उनके बाल बहुत अच्छे लग रहे हैं। वे खुश होकर बोले, “बीरबल कहाँ है? मैं उससे भी अपने बालों के बारे में पूछना चाहता हूँ।”
जब बीरबल दरबार में आया तो बादशाह ने पूछा, “बीरबल, बताओ मेरे बाल कैसे लग रहे हैं?”
बीरबल ने ध्यान से बादशाह को देखा। उसे तुरंत समझ आ गया कि बादशाह के बाल वास्तव में गधे के कान जैसे दिख रहे हैं। लेकिन वह जानता था कि सच कहना खतरनाक हो सकता है।
बीरबल ने चतुराई से कहा, “हुजूर, मैं आपके बालों के बारे में कल बताऊंगा। आज मुझे जुकाम है और मेरी आँखें ठीक से दिखाई नहीं दे रहीं।”
अगले दिन बीरबल दरबार में आया तो उसके सिर पर टोपी लगी हुई थी। बादशाह ने पूछा, “बीरबल, आज तुमने टोपी क्यों पहनी है?”
बीरबल ने जवाब दिया, “हुजूर, कल रात मैंने भी अपने बाल कटवाए थे। नाई ने मेरे बाल इतने बुरे काटे हैं कि वे बिल्कुल गधे के कान जैसे लग रहे हैं। इसलिए मैंने टोपी पहनी है।”
यह सुनकर बादशाह अकबर को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने समझ लिया कि अगर बीरबल के बाल गधे के कान जैसे लग रहे हैं और वह टोपी पहनने पर मजबूर है, तो शायद उनके बाल भी वैसे ही दिख रहे होंगे।
बादशाह ने तुरंत आईना मंगवाया और जब उन्होंने अपना चेहरा देखा तो वे समझ गए कि उनके बाल वास्तव में बहुत ही अजीब लग रहे थे।
बादशाह ने गुस्से से चापलूस दरबारियों की तरफ देखा और कहा, “तुम सभी ने मुझसे झूठ कहा! मेरे बाल तो सच में गधे के कान जैसे लग रहे हैं!”
सभी दरबारी डर गए और माफी मांगने लगे। लेकिन बादशाह ने कहा, “बीरबल ने मुझसे सच नहीं छुपाया। उसने चतुराई से मुझे एहसास दिलाया कि मेरे बाल कैसे लग रहे हैं।”
बीरबल ने विनम्रता से कहा, “हुजूर, सच्चे मित्र वही होते हैं जो आपकी गलतियों को सुधारने में मदद करते हैं, न कि झूठी तारीफ करके आपको गुमराह करते हैं।”
बादशाह अकबर ने तुरंत नाई को बुलाया और अपने बाल ठीक से कटवाए। उन्होंने चापलूस दरबारियों को चेतावनी दी कि आगे से वे हमेशा सच बोलें।
इस घटना के बाद दरबार में सभी ने सीखा कि चापलूसी करना गलत है और सच्चाई हमेशा बेहतर होती है। बीरबल की बुद्धिमानी की सभी ने प्रशंसा की।
सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि झूठी तारीफ या चापलूसी करना गलत है। सच्चे मित्र वे होते हैं जो हमारी गलतियों को बताकर हमें सुधारने में मदद करते हैं। गधे के कान जैसी इस कहानी से हमें समझना चाहिए कि चापलूसी से किसी का भला नहीं होता, बल्कि सच्चाई ही हमेशा जीतती है।












