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कौआ, चूहा, कछुआ और हिरण की मित्रता की कहानी
एक घने जंगल में एक बड़ा तालाब था। उस तालाब के किनारे एक पुराना बरगद का पेड़ खड़ा था। इस पेड़ पर काला कौआ रहता था, जिसका नाम था कालू। तालाब में एक बुद्धिमान कछुआ रहता था जिसका नाम था धीरू। पास ही की झाड़ियों में एक चतुर चूहा रहता था जिसका नाम था चिंकू। और जंगल में एक सुंदर हिरण रहता था जिसका नाम था तेजू।
ये चारों दोस्त बहुत अच्छे मित्र थे। हर दिन शाम को वे तालाब के किनारे मिलते और अपने दिन भर के अनुभव साझा करते। कौआ आसमान की खबरें लाता, चूहा जमीन के नीचे की बातें बताता, कछुआ पानी की दुनिया के किस्से सुनाता, और हिरण जंगल की तमाम जानकारी देता।
एक दिन शाम को जब सभी दोस्त मिले तो हिरण तेजू नहीं आया। सभी चिंतित हो गए। कालू कौआ बोला, “मित्रों, तेजू कभी देर नहीं करता। जरूर कोई समस्या है।”
धीरू कछुआ ने सुझाव दिया, “हमें उसे खोजना चाहिए। कालू भाई, तुम आसमान से देखो कि वह कहाँ है।”
कौआ कालू तुरंत उड़ा और पूरे जंगल में तेजू को खोजने लगा। कुछ देर बाद उसने देखा कि तेजू एक शिकारी के जाल में फंसा हुआ है और बुरी तरह घबराया हुआ है।
कालू तुरंत वापस आया और बोला, “मित्रों, तेजू शिकारी के जाल में फंस गया है। हमें जल्दी कुछ करना होगा।”
चिंकू चूहा तुरंत बोला, “मैं अपने तेज दांतों से जाल काट सकता हूं। लेकिन मुझे वहां तक पहुंचाना होगा।”
धीरू कछुआ ने कहा, “मैं चिंकू को अपनी पीठ पर बिठाकर ले चलूंगा। हां, मैं धीमा हूं, लेकिन पक्का पहुंचाऊंगा।”
कौआ कालू बोला, “मैं आसमान से नजर रखूंगा कि शिकारी कहां है और अगर वह आए तो तुम्हें चेतावनी दूंगा।”
योजना के अनुसार, धीरू कछुआ ने चिंकू चूहे को अपनी पीठ पर बिठाया और धीरे-धीरे उस जगह की ओर चल पड़ा जहां तेजू हिरण फंसा था। कालू कौआ आसमान में उड़ता रहा और चारों ओर नजर रखता रहा।
जब वे तेजू के पास पहुंचे तो देखा कि वह बहुत परेशान था। चिंकू चूहा तुरंत काम में लग गया और अपने तेज दांतों से जाल की रस्सियों को काटने लगा।
अचानक कालू कौआ ने चिल्लाकर कहा, “सावधान! शिकारी आ रहा है!”
चिंकू चूहे ने और तेजी से काम किया। आखिरकार जाल कट गया और तेजू हिरण आजाद हो गया। लेकिन धीरू कछुआ धीमी गति के कारण वहीं रह गया।
शिकारी ने आकर देखा कि हिरण तो भाग गया है लेकिन एक कछुआ मिल गया है। उसने धीरू को पकड़ लिया।
अब बाकी तीनों दोस्त परेशान हो गए। तेजू हिरण बोला, “धीरू ने मेरी जान बचाई है। अब मैं उसकी जान बचाऊंगा।”
उन्होंने एक नई योजना बनाई। तेजू हिरण शिकारी के सामने जाकर लंगड़ाने का नाटक करने लगा, जैसे वह घायल हो। शिकारी ने कछुए को जमीन पर रखा और हिरण को पकड़ने के लिए दौड़ा।
इसी बीच चिंकू चूहे ने धीरू कछुए को बांधने वाली रस्सी काट दी। धीरू तुरंत पास के तालाब में कूद गया। कालू कौआ ने तेजू को संकेत दिया और वह भी तेजी से भागकर जंगल में गायब हो गया।
शिकारी हाथ मलता रह गया। उसके हाथ कुछ नहीं लगा।
शाम को सभी दोस्त फिर से तालाब के किनारे मिले। सभी खुश थे कि वे एक-दूसरे की मदद करके मुसीबत से बाहर निकले।
धीरू कछुआ बोला, “आज मैंने सीखा कि सच्ची मित्रता में हर कोई अपनी क्षमता के अनुसार दोस्त की मदद करता है।”
तेजू हिरण ने कहा, “हां, कालू की तेज नजर, चिंकू के तेज दांत, धीरू की धैर्य और मेरी तेज दौड़ – सबने मिलकर हमें बचाया।”
नैतिक शिक्षा: सच्चे मित्र हमेशा मुसीबत में एक-दूसरे का साथ देते हैं। हर व्यक्ति में कोई न कोई विशेष गुण होता है। जब सभी मिलकर अपने गुणों का उपयोग करते हैं, तो कोई भी समस्या हल हो सकती है। कौआ, चूहा, कछुआ और हिरण की इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि एकता में शक्ति होती है और सच्ची मित्रता जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है।
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