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जैसे को तैसा (Jaise Ko Taisa) | Tit for Tat Story in Hindi

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एक समय की बात है, एक गांव जिसका नाम किशनपुर था वहा २ दोस्त रहते थे. जिसमे से एक का नाम हरिया था जो की पेशे से एक किसान था, और दूसरा का नाम सोनालाल था जो की पेशे से एक सुनार था.

वैसे तो दोनों के बीच बहुत गहरी दोस्ती थी लेकिन दोनों की सोच और बर्ताव में बहुत अंतर था. जहां हरिया मेहनत करता था, और जो मिल जाये उससे संतुष्ट रहता था, वो अपनी कमाई का कुछ पैसा दान करता कुछ परिवार के ऊपर खर्च करता और जो बच जाये उसको संभल कर रख लेता था ताकि भविष्य में उसे किसी के सामने हाँथ ना फैलाना पड़े वही सोनाराम को मेहनत करना बिलकुल भी पसंद नहीं था और वो दूसरो को पैसे ब्याज पर देकर और लोगो को बेवकूफ बनाकर पैसे कमाता था.

ऐसे ही समय निकल रहा था, अचानक एक दिन हरिया के मन में तीर्थयात्रा पर जाने का विचार आता है, जब ये बात वो अपनी पत्नी को बताता है तो वो भी बहुत खुश हो जाती है, लेकिन थोड़ी देर बाद ही दोनों ये सोच कर दुखी हो जाते है, वो अपनी जिंदगी भर की कमाई किसके भरोसे छोड़ कर जायेंगे, अगर वो पूरी कमाई साथ लेकर जायेंगे तो उसका चोरी हो जाने का डर था, और अगर कमाई छोड़ कर भी जायेंगे तो  चोरी हो जाने का डर था.

बहुत सोच विचार करने के बाद हरिया अचानक खुश हो जाता है, और अपनी पत्नी से बोलता है की वो ये पैसे सोनाराम के पास छोड़ कर जायगा.  ये बात सुनते ही उसकी पत्नी परेशान हो जाती है, क्योकि उसको सोनाराम की असलियत पता थी और वो जानती थी की उसका पति बहुत सीधा है, कही सोनाराम उसको ठग ना ले. जब वो ये बात अपने पति से बोलती है तो वो उसको समझाता है, सोनाराम उसका बचपन का दोस्त है वो उसके साथ ऐसा नहीं करेगा.

ऐसा सोच कर वो अपनी पूरी कमाई और पालतू जानवरो को लेकर सोनाराम के पास पहुंच जाता है, सोनाराम उसको देखते ही बोलता है, “आओ हरिया आज बहुत दिनों के बाद आये हो, और ये सारा सामान लेकर कही जा रहे हो क्या?” हरिया उसको देखते ही बोलता है, हाँ सोनाराम मै तुम्हारे पास ही आ रहा था.

हरिया सोनाराम को बताता है की वो अपनी पत्नी के साथ तीर्थयात्रा पर जाना चाहता है, और अपना सारा कीमती सामान जब तक वो वापिस ना आ जाये उसके पास रखना चाहता है.

ये सुनकर सोनाराम बोलता है, हाँ हाँ क्यों नहीं भाई आखिर हम बचपन के दोस्त है, और दोस्त ही दोस्त के काम आता है. ये सुनकर हरिया बहुत खुश हो जाता है.

उसके बाद हरिया सोनाराम को अपने बैल और बाकी घर के सामन दे देता है और अंत में वो सोने की ४ छडे निकाल कर सोनाराम को देता है और बोलता है की ये ४ सोने की छडे उसके पूरे जीवन की कमाई है इसको संभाल कर रखना.

इतना सोना देख कर सोनाराम बहुत हैरान होता है, और हरिया से बोलता है की, देखो हरिया मै किसी पराई चीज को हाँथ नहीं लगाता हूँ तुम खुद ही अपना सोना मेरी तिजोरी में रख दो.

हरिया सोनाराम से तिजोरी की चाभी लेकर अपना सारा सोना तिजोरी में रख देता है, और चाभी सोनाराम को दे देता है, और निश्चिंत होकर अपने तीर्थयात्रा पर निकल जाता है.

हरिया के जाने के बाद सोनाराम के दिल में लालच इतने सोने को देखकर लालच आ जाता है और वो निश्चय करता है की वो ये सोना हरिया को नहीं देगा. 

ऐसे ही कुछ साल निकल जाते है, और एक दिन हरिया अपनी तीर्थयात्रा से वापस आ जाता है, और सीधे सोनाराम के पास पहुंच जाता है. सोनाराम उसको देखकर दुखी होने का नाटक करता है.

हरिया उससे पूछता है, “क्या हुआ सोनाराम तुम इतने दुखी क्यों हो?” सोनाराम हरिया को जवाब देता है, “क्या बताऊ हरिया भाई तुम तो अपनी तीर्थयात्रा पर चले गए और मुझपर मुसीबतो का पहाड़ टूट पड़ा.”

अब हरिया भी थोड़ा परेशान होता हुआ पूछता है की “क्या हो गया सोनाराम भाई कुछ बताओ तो सही?”

सोनाराम उसको बताता है की उसके जाने के बाद गांव में बड़े बड़े चूहों ने आतंक मचा दिया. उसकी साड़ी धन संपत्ति को उन्होंने बर्बाद कर दिया सारी तिजोरी उन्होंने कुतर कर थोड़ दी और सारा धन नष्ट कर दिया.

उसकी बात सुनकर हरिया बहुत दुखी होता है, और उसके साथ सहानभूति दिखते हुए बोलता है की कोई बात नहीं सोनाराम भाई धन संपत्ति तो वापस अर्जित की जा सकती है आप सही सलामत हो ये अच्छी बात है.

अब हरिया सोनाराम से अपना सोना मांगता है तो सोनाराम रोने लगता है और बोलता है, चूहों ने सोना भी नहीं छोड़ा सारा सोना वो कुतर कर खा गए और उसने हरिया को एक टूटी हुई तिजोरी दिखा दी.

हरिया सोनाराम की बात सुनकर बहुत हैरान होता है, और बोलता है की चूहे सोना कैसे खा सकते है? तो सोनाराम गुस्से में बोलता है, “तो क्या मै झूट बोल रहा हूँ?”

अब हरिया को सोनाराम की सारी चल समझ में आ जाती है, वो समाज जाता है की सोनाराम की नियत ख़राब हो गयी है और वो उसका सोना वापस नहीं करना चाहता.

हरिया सोनाराम के घर से खाली हाँथ और दुखी मन से वापस आ जाता है, और मन ही मन वो सोनाराम को सबक सीखने का निश्चय करता है.

ऐसे ही कुछ साल और निकल जाते है सोनाराम इस बात को भूल जाता है, और एक दिन वो हरिया के पास आता है और बोलता है, “हरिया भाई हम पति पत्नी को कुछ बहुत जरूरी काम से बाहर जाना है क्या तुम कुछ दिनों के लिए मेरी बेटी को अपने घर पर रख सकते हो?

हरिया तुरंत सोनाराम को जवाब देता है, हाँ हाँ सोनाराम क्यों नहीं आखिर दोस्त ही दोस्त के काम आता है. उसकी बात सुनकर सोनाराम निश्चिंत होकर अपने काम से बाहर चला जाता है.

जब सोनाराम कुछ दिनों के बाद वापस आकर अपनी बेटी को वापस लेने के लिए हरिया के पास जाता है तो हरिया उसको देखकर रोने लगता है. उसको रोता देख कर सोनाराम पूछता है, “क्या हुआ हरिया तुम रो क्यों रहे हो?”

उसकी बात सुनकर हरिया बोलता है अब क्या बताऊ सोनाराम तुम तो बाहर चले गये और तुम्हारे जाने के बाद गांव में बड़ी बड़ी चिड़ियों ने आक्रमण कर दिया और सारी फसल ख़राब करने के साथ साथ जानवरो और इंसानो को भी ले गए और वो तुम्हारी बेटी को भी ले गए.

ये बात सुनते ही सोनाराम को गुस्सा आ जाता है और वो हरिया से लड़ाई करने लगा, और उसको राजा के दरबार में चलने के लिए बोला। हरिया भी दरबार में चलने के लिए तैयार हो गया.

दरबार में पहुंचते ही सोनाराम बोलता है की महाराज ये हरिया मेरे बचपन का दोस्त है, कुछ दिनों के लिए मै अपनी बेटी को इसके पास छोड़ कर गया था अब जब मै वापस आया और अपनी बेटी को वापस मांग रहा हु तो ये बोल रहा है की मेरी बेटी को चिड़िया उठा ले गयी. अब आप बताये महाराज की कभी चिड़िया भी किसी इंसान के बच्चे को ले जा सकती है?

उसकी बात सुनकर राजा को बहुत गुस्सा आता है और वो हरिया से बोलते है की वो उसकी बेटी को वापस करे. हरिया विनम्रता से जवाब देता है की महाराज सच में सोनाराम की बेटी को चिड़िया उठा ले गयी है. उसकी बात सुनकर अब राजा भी थोड़े हैरान होते है और बोलते है की किया इंसान के बच्चे को कैसे ले जा सकती है? तो हरिया बोलता है, “ठीक वैसे ही महाराज जैसे चूहा सोना खा सकता है.”

उसकी बात सुनकर राजा और भी चकित हो है की चूहा सोना खा गया… राजा हरिया से पूरी बात बताने को बोलते है, हरिया राजा को शुरू से लेकर अब तक की सारी घटना बता देता है, उसकी बात सुनकर राजा हसने लगता है और बोलता है तुमने सोनाराम को सही सबक सिखाया और जैसे तो तैसा जवाब दिया.

राजा सोनाराम से हरिया की ४ सोने की छडे वापस करने के लिए बोलता है, और साथ ही १ सोने की छड़ हरिया को दंड के रूप में देने को बोलता है, हरिया को सोनाराम की बेटी वापस करने के लिए बोलता है. 

इस तरह हरिया ने अपनी बुद्धिमानी से बेईमान सोनाराम को जैसे तो तैसा सबक सिखाया.

इस कहानी से हमें ये शिक्षा मिलती है की, बुरे के साथ अच्छा करने से हमेशा नुकशान ही है, जो जैसा होता है उसको वैसे ही जवाब देना चाहिए.

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