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बीरबल और खूंखार घोड़ा
बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन एक व्यापारी आया। उसके पास एक बहुत ही सुंदर लेकिन खूंखार घोड़ा था। घोड़ा इतना तेज़ और डरावना था कि कोई भी उसके पास जाने की हिम्मत नहीं करता था।
व्यापारी ने बादशाह अकबर से कहा, “हुज़ूर, यह खूंखार घोड़ा बहुत ही तेज़ है। लेकिन इसे कोई काबू में नहीं कर सकता। जो भी इसे सवारी करने की कोशिश करता है, वह गिर जाता है।”
अकबर ने घोड़े को देखा। वाकई वह बहुत सुंदर था, लेकिन उसकी आंखों में गुस्सा और डर दिखाई दे रहा था। बादशाह ने अपने सभी घुड़सवारों को बुलाया, लेकिन कोई भी उस खूंखार घोड़े की सवारी करने की हिम्मत नहीं कर सका।
तभी बीरबल दरबार में आया। उसने पूरी स्थिति को समझा और मुस्कराते हुए बादशाह से कहा, “जहांपनाह, क्या मैं इस घोड़े को देख सकता हूं?”
अकबर ने कहा, “बीरबल, यह बहुत खतरनाक है। इसने कई लोगों को गिराया है।”
बीरबल ने जवाब दिया, “हुज़ूर, कभी-कभी समस्या का समाधान ताकत में नहीं, बल्कि समझदारी में होता है।”
बीरबल धीरे-धीरे खूंखार घोड़े के पास गया। उसने देखा कि घोड़ा बार-बार अपना सिर हिला रहा था और बेचैन था। बीरबल ने ध्यान से घोड़े को देखा और समझ गया कि समस्या क्या है।
उसने व्यापारी से पूछा, “यह घोड़ा कब से इस तरह व्यवहार कर रहा है?”
व्यापारी ने कहा, “जब से मैंने इसे खरीदा है, तब से। पहले यह बहुत शांत था।”
बीरबल ने घोड़े के कानों को ध्यान से देखा। उसने पाया कि घोड़े के कान में कुछ अटका हुआ था। यह एक छोटा सा कांटा था जो घोड़े को परेशान कर रहा था।
बीरबल ने बहुत सावधानी से उस कांटे को निकाला। जैसे ही कांटा निकला, खूंखार घोड़ा शांत हो गया। उसकी आंखों से गुस्सा गायब हो गया और वह बिल्कुल सामान्य हो गया।
अब बीरबल आसानी से घोड़े पर सवार हो गया। घोड़ा बिल्कुल शांत था और बीरबल की हर बात मान रहा था। दरबार के सभी लोग हैरान रह गए।
बादशाह अकबर ने पूछा, “बीरबल, तुमने यह कैसे किया? यह घोड़ा इतना खूंखार था!”
बीरबल ने मुस्कराते हुए कहा, “जहांपनाह, यह घोड़ा खूंखार नहीं था, बल्कि परेशान था। इसके कान में एक कांटा अटका हुआ था जो इसे दर्द दे रहा था। दर्द की वजह से यह गुस्से में था और किसी को अपने पास नहीं आने दे रहा था।”
उन्होंने आगे कहा, “हुज़ूर, कभी-कभी जो चीज़ें हमें डरावनी या बुरी लगती हैं, वे सिर्फ परेशानी में होती हैं। अगर हम धैर्य से उनकी समस्या को समझें और उसका समाधान करें, तो वे भी हमारे दोस्त बन सकती हैं।”
व्यापारी बहुत खुश हुआ। उसने कहा, “वाह बीरबल साहब! आपने मेरे घोड़े की जान बचाई है। अब यह फिर से वैसा हो गया है जैसा पहले था।”
बादशाह अकबर ने बीरबल की बुद्धिमानी की तारीफ की और कहा, “बीरबल, तुमने आज फिर साबित कर दिया कि समझदारी और धैर्य से हर समस्या का समाधान हो सकता है।”
सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें किसी को भी बिना समझे बुरा नहीं समझना चाहिए। कभी-कभी जो लोग या जानवर गुस्सैल या डरावने लगते हैं, वे सिर्फ किसी परेशानी में होते हैं। अगर हम धैर्य और प्यार से उनकी मदद करें, तो वे भी हमारे अच्छे दोस्त बन सकते हैं। समस्या का समाधान हमेशा ताकत में नहीं, बल्कि समझदारी में होता है।
इस कहानी के समान, समझदारी से हर समस्या का समाधान किया जा सकता है।
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इसके अलावा, व्यापारी का उदय और पतन भी एक महत्वपूर्ण कहानी है जो हमें जीवन के सबक सिखाती है।











