
जीत किसकी – सच्चाई और ईमानदारी की जीत
अकबर-बीरबल की यह कहानी बताती है कि सच्चाई और ईमानदारी की जीत हमेशा होती है। जानिए कैसे बीरबल ने बिना जादू के सच को सामने लाया।

अकबर-बीरबल की यह कहानी बताती है कि सच्चाई और ईमानदारी की जीत हमेशा होती है। जानिए कैसे बीरबल ने बिना जादू के सच को सामने लाया।

राजा विक्रम और बेताल की अठारहवीं कहानी में जानिए कैसे तीन भाइयों के अहंकार, कट्टरता और लालच के कारण अमूल्य विद्या नष्ट हो गई। एक शिक्षाप्रद कथा।

बीरबल की चतुराई से कैसे पकड़ा गया गुलाब चोर? जानिए इस रोचक कहानी में कि कैसे बीरबल ने बिना किसी सबूत के सच का पता लगाया।

पृथु अवतार की कथा – जानिए कैसे भगवान विष्णु के अंश पृथु ने धरती को समतल किया और कृषि का आरंभ करके प्रजा का कल्याण किया। धरती माता का उद्धार।

स्कंदमाता की महान कथा – जानिए कैसे माता पार्वती ने अपने पुत्र स्कंद को धर्म की रक्षा के लिए तैयार किया। नवरात्रि की पांचवीं देवी की प्रेरणादायक कहानी।

कैलाश पर्वत की महिमा की अद्भुत कहानी। जानिए कैसे यह पवित्र पर्वत भगवान शिव का धाम बना और क्यों इसकी महिमा तीनों लोकों में प्रसिद्ध है।

भगवान कृष्ण की अद्भुत लीला जब उन्होंने गोवर्धन पर्वत उठाना और सात दिन तक अपनी उंगली पर संभालकर वृंदावन वासियों की रक्षा की। इंद्र के अहंकार का नाश।

दो भाई की कहानी – एक अमीर और एक गरीब भाई के बीच ईर्ष्या, लालच और अंत में भाईचारे की जीत की प्रेरणादायक कहानी। जादुई दीपक और जिन्न के साथ।

हनुमान जी की समुद्र पार करने की तैयारी की अद्भुत कहानी। जानिए कैसे पवन पुत्र ने असंभव को संभव बनाया और लंका पहुंचकर माता सीता से मुलाकात की।

हातिम ताई का सत्य वचन की अमर कहानी। जानिए कैसे महान योद्धा हातिम ताई ने अपने सत्य वचन की शक्ति से तीन कठिन परीक्षाओं को पार किया और सबको प्रेरणा दी।

सुरेंद्रनाथ बनर्जी: राष्ट्रगुरु की प्रेरणादायक कहानी बहुत समय पहले, जब हमारा भारत अंग्रेजों के शासन में था, तब कलकत्ता शहर में एक छोटे से घर में एक विशेष बालक का जन्म हुआ। यह बालक था सुरेंद्रनाथ बनर्जी, जो आगे चलकर भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और ‘राष्ट्रगुरु’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। बचपन की शुरुआत 10 नवंबर 1848 को जन्मे सुरेंद्रनाथ के पिता दुर्गाचरण बनर्जी एक डॉक्टर थे। घर में शिक्षा और संस्कारों का माहौल था। छोटे सुरेंद्रनाथ बहुत तेज़ बुद्धि के थे और हमेशा सवाल पूछते रहते थे। “पिताजी, ये अंग्रेज़ लोग हमारे देश में क्यों हैं?” एक दिन छोटे सुरेंद्रनाथ ने अपने पिता से पूछा। दुर्गाचरण जी ने प्यार से समझाया, “बेटा, वे यहाँ व्यापार करने आए थे, लेकिन अब वे हम पर शासन कर रहे हैं। हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ना होगा।” शिक्षा की यात्रा सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने हिंदू कॉलेज से अपनी शिक्षा पूरी की। वे

हातिम ताई और दो लड़ते जिन्न की रोचक कहानी। जानिए कैसे बीरबल ने अपनी बुद्धि से दो लड़ते जिन्नों को मित्र बनाया और व्यापारी की समस्या हल की।