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दो चोर और बीरबल की चतुराई

मुगल सम्राट अकबर के दरबार में एक दिन बड़ी हलचल मची हुई थी। राजमहल के खजाने से कुछ कीमती सोने के सिक्के गायब हो गए थे। पहरेदारों ने बताया कि रात के समय दो चोर महल में घुसे थे, लेकिन वे पकड़े नहीं जा सके।

बादशाह अकबर बहुत परेशान थे। उन्होंने अपने सभी मंत्रियों को बुलाया और कहा, “हमारे महल की सुरक्षा में कमी है। इन चोरों को जल्दी पकड़ना होगा।”

सभी मंत्री अपने-अपने सुझाव देने लगे। कोई कहता था कि पहरेदारों की संख्या बढ़ानी चाहिए, कोई कहता था कि दीवारें ऊंची करनी चाहिए। लेकिन बीरबल चुपचाप सब कुछ सुन रहे थे।

अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल, तुम्हारा क्या सुझाव है? कैसे पकड़ें इन दो चोर को?”

बीरबल मुस्कराए और बोले, “जहांपनाह, मैं इन चोरों को तीन दिन में पकड़ सकता हूं, लेकिन मुझे एक शर्त माननी होगी।”

“कैसी शर्त?” अकबर ने उत्सुकता से पूछा।

“मुझे महल के सभी नौकरों और पहरेदारों से मिलने की अनुमति चाहिए। और हां, मुझे कुछ जादुई छड़ियां भी चाहिए।”

अकबर ने तुरंत अनुमति दे दी। बीरबल ने महल के बाग से कुछ सूखी टहनियां तोड़ीं और उन्हें समान आकार में काटा। फिर उन्होंने सभी नौकरों और पहरेदारों को एक कमरे में बुलाया।

बीरबल ने सबसे कहा, “ये जादुई छड़ियां हैं। इनमें चोरों को पकड़ने की शक्ति है। जो व्यक्ति चोर होगा, उसकी छड़ी कल सुबह तक एक इंच बढ़ जाएगी।”

सभी लोगों ने अपनी-अपनी छड़ी ली और घर चले गए। दो चोर भी इन्हीं में शामिल थे, जो पहरेदार बनकर महल में काम करते थे।

रात भर दोनों चोर परेशान रहे। वे सोच रहे थे कि अगर छड़ी बढ़ गई तो वे पकड़े जाएंगे। आखिरकार उन्होंने अपनी छड़ियों से एक-एक इंच काट दिया।

अगली सुबह जब सभी लोग अपनी छड़ियां लेकर आए, तो बीरबल ने देखा कि दो छड़ियां बाकी सबसे छोटी थीं।

बीरबल ने उन दो व्यक्तियों की ओर इशारा करते हुए कहा, “ये हैं हमारे दो चोर! इन्होंने डर के मारे अपनी छड़ियों को काट दिया है।”

दोनों चोर घबरा गए और उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उन्होंने चुराए गए सोने के सिक्के भी वापस कर दिए।

अकबर बहुत प्रभावित हुए और बोले, “वाह बीरबल! तुमने बिना किसी हिंसा के इन चोरों को पकड़ लिया। तुम्हारी बुद्धि का कोई जवाब नहीं।”

बीरबल ने विनम्रता से कहा, “जहांपनाह, अपराधी का मन हमेशा डरा रहता है। उसका अपराधबोध ही उसे पकड़वा देता है। मैंने बस इसी मानवीय कमजोरी का फायदा उठाया।”

सीख: इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि बुद्धि और समझदारी से हर समस्या का समाधान हो सकता है। अपराधी का मन हमेशा डरा रहता है और उसका अपराधबोध ही उसे पकड़वा देता है। हमें हमेशा सच्चाई के रास्ते पर चलना चाहिए क्योंकि झूठ और चोरी का रास्ता हमेशा पकड़ा जाता है।

सच्चाई के रास्ते पर चलना सीख के संदर्भ में एक और कहानी है जो हमें समझदारी और बुद्धि का महत्व बताती है।

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