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हातिम ताई और शैतान का पेड़ – अकबर बीरबल की कहानी
एक दिन बादशाह अकबर के दरबार में एक अजीब समस्या लेकर आया था। दरबारी परेशान थे और सभी मंत्री चुप बैठे थे। केवल बीरबल ही मुस्कराते हुए बैठा था।
“जहांपनाह,” एक व्यापारी ने कहा, “हमारे शहर के बाहर एक विचित्र पेड़ है। लोग कहते हैं कि वह शैतान का पेड़ है। जो भी उसके पास जाता है, वह गायब हो जाता है।”
अकबर ने गंभीरता से पूछा, “क्या यह सच है? कितने लोग गायब हुए हैं?”
“महाराज, पिछले महीने तीन लोग गायब हो गए हैं। सभी हातिम ताई की तरह बहादुर थे, लेकिन शैतान का पेड़ उन्हें निगल गया।” व्यापारी डरते हुए बोला।
दरबार में सन्नाटा छा गया। सभी मंत्री डर गए थे। तभी बीरबल ने हंसते हुए कहा, “जहांपनाह, मैं इस रहस्य को सुलझा सकता हूं।”
अकबर ने आश्चर्य से पूछा, “बीरबल, तुम्हें डर नहीं लगता? यह शैतान का पेड़ है!”
“महाराज, हातिम ताई भी डरते नहीं थे, लेकिन वे बुद्धि का उपयोग करते थे। मैं भी वैसा ही करूंगा।” बीरबल ने विनम्रता से कहा।
अगले दिन बीरबल उस रहस्यमय पेड़ के पास पहुंचा। वह एक विशाल बरगद का पेड़ था, जिसकी जड़ें जमीन में गहरी थीं। पेड़ के चारों ओर अंधेरा था और हवा में अजीब सी आवाजें आ रही थीं।
बीरबल ने ध्यान से देखा। पेड़ के नीचे कुछ कपड़े के टुकड़े पड़े थे। उसने सोचा, “यदि यह सच में शैतान का पेड़ होता, तो यहां कपड़े क्यों होते?”
अचानक पेड़ से एक डरावनी आवाज आई, “कौन है वहां? भाग जाओ, नहीं तो मैं तुम्हें भी निगल जाऊंगा!”
बीरबल हंसा और बोला, “अरे शैतान जी, आपकी आवाज तो बिल्कुल इंसान जैसी है! हातिम ताई होते तो आपसे डरते नहीं, और मैं भी नहीं डरूंगा।”
बीरबल ने पेड़ के तने को ध्यान से देखा। उसे एक छुपा हुआ दरवाजा दिखाई दिया। वह समझ गया कि यह कोई जादू नहीं, बल्कि किसी की चालाकी है।
उसने जोर से आवाज लगाई, “अरे डाकुओं, बाहर आ जाओ! तुम्हारी चालाकी पकड़ी गई है!”
तुरंत पेड़ के अंदर से पांच डाकू बाहर निकले। उनका सरदार बोला, “तुम कैसे जान गए?”
बीरबल ने समझाया, “हातिम ताई की तरह मैंने भी बुद्धि का उपयोग किया। पहले तो यहां कपड़े के टुकड़े पड़े थे, जो बताते थे कि यहां लोग आए थे। दूसरे, शैतान की आवाज बिल्कुल इंसान जैसी थी। तीसरे, पेड़ के तने में छुपा हुआ दरवाजा था।”
डाकुओं ने सारी सच्चाई बताई। वे इस पेड़ के अंदर छुप कर रहते थे और लोगों को डरा कर उनका सामान लूट लेते थे। गायब हुए लोग दरअसल डर कर भाग गए थे।
बीरबल ने डाकुओं को पकड़ कर दरबार में पेश किया। अकबर बहुत खुश हुआ और बोला, “बीरबल, तुमने हातिम ताई की तरह बहादुरी और बुद्धि दिखाई है।”
“जहांपनाह, हातिम ताई हमें सिखाते हैं कि सच्ची बहादुरी डर पर काबू पाने में है, अंधविश्वास में नहीं। शैतान का पेड़ सिर्फ लोगों के डर का फायदा उठाने वाले लोगों की चालाकी थी।” बीरबल ने विनम्रता से कहा।
अकबर ने प्रसन्न होकर कहा, “आज से वह पेड़ ‘बुद्धि का पेड़’ कहलाएगा, क्योंकि तुमने वहां बुद्धि का प्रयोग किया।”
इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि डर और अंधविश्वास से कभी हार नहीं माननी चाहिए। हातिम ताई की तरह बुद्धि और साहस का उपयोग करके हर समस्या का समाधान मिल सकता है। सच्चा शैतान अज्ञानता है, ज्ञान से उसे हराया जा सकता है।
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