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बीरबल और राजा की अंतिम इच्छा
बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन एक बूढ़ा राजा आया। वह बहुत परेशान था और उसकी आँखों में आँसू थे। उसने अकबर से कहा, “हुजूर, मैं एक छोटे राज्य का राजा हूँ। मैं बहुत बीमार हूँ और डॉक्टरों ने कहा है कि मेरे पास केवल कुछ दिन बचे हैं।”
अकबर ने दया दिखाते हुए पूछा, “आप यहाँ क्यों आए हैं? क्या मैं आपकी कोई सहायता कर सकता हूँ?”
बूढ़े राजा ने कहा, “हुजूर, मेरी एक अंतिम इच्छा है। मैं चाहता हूँ कि मेरी मृत्यु के बाद मेरा बेटा एक अच्छा राजा बने। लेकिन वह बहुत आलसी और घमंडी है। वह प्रजा की परवाह नहीं करता।”
अकबर ने बीरबल की तरफ देखा। बीरबल समझ गया कि बादशाह उससे कोई उपाय चाहते हैं। बीरबल ने कहा, “महाराज, आपकी अंतिम इच्छा पूरी होगी। लेकिन आपको मेरी एक शर्त माननी होगी।”
बूढ़े राजा ने उत्सुकता से पूछा, “क्या शर्त है?”
बीरबल ने कहा, “आपको अपनी मृत्यु का नाटक करना होगा। आपका बेटा जब राजा बनेगा, तब मैं उसे एक सबक सिखाऊंगा।”
राजा ने बीरबल की बात मान ली। कुछ दिनों बाद खबर फैली कि राजा की मृत्यु हो गई है। उसका बेटा राजकुमार अर्जुन नया राजा बना। वह बहुत खुश था कि अब वह जो चाहे कर सकता है।
एक दिन बीरबल एक साधारण व्यापारी का भेष बनाकर उस राज्य में गया। वह राजा अर्जुन से मिलने गया और कहा, “महाराज, मैं एक व्यापारी हूँ। मैंने सुना है कि आपके पिता जी की एक अंतिम इच्छा थी।”
राजा अर्जुन ने लापरवाही से कहा, “हाँ तो? मुझे क्या करना है उससे? वह तो मर गया।”
बीरबल ने कहा, “महाराज, आपके पिता चाहते थे कि आप एक दिन अपनी प्रजा के साथ रहकर उनकी समस्याएं समझें। यह उनकी अंतिम इच्छा थी।”
राजा अर्जुन हंसकर बोला, “मैं राजा हूँ! मुझे किसी की बात सुनने की जरूरत नहीं।”
बीरबल ने कहा, “ठीक है महाराज। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके राज्य में क्या हो रहा है?”
राजा ने घमंड से कहा, “सब कुछ ठीक है। मेरे मंत्री सब संभालते हैं।”
बीरबल ने कहा, “महाराज, अगर आप वास्तव में एक अच्छे राजा हैं, तो क्या आप मेरे साथ अपने राज्य का दौरा करेंगे? बिना किसी को बताए?”
राजा अर्जुन ने चुनौती स्वीकार की। वे दोनों साधारण कपड़े पहनकर राज्य में घूमने निकले। जब वे गांवों में गए, तो राजा ने देखा कि लोग भूखे हैं, बच्चे बीमार हैं, और किसान परेशान हैं।
एक बूढ़ी औरत ने कहा, “हमारा नया राजा बिल्कुल अपने पिता जैसा नहीं है। पुराने राजा हमारी सुनते थे, लेकिन यह तो महल में मौज-मस्ती करता रहता है।”
राजा अर्जुन को बहुत शर्म आई। उसे एहसास हुआ कि वह कितना गलत था। उसने बीरबल से कहा, “मुझे माफ करें। मैं समझ गया कि मेरे पिता की अंतिम इच्छा क्यों थी।”
बीरबल मुस्कराए और कहा, “राजकुमार, आपके पिता अभी भी जिंदा हैं। वे चाहते थे कि आप यह सबक सीखें।”
राजा अर्जुन हैरान रह गया। बीरबल उसे वापस महल ले गए जहाँ उसके पिता इंतजार कर रहे थे। पिता-पुत्र ने एक-दूसरे को गले लगाया।
बूढ़े राजा ने कहा, “बेटा, मेरी सच्ची अंतिम इच्छा यह है कि तुम एक दयालु और न्यायप्रिय राजा बनो।”
राजा अर्जुन ने वादा किया कि वह हमेशा अपनी प्रजा की सेवा करेगा। उसने अपने राज्य में कई सुधार किए और एक महान राजा बना।
सीख: माता-पिता की अंतिम इच्छा हमेशा हमारे भले के लिए होती है। हमें उनकी बातों को समझना चाहिए और उनका सम्मान करना चाहिए। एक अच्छा नेता वही होता है जो अपने लोगों की सेवा करता है।
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