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कोहनिदा पहाड़ की खोज – अकबर बीरबल की कहानी

बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन एक अजीब सी चर्चा हो रही थी। दरबारी कह रहे थे कि दूर पहाड़ों में कोहनिदा पहाड़ नाम का एक रहस्यमय पहाड़ है, जहाँ अनमोल खजाना छुपा हुआ है।

“हुजूर, वह पहाड़ बहुत खतरनाक है,” एक दरबारी ने कहा। “वहाँ जाने वाला कोई भी व्यक्ति वापस नहीं आता।”

बादशाह अकबर की आँखों में चमक आ गई। “अगर वाकई में कोहनिदा पहाड़ की खोज में खजाना मिल सकता है, तो हमें वहाँ जाना चाहिए।”

बीरबल मुस्कराते हुए बोले, “जहाँपनाह, क्या आपको लगता है कि हमें सच में उस पहाड़ की तलाश करनी चाहिए?”

“हाँ बीरबल! कल सुबह हम सभी कोहनिदा पहाड़ की खोज के लिए निकलेंगे,” अकबर ने घोषणा की।

अगली सुबह, बादशाह अकबर, बीरबल और कुछ सैनिकों का दल पहाड़ों की ओर चल पड़ा। रास्ते में उन्हें एक बूढ़ा आदमी मिला।

“बाबा, क्या आप कोहनिदा पहाड़ के बारे में कुछ जानते हैं?” अकबर ने पूछा।

बूढ़े आदमी ने सिर हिलाया। “हुजूर, वह पहाड़ बहुत रहस्यमय है। वहाँ जाने के लिए आपको तीन परीक्षाओं से गुजरना होगा।”

“कैसी परीक्षाएँ?” बीरबल ने जिज्ञासा से पूछा।

“पहली परीक्षा है बुद्धि की, दूसरी साहस की, और तीसरी धैर्य की,” बूढ़े ने समझाया।

कुछ घंटों की यात्रा के बाद, वे एक विशाल पहाड़ के सामने पहुँचे। पहाड़ की तलहटी में एक गुफा थी, जिसके मुँह पर लिखा था – “कोहनिदा पहाड़ की खोज करने वाले, अंदर आओ।”

गुफा में प्रवेश करते ही उन्हें एक आवाज सुनाई दी: “पहली परीक्षा – इस पहेली का उत्तर दो: मैं हूँ लेकिन दिखाई नहीं देता, मैं चलता हूँ लेकिन पैर नहीं हैं। मैं क्या हूँ?”

सभी सोचने लगे। अकबर परेशान हो गए, लेकिन बीरबल मुस्कराए। “जहाँपनाह, उत्तर है हवा।”

“सही उत्तर!” आवाज गूँजी। अचानक एक दरवाजा खुल गया।

दूसरे कमरे में एक विशाल सिंह बैठा था। “दूसरी परीक्षा – साहस की। कौन मेरे पास आकर मेरी पीठ थपथपाएगा?”

सैनिक डर गए, लेकिन बीरबल आगे बढ़े। जैसे ही उन्होंने सिंह को छुआ, वह एक सुनहरी मूर्ति में बदल गया।

तीसरे कमरे में एक बड़ा घड़ा था जिसमें से धीरे-धीरे पानी टपक रहा था। “तीसरी परीक्षा – धैर्य की। इस घड़े को भरने तक प्रतीक्षा करो।”

अकबर बेचैन हो गए। “यह कितना समय लगेगा?”

बीरबल शांति से बैठ गए। “जहाँपनाह, कोहनिदा पहाड़ की खोज में धैर्य सबसे महत्वपूर्ण है।”

घंटों बाद घड़ा भर गया। अचानक पूरा कमरा सुनहरी रोशनी से भर गया। वहाँ अनगिनत सोने-चाँदी के सिक्के, हीरे-जवाहरात और कीमती वस्तुएँ थीं।

“यह सब हमारा है!” अकबर खुशी से चिल्लाए।

लेकिन बीरबल ने कहा, “जहाँपनाह, सबसे बड़ा खजाना तो हमें पहले ही मिल गया।”

“कैसा खजाना?” अकबर ने पूछा।

बुद्धि, साहस और धैर्य का खजाना। यही तो असली संपत्ति है। कोहनिदा पहाड़ की खोज ने हमें सिखाया कि जीवन में सफलता पाने के लिए इन तीन गुणों की जरूरत होती है।”

अकबर समझ गए। उन्होंने खजाने का एक हिस्सा गरीबों में बाँट दिया और बाकी राजकोष में रख दिया।

वापसी में अकबर ने कहा, “बीरबल, आज मुझे एहसास हुआ कि सच्चा खजाना सोना-चाँदी नहीं, बल्कि अच्छे गुण हैं।”

सीख: जीवन में सफलता पाने के लिए बुद्धि, साहस और धैर्य की जरूरत होती है। यही सच्ची संपत्ति है जो हमेशा काम आती है।

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