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लकड़हारा और वृक्ष देवता की अनोखी कहानी
बहुत समय पहले एक घने जंगल में रामू नाम का एक गरीब लकड़हारा रहता था। वह रोज जंगल जाकर लकड़ी काटता और बाजार में बेचकर अपने परिवार का पेट पालता था। रामू बहुत ही ईमानदार और मेहनती था।
एक दिन रामू जंगल में लकड़ी काट रहा था। अचानक उसकी नजर एक बहुत पुराने और विशाल वृक्ष पर पड़ी। वह वृक्ष इतना बड़ा था कि उसकी छाया में पूरा गांव आ सकता था। रामू ने सोचा, “अगर मैं इस वृक्ष को काट दूं तो बहुत सारी लकड़ी मिल जाएगी।”
जैसे ही रामू ने अपनी कुल्हाड़ी उठाई, वृक्ष से एक मधुर आवाज आई, “रुको मेरे बेटे! मैं इस वृक्ष का देवता हूं। तुम मुझे क्यों काटना चाहते हो?”
रामू डर गया लेकिन हिम्मत करके बोला, “हे वृक्ष देवता! मैं बहुत गरीब हूं। मेरे पास अपने बच्चों के लिए खाना नहीं है। इसलिए मुझे लकड़ी काटनी पड़ती है।”
वृक्ष देवता ने कहा, “मैं तुम्हारी समस्या समझ गया हूं। लेकिन मैं सैकड़ों वर्षों से यहां खड़ा हूं। मैं अनगिनत पक्षियों का घर हूं, जानवरों को छाया देता हूं और हवा को शुद्ध करता हूं।”
रामू ने वृक्ष देवता की बात सुनी और उसका दिल पसीज गया। वह बोला, “आप सही कह रहे हैं। मैं आपको नहीं काटूंगा। लेकिन फिर मैं अपने बच्चों को क्या खिलाऊंगा?”
वृक्ष देवता बहुत खुश हुआ और बोला, “तुम्हारे दयालु हृदय को देखकर मैं बहुत प्रसन्न हूं। मैं तुम्हें एक जादुई बीज देता हूं। इसे अपने घर के पास लगाओ।”
रामू ने वह छोटा सा बीज लिया और घर जाकर उसे लगा दिया। अगली सुबह जब वह उठा तो देखा कि वहां एक छोटा सा पेड़ उग आया था। उस पेड़ पर सुनहरे फल लगे थे।
जब रामू ने एक फल तोड़कर खाया तो वह बहुत स्वादिष्ट था। उसने अपने परिवार को भी दिया। सभी ने खाया और बहुत खुश हुए। रामू ने कुछ फल बाजार में बेचे तो उसे अच्छे पैसे मिले।
दिन-प्रतिदिन वह पेड़ बढ़ता गया और उस पर और भी फल आने लगे। अब रामू को लकड़ी काटने की जरूरत नहीं थी। वह फल बेचकर अच्छी कमाई कर रहा था।
एक दिन रामू के पड़ोसी श्याम ने यह देखा। वह बहुत लालची था। उसने रामू से पूछा कि यह जादुई पेड़ कहां से आया। रामू ने सच्चाई बताई।
श्याम तुरंत जंगल गया और उस बड़े वृक्ष को ढूंढा। उसने बिना कुछ सोचे कुल्हाड़ी से वृक्ष पर वार किया। वृक्ष देवता प्रकट हुआ और बोला, “तुम मुझे क्यों काट रहे हो?”
श्याम ने झूठ बोला, “मैं बहुत गरीब हूं। मुझे भी जादुई बीज चाहिए।”
वृक्ष देवता ने उसके मन की बात जान ली। उसने कहा, “तुम्हारे लालच के कारण तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा। बल्कि तुम्हारी कुल्हाड़ी भी टूट जाएगी।”
वैसा ही हुआ। श्याम की कुल्हाड़ी टूट गई और वह खाली हाथ घर लौटा।
इधर रामू का जादुई पेड़ फलता-फूलता रहा। वह हमेशा वृक्ष देवता का आभारी रहा और कभी भी किसी पेड़ को बिना जरूरत नहीं काटा।
नैतिक शिक्षा: दयालुता और ईमानदारी का फल हमेशा मीठा होता है। प्रकृति का सम्मान करने वाले को प्रकृति भी आशीर्वाद देती है। लालच और झूठ का परिणाम हमेशा बुरा होता है।
इस कहानी से हमें यह भी सीख मिलती है कि समझदारी और दयालुता का महत्व हमेशा बना रहता है।










