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दयालु किसान और धोखेबाज सांप की कहानी

बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गांव में रामू नाम का एक दयालु किसान रहता था। वह अपने खेतों में मेहनत से काम करता था और सभी जीव-जंतुओं पर दया करता था। रामू का दिल बहुत बड़ा था और वह हमेशा दूसरों की मदद करने को तैयार रहता था।

एक ठंडी सर्दियों की सुबह, जब रामू अपने खेत में काम कर रहा था, तो उसकी नजर एक काले सांप पर पड़ी। वह सांप बर्फ की वजह से अकड़ गया था और मरने के कगार पर था। उसकी सांस धीमी हो रही थी और वह हिल भी नहीं पा रहा था।

“अरे! यह बेचारा सांप तो मर जाएगा,” रामू ने मन में सोचा। उसका दयालु दिल पिघल गया। बिना कुछ सोचे-समझे, उसने सांप को उठाया और अपनी गर्म चादर में लपेट लिया।

रामू ने सांप को अपने घर ले जाकर आग के पास रखा। धीरे-धीरे गर्मी पाकर सांप में जान आने लगी। उसकी आंखें खुलीं और वह हिलने-डुलने लगा। रामू खुश हो गया कि उसने एक जीव की जान बचाई है।

लेकिन जैसे ही सांप पूरी तरह से ठीक हुआ, उसका असली स्वभाव सामने आ गया। वह अपनी जान बचाने वाले दयालु किसान को भूल गया और अपनी फुफकार भरने लगा।

“अब मैं तुम्हें डसूंगा!” सांप ने गुस्से से कहा। “मैं एक जहरीला सांप हूं और किसी इंसान को जिंदा नहीं छोड़ता।”

रामू हैरान रह गया। उसने कहा, “लेकिन मैंने तो तुम्हारी जान बचाई है! तुम मर जाते अगर मैं तुम्हें गर्मी नहीं देता।”

सांप ने जवाब दिया, “यह मेरा स्वभाव है। मैं अपना स्वभाव नहीं बदल सकता। तुमने मुझे बचाया हो या न हो, मैं तुम्हें डसूंगा ही।”

इतने में एक बुद्धिमान बूढ़ा कौआ वहां आया। उसने पूरी बात सुनी और रामू से कहा, “मित्र, यह सांप अपना स्वभाव नहीं छोड़ेगा। तुम्हें इससे बचना होगा।”

कौए ने एक योजना बनाई। उसने रामू से कहा कि वह सांप को वापस ठंड में ले जाए। जब सांप फिर से अकड़ जाए, तो उसे वहीं छोड़ दे।

रामू ने ऐसा ही किया। उसने सांप को बाहर ठंड में रख दिया। कुछ देर बाद सांप फिर से अकड़ गया और बेहोश हो गया। इस बार रामू ने उसे वहीं छोड़ दिया और घर चला गया।

बुद्धिमान कौए ने रामू को समझाया, “दोस्त, दया करना अच्छी बात है, लेकिन हमें यह भी देखना चाहिए कि सामने वाला कैसा है। कुछ लोग अपना बुरा स्वभाव कभी नहीं छोड़ते।”

नैतिक शिक्षा: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि दया और करुणा महान गुण हैं, लेकिन हमें बुद्धिमानी से काम लेना चाहिए। हमें यह समझना चाहिए कि कुछ लोग अपना बुरा स्वभाव नहीं छोड़ते, चाहे आप उनके साथ कितनी भी भलाई करें। इसलिए दया करते समय सावधानी भी बरतनी चाहिए।

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