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कुएँ का न्याय – बीरबल की बुद्धिमत्ता

बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन एक अजीब मुकदमा आया। दो पड़ोसी किसान रामू और श्यामू के बीच एक पुराने कुएँ को लेकर विवाद था।

रामू ने दरबार में आकर कहा, “हुजूर, यह कुआँ मेरे पिता का खुदवाया हुआ है। श्यामू बिना इजाजत इससे पानी भर रहा है।”

श्यामू तुरंत बोला, “महाराज, यह झूठ है! यह कुआँ मेरे दादाजी ने खुदवाया था। मेरे पास इसके सबूत हैं।”

अकबर परेशान हो गए। दोनों के पास अपने-अपने दावे के सबूत थे। पुराने कागजात भी मिले-जुले थे। बादशाह ने सोचा कि इस कुएँ का न्याय कैसे करें।

तभी बीरबल ने कहा, “जहाँपनाह, मैं इस मामले को सुलझा सकता हूँ। लेकिन मुझे तीन दिन का समय चाहिए।”

अकबर ने हामी भर दी। बीरबल ने दोनों किसानों से कहा कि वे तीन दिन बाद दरबार में आएं।

अगले दिन बीरबल गुप्त रूप से उस गाँव गया। उसने गाँव के बुजुर्गों से बात की। पता चला कि यह कुआँ वास्तव में गाँव के सरपंच ने सभी के लिए खुदवाया था, लेकिन समय के साथ लोग इसे भूल गए थे।

तीसरे दिन दरबार में बीरबल ने एक अनोखा फैसला सुनाया। उसने कहा, “महाराज, मैंने इस मामले की जाँच की है। यह कुआँ न तो रामू का है और न ही श्यामू का।”

दोनों किसान हैरान रह गए। बीरबल ने आगे कहा, “यह कुआँ पूरे गाँव की संपत्ति है। इसे गाँव के भले के लिए खुदवाया गया था।”

रामू ने गुस्से में कहा, “लेकिन हुजूर, मेरे पास तो कागजात हैं!”

बीरबल मुस्कराया और बोला, “हाँ, तुम्हारे पास कागजात हैं। लेकिन ये कागजात कुएँ की देखभाल के लिए दिए गए थे, मालिकाना हक के लिए नहीं।”

श्यामू भी बोला, “तो फिर मेरे दादाजी के कागजात का क्या मतलब?”

“तुम्हारे दादाजी को भी कुएँ की सफाई का जिम्मा दिया गया था। दोनों परिवारों को अलग-अलग समय पर इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई थी।” बीरबल ने समझाया।

अकबर ने पूछा, “तो अब इस कुएँ का न्याय कैसे होगा?”

बीरबल ने कहा, “जहाँपनाह, न्याय यह है कि यह कुआँ गाँव की संपत्ति है। रामू और श्यामू दोनों इसके रखवाले हैं। दोनों को मिलकर इसकी देखभाल करनी चाहिए और पूरे गाँव को इससे पानी लेने का हक है।”

यह सुनकर दोनों किसान शर्मिंदा हुए। उन्होंने महसूस किया कि वे व्यर्थ में लड़ रहे थे।

रामू ने कहा, “बीरबल साहब, आपने सही कहा। हमें मिलकर काम करना चाहिए।”

श्यामू भी बोला, “हाँ, हम दोनों मिलकर कुएँ की देखभाल करेंगे।”

अकबर बहुत खुश हुए। उन्होंने कहा, “बीरबल, तुमने एक बार फिर अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय दिया है। यह सच्चा न्याय है।”

बीरबल ने विनम्रता से कहा, “हुजूर, सच्चा न्याय वही है जो सबका भला करे। कुएँ का न्याय यही था कि वह सबके काम आए।”

इस घटना के बाद गाँव में शांति हो गई। रामू और श्यामू अच्छे दोस्त बन गए और मिलकर कुएँ की देखभाल करने लगे।

सीख: सच्चा न्याय वह है जो सबका भला करे। बुद्धिमत्ता से हर समस्या का समाधान मिल सकता है। हमें अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर सबके हित के बारे में सोचना चाहिए।

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