सियार और ढोल की कहानी
बहुत समय पहले की बात है, एक घने जंगल में चतुर नाम का एक सियार रहता था। वह बहुत ही चालाक और बुद्धिमान था, लेकिन कभी-कभी उसकी जिज्ञासा उसे मुसीबत में डाल देती थी।
एक दिन चतुर भोजन की तलाश में जंगल में घूम रहा था। अचानक उसे दूर से एक अजीब सी आवाज सुनाई दी – “धम्म धम्म धम्म!” यह आवाज बहुत तेज और डरावनी थी। सियार पहले तो डर गया, लेकिन फिर उसकी जिज्ञासा बढ़ गई।
“यह कैसी आवाज है?” चतुर ने मन में सोचा। “कहीं कोई बहुत बड़ा और खतरनाक जानवर तो नहीं है। लेकिन अगर यह कोई कमजोर जानवर है तो मुझे अच्छा भोजन मिल सकता है।”
डरते-डरते सियार उस आवाज की दिशा में बढ़ने लगा। जैसे-जैसे वह आगे बढ़ता गया, आवाज और तेज होती गई। उसका दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
थोड़ी देर बाद वह एक पुराने युद्ध के मैदान में पहुंचा। वहां उसे एक बड़ा सा ढोल दिखाई दिया जो एक पेड़ की शाखा के नीचे पड़ा हुआ था। हवा चलने पर पेड़ की शाखाएं ढोल से टकराती थीं और “धम्म धम्म” की आवाज निकालती थीं।
पहले तो सियार को लगा कि यह कोई विशाल राक्षस है। वह दूर से ही छुपकर देखता रहा। लेकिन जब उसने देखा कि यह सिर्फ हवा से हिल रहा है और कोई जीवित प्राणी नहीं है, तो उसकी हिम्मत बढ़ गई।
“अरे! यह तो सिर्फ एक ढोल है,” चतुर ने राहत की सांस ली। “मैं व्यर्थ ही इतना डर गया था।”
अब सियार की भूख और बढ़ गई। उसने सोचा कि शायद इस ढोल के अंदर कुछ खाने की चीज हो। उसने ढोल को चारों तरफ से सूंघा और देखा।
ढोल चमड़े से बना हुआ था और उसकी सतह मुलायम लग रही थी। चतुर के मुंह में पानी आ गया। उसने अपने तेज दांतों से ढोल की चमड़ी को फाड़ना शुरू किया।
“वाह! कितनी मुलायम और स्वादिष्ट चमड़ी है,” सियार ने खुशी से कहा। “यह तो बहुत दिनों का भोजन है।”
चतुर ने पूरे ढोल की चमड़ी खा ली और अपना पेट भर लिया। वह बहुत खुश था कि उसे इतना अच्छा भोजन मिल गया।
लेकिन अगले दिन जब सियार फिर से भोजन की तलाश में निकला, तो उसे कुछ नहीं मिला। वह फिर से उसी जगह गया जहां ढोल था, लेकिन अब वहां सिर्फ लकड़ी के टुकड़े पड़े थे।
“काश मैंने थोड़ा धैर्य रखा होता,” चतुर ने पछताते हुए कहा। “अगर मैं रोज थोड़ा-थोड़ा खाता तो यह भोजन कई दिनों तक चलता।”
इस घटना से सियार को एक महत्वपूर्ण सबक मिला। उसने समझा कि लालच करना और जल्दबाजी में सब कुछ खत्म कर देना कितना गलत है।
कहानी की शिक्षा: इस सियार और ढोल की कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी भी लालच नहीं करना चाहिए। जो चीज हमारे पास है, उसका सदुपयोग करना चाहिए और धैर्य रखना चाहिए। जल्दबाजी में लिए गए फैसले अक्सर हमें नुकसान पहुंचाते हैं। संयम और धैर्य ही सफलता की कुंजी है। सियार और लड़ते बकरों की कहानी भी इसी तरह के सबक देती है।













