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शिवलिंग की महिमा – भगवान शिव की अद्भुत शक्ति

बहुत समय पहले की बात है, जब देवताओं और असुरों के बीच एक भयंकर युद्ध चल रहा था। असुरों का राजा तारकासुर बहुत शक्तिशाली था और उसने सभी देवताओं को परेशान कर दिया था। देवराज इंद्र और सभी देवता बहुत चिंतित थे।

“हे ब्रह्मा जी, अब हमारी रक्षा कौन करेगा?” इंद्र देव ने पूछा।

ब्रह्मा जी ने कहा, “केवल भगवान शिव ही हमारी रक्षा कर सकते हैं। परंतु वे कैलाश पर्वत पर गहरी तपस्या में लीन हैं।”

सभी देवता कैलाश पर्वत पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि भगवान शिव एक अद्भुत ज्योति के रूप में विराजमान थे। यह ज्योति इतनी तेजस्वी थी कि उसका न आदि दिखाई दे रहा था और न अंत।

शिवलिंग की महिमा देखकर सभी देवता आश्चर्यचकित हो गए। यह अनंत ज्योति स्तंभ था जो आकाश से पाताल तक फैला हुआ था।

“यह क्या है?” विष्णु भगवान ने आश्चर्य से पूछा।

तभी आकाशवाणी हुई, “यह शिवलिंग है – भगवान शिव का निराकार रूप। जो इसकी सच्चे मन से पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।”

ब्रह्मा जी और विष्णु जी ने सोचा कि वे इस ज्योति स्तंभ का अंत खोजेंगे। ब्रह्मा जी हंस पर बैठकर ऊपर की ओर गए और विष्णु जी वराह रूप धारण करके नीचे की ओर गए।

हजारों वर्ष बीत गए, परंतु दोनों को शिवलिंग की महिमा का अंत नहीं मिला। थक-हारकर वे वापस लौट आए।

“हे महादेव! हमें क्षमा करें। हमने आपकी महानता को समझा है,” दोनों ने विनम्रता से कहा।

तब भगवान शिव प्रकट हुए। उनके मस्तक पर चंद्रमा, गले में नाग, और हाथ में त्रिशूल था। उनकी आंखों में करुणा थी।

“मैं आप सभी की भक्ति से प्रसन्न हूं,” भगवान शिव ने कहा। “यह शिवलिंग मेरा स्वरूप है। जो भी इसकी पूजा करेगा, उसके सभी पाप नष्ट हो जाएंगे।”

इसके बाद भगवान शिव ने तारकासुर का वध किया और देवताओं की रक्षा की। सभी देवता शिवलिंग की महिमा को समझ गए।

एक दिन, पार्वती जी ने भगवान शिव से पूछा, “हे नाथ! शिवलिंग की पूजा का क्या महत्व है?”

भगवान शिव ने मुस्कराते हुए कहा, “हे पार्वती! शिवलिंग की पूजा से मनुष्य के मन की सभी अशुद्धताएं दूर हो जाती हैं। यह भक्त को मोक्ष का मार्ग दिखाता है।”

पार्वती जी ने पूछा, “कैसे करनी चाहिए इसकी पूजा?”

“सच्चे मन से, जल, दूध, शहद चढ़ाकर, बेल पत्र अर्पित करके,” शिव जी ने समझाया। “सबसे महत्वपूर्ण है भक्ति और श्रद्धा।”

इस प्रकार शिवलिंग की महिमा सभी लोकों में फैल गई। ऋषि-मुनि, देवता, और मनुष्य सभी शिवलिंग की पूजा करने लगे।

एक बार एक गरीब ब्राह्मण था। उसके पास पूजा के लिए कुछ नहीं था। वह रोज शिवलिंग पर केवल जल चढ़ाता और मन से भगवान शिव का स्मरण करता।

भगवान शिव उसकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न हुए और उसे दर्शन दिए। “वत्स! तुम्हारी भक्ति ने मुझे प्रसन्न कर दिया है,” शिव जी ने कहा।

उस दिन से ब्राह्मण का जीवन खुशियों से भर गया। उसे समझ आ गया कि शिवलिंग की महिमा अपार है।

भगवान शिव ने सभी को समझाया कि शिवलिंग केवल एक पत्थर नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांड की सृजनशील शक्ति का प्रतीक है। इसमें सृष्टि, स्थिति, और संहार की शक्ति निहित है।

“जो व्यक्ति शिवलिंग को देखकर भी भगवान शिव को याद नहीं करता, वह अपना कल्याण खो देता है,” शास्त्रों में लिखा है।

आज भी जब कोई व्यक्ति सच्चे मन से शिवलिंग की पूजा करता है, तो भगवान शिव उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। शिवलिंग की महिमा आज भी उतनी ही महान है जितनी पहले थी।

इसीलिए हमें भी भगवान शिव के इस पवित्र स्वरूप की पूजा करनी चाहिए और उनकी कृपा प्राप्त करनी चाहिए। “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हुए हमें शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए।

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