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बत्तख के अंडे के बराबर बड़ा मोती
बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन एक अजीब सी घटना घटी। दरबार में एक व्यापारी आया जो अपने साथ एक बहुत ही अनमोल मोती लेकर आया था। वह मोती बत्तख के अंडे के बराबर बड़ा था और उसकी चमक देखते ही बनती थी।
व्यापारी ने बादशाह अकबर के सामने झुकते हुए कहा, “जहांपनाह, यह मोती मैंने समुद्र की गहराई से निकलवाया है। यह बत्तख के अंडे के बराबर बड़ा मोती है और इसकी कीमत एक लाख स्वर्ण मुद्राएं है।”
बादशाह अकबर उस मोती को देखकर बहुत प्रभावित हुए। मोती वास्तव में अद्भुत था। उन्होंने व्यापारी से पूछा, “क्या तुम्हारे पास इस मोती की सच्चाई का कोई प्रमाण है?”
व्यापारी ने कहा, “महाराज, यह मोती इतना दुर्लभ है कि पूरी दुनिया में केवल तीन ही ऐसे मोती हैं। एक मेरे पास है, दूसरा चीन के राजा के पास है, और तीसरा समुद्र की गहराई में छुपा हुआ है।”
दरबारियों में से किसी को यकीन नहीं आ रहा था। तभी बादशाह अकबर ने बीरबल की तरफ देखा और कहा, “बीरबल, तुम इस मोती की जांच करो और बताओ कि यह सच में बत्तख के अंडे के बराबर बड़ा मोती है या नहीं।”
बीरबल ने मोती को ध्यान से देखा। वह वास्तव में बहुत सुंदर और बड़ा था। लेकिन बीरबल के मन में कुछ संदेह था। उन्होंने व्यापारी से कहा, “भाई, यह मोती तो वाकई अनमोल लगता है। लेकिन मैं इसकी एक परीक्षा करना चाहता हूं।”
व्यापारी घबरा गया और बोला, “कैसी परीक्षा? कहीं मोती को नुकसान तो नहीं होगा?”
बीरबल मुस्कराए और कहा, “बिल्कुल नहीं। मैं सिर्फ यह देखना चाहता हूं कि यह सच में बत्तख के अंडे के बराबर है या नहीं। क्या आप एक बत्तख का अंडा ला सकते हैं?”
व्यापारी की सांस फूलने लगी। उसने कहा, “यह… यह क्यों जरूरी है?”
बीरबल ने कहा, “अगर यह मोती सच में बत्तख के अंडे के बराबर बड़ा है, तो हमें इसकी तुलना करनी चाहिए। महाराज एक लाख स्वर्ण मुद्राएं देने जा रहे हैं, तो सच्चाई जानना जरूरी है।”
दरबार में एक बत्तख का अंडा मंगवाया गया। जब बीरबल ने मोती और अंडे को एक साथ रखा, तो सभी को पता चल गया कि मोती अंडे से काफी छोटा था।
बीरबल ने व्यापारी से कहा, “मित्र, यह मोती तो बत्तख के अंडे से आधा है। फिर तुमने कैसे कहा कि यह बत्तख के अंडे के बराबर बड़ा मोती है?”
व्यापारी का चेहरा पीला पड़ गया। उसने हकलाते हुए कहा, “मैं… मैंने… दरअसल मैंने तोते के अंडे से तुलना की थी।”
बीरबल हंसे और बोले, “तो फिर तुमने बत्तख का नाम क्यों लिया? और यह मोती भी असली नहीं लगता।”
बीरबल ने मोती को पानी में डाला। असली मोती पानी में चमकता है, लेकिन यह मोती धुंधला हो गया। यह एक नकली मोती था जो कांच से बना था।
बादशाह अकबर को गुस्सा आया। उन्होंने व्यापारी को दरबार से निकाल देने का आदेश दिया। व्यापारी ने माफी मांगी और वादा किया कि वह फिर कभी झूठ नहीं बोलेगा।
बादशाह अकबर ने बीरबल की तारीफ करते हुए कहा, “बीरबल, तुमने आज मुझे एक बड़े धोखे से बचाया है। अगर तुम न होते तो मैं एक लाख स्वर्ण मुद्राएं बर्बाद कर देता।”
बीरबल ने विनम्रता से कहा, “जहांपनाह, सच्चाई हमेशा सामने आ जाती है। हमें किसी भी चीज को खरीदने से पहले उसकी अच्छी तरह जांच करनी चाहिए।”
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी भी किसी की बातों में आकर जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहिए। हर चीज की सच्चाई जानना जरूरी है। झूठ बोलना पाप है और सच्चाई हमेशा जीतती है। बुद्धिमानी और धैर्य से हर समस्या का समाधान मिल जाता है।
इस संदर्भ में, आप समझदार बंदर की कहानी भी पढ़ सकते हैं, जो हमें सच्चाई और बुद्धिमानी के महत्व को समझाती है।
इसके अलावा, व्यापारी का उदय और पतन कहानी भी व्यापारियों की चालाकियों और उनके परिणामों के बारे में एक महत्वपूर्ण संदेश देती है।















