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आदि शक्ति का प्राकट्य – महान देवी माँ की कहानी

बहुत समय पहले, जब संसार में केवल अंधकार था और कुछ भी नहीं था, तब आदि शक्ति का प्राकट्य हुआ। वह परम शक्ति थी, जिससे सारा ब्रह्मांड बना था।

एक दिन, जब असुरों का राज बढ़ गया और वे देवताओं को परेशान करने लगे, तब सभी देवता भगवान विष्णु के पास गए। उन्होंने कहा, “हे प्रभु! असुर राजा महिषासुर बहुत शक्तिशाली हो गया है। वह स्वर्ग पर कब्जा करना चाहता है।”

भगवान विष्णु ने कहा, “चिंता मत करो। आदि शक्ति का प्राकट्य होगा और वह सभी असुरों का नाश करेगी।”

तभी आकाश में एक तेज प्रकाश दिखाई दिया। सभी देवताओं के तेज से मिलकर एक अद्भुत शक्ति का जन्म हुआ। यह आदि शक्ति थी, जो माँ दुर्गा के रूप में प्रकट हुई।

माँ दुर्गा का रूप अत्यंत सुंदर था। उनके दस हाथ थे और हर हाथ में अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र थे। उनकी आँखों में करुणा थी, लेकिन असुरों के लिए वे अग्नि के समान थीं।

भगवान शिव ने उन्हें त्रिशूल दिया, विष्णु जी ने चक्र दिया, और इंद्र ने वज्र दिया। सभी देवताओं ने अपने-अपने अस्त्र देकर माँ को शक्तिशाली बनाया।

माँ दुर्गा ने एक सुंदर सिंह को अपना वाहन बनाया। वह सिंह भी दिव्य था और उसमें अपार शक्ति थी।

जब महिषासुर को पता चला कि एक देवी उससे युद्ध करने आ रही है, तो वह हंसा। उसने कहा, “एक स्त्री मुझसे कैसे लड़ सकती है? मैं तो अजेय हूँ!”

लेकिन जब उसने माँ दुर्गा को देखा, तो वह समझ गया कि यह कोई साधारण स्त्री नहीं है। यह तो आदि शक्ति का प्राकट्य है।

युद्ध शुरू हुआ। महिषासुर ने अपनी सेना भेजी, लेकिन माँ दुर्गा ने अकेले ही हजारों असुरों को हराया। उनके त्रिशूल से असुर भाग जाते थे।

जब महिषासुर ने देखा कि उसकी सेना हार रही है, तो वह खुद युद्ध में आया। वह भैंसे का रूप धारण करके माँ पर हमला करने लगा।

माँ दुर्गा ने अपने सिंह के साथ महिषासुर से घमासान युद्ध किया। वह कभी भैंसा बनता, कभी हाथी, कभी सिंह। लेकिन माँ हर रूप में उसे हराती रहीं।

अंत में, जब महिषासुर फिर से भैंसे का रूप धारण करके माँ पर झपटा, तो माँ दुर्गा ने अपना त्रिशूल उसके सीने में मार दिया।

महिषासुर चिल्लाया, “यह कैसे हो सकता है? मैं तो अमर था!”

माँ दुर्गा ने कहा, “बुराई कभी अच्छाई को नहीं हरा सकती। मैं आदि शक्ति हूँ, और मैं हमेशा धर्म की रक्षा करूंगी।”

महिषासुर का अंत हो गया। सभी देवता खुश हो गए और माँ दुर्गा की जय-जयकार करने लगे।

माँ दुर्गा ने सभी को आशीर्वाद दिया और कहा, “जब भी धर्म पर संकट आएगा, मैं फिर से आऊंगी। आदि शक्ति का प्राकट्य हमेशा बुराई को हराने के लिए होगा।”

इसके बाद माँ दुर्गा अंतर्ध्यान हो गईं, लेकिन उनकी शक्ति हमेशा संसार में बनी रही।

तब से लेकर आज तक, जब भी कोई बुराई बढ़ती है, माँ दुर्गा का आदि शक्ति का प्राकट्य होता है। वह अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और असुरों का नाश करती हैं।

इसीलिए हम सब माँ दुर्गा की पूजा करते हैं और उनसे प्रार्थना करते हैं कि वह हमेशा हमारी रक्षा करें।

माँ दुर्गा की यह कहानी हमें सिखाती है कि बुराई कितनी भी शक्तिशाली हो, अच्छाई हमेशा जीतती है। आदि शक्ति हमेशा धर्म की रक्षा के लिए आती है।

जब भी हम मुश्किल में होते हैं, तो हमें माँ दुर्गा को याद करना चाहिए। वह हमारी माँ हैं और हमेशा हमारी मदद करती हैं।

इस तरह आदि शक्ति का प्राकट्य हुआ और माँ दुर्गा ने संसार को बुराई से बचाया। यह कहानी हमें हमेशा याद रखनी चाहिए और माँ दुर्गा का आशीर्वाद लेना चाहिए। यह कहानी हमें सिखाती है कि अच्छाई की हमेशा जीत होती है।

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