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हातिम ताई का राक्षस से सामना – बीरबल की बुद्धि

एक दिन बादशाह अकबर के दरबार में एक व्यापारी आया। वह बहुत परेशान था और उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही थीं।

“जहांपनाह, मैं आपकी शरण में आया हूं,” व्यापारी ने कहा। “मेरा नाम हातिम ताई है और मैं एक भयानक समस्या में फंसा हूं।”

अकबर ने उत्सुकता से पूछा, “क्या बात है हातिम ताई? तुम्हें क्या परेशानी है?”

हातिम ताई ने कांपती आवाज में कहा, “महाराज, मैं व्यापार के लिए जंगल के रास्ते से जा रहा था। वहां मेरा सामना एक भयानक राक्षस से हुआ। उस राक्षस ने मेरा सारा माल छीन लिया और कहा कि अगर मैं तीन दिन में उसकी तीन पहेलियां नहीं सुलझाऊंगा, तो वह मुझे खा जाएगा।”

दरबार में सभी लोग चिंतित हो गए। अकबर ने पूछा, “वे कौन सी पहेलियां हैं?”

हातिम ताई ने बताया, “पहली पहेली – ‘वह क्या चीज है जो दिन में सोती है और रात में जागती है?’ दूसरी – ‘वह कौन सा खजाना है जो बांटने से बढ़ता है?’ और तीसरी – ‘वह कौन सी चीज है जो बिना पैर के चलती है?'”

अकबर ने अपने सभी विद्वानों से पूछा, लेकिन कोई भी इन पहेलियों का उत्तर नहीं दे सका। तभी बीरबल आगे आया।

“जहांपनाह, मैं हातिम ताई के साथ चलूंगा,” बीरबल ने कहा। “मुझे लगता है कि मैं इन पहेलियों को सुलझा सकता हूं।”

अगले दिन हातिम ताई और बीरबल जंगल की ओर निकले। जंगल में पहुंचकर उन्होंने देखा कि एक विशाल राक्षस एक पेड़ के नीचे बैठा था। उसकी आंखें लाल थीं और दांत तलवार की तरह नुकीले थे।

“तो हातिम ताई, तुम वापस आ गए,” राक्षस ने गरजकर कहा। “क्या तुमने मेरी पहेलियों के उत्तर ढूंढ लिए हैं?”

बीरबल आगे बढ़ा और बोला, “हां राक्षस जी, हमारे पास आपकी सभी पहेलियों के उत्तर हैं।”

राक्षस ने पहली पहेली दोहराई। बीरबल ने मुस्कराते हुए कहा, “इसका उत्तर है – तारे। तारे दिन में दिखाई नहीं देते, मानो सो रहे हों, और रात में चमकते हैं।”

राक्षस थोड़ा चौंका लेकिन उसने दूसरी पहेली पूछी। बीरबल ने तुरंत उत्तर दिया, “ज्ञान। ज्ञान वह खजाना है जो बांटने से बढ़ता है। जितना हम दूसरों को सिखाते हैं, उतना ही हमारा ज्ञान बढ़ता जाता है।”

अब राक्षस परेशान हो गया। उसने तीसरी पहेली पूछी। बीरबल ने हंसते हुए कहा, “समय। समय बिना पैर के चलता रहता है और कभी रुकता नहीं।”

राक्षस के चेहरे पर हार का भाव आ गया। लेकिन तभी बीरबल ने कहा, “राक्षस जी, अब मेरी बारी है। मैं आपसे एक पहेली पूछता हूं।”

राक्षस ने घमंड से कहा, “पूछो, मैं किसी भी पहेली का उत्तर दे सकता हूं।”

बीरबल ने पूछा, “वह कौन सी चीज है जो सबसे छोटी होकर भी सबसे बड़ी है, सबसे कमजोर होकर भी सबसे ताकतवर है?”

राक्षस ने बहुत सोचा लेकिन उत्तर नहीं दे सका। बीरबल ने कहा, “उत्तर है – सच्चाई। सच्चाई छोटी लगती है लेकिन सबसे बड़ी होती है, कमजोर लगती है लेकिन सबसे ताकतवर होती है।”

राक्षस को अपनी हार स्वीकार करनी पड़ी। उसने हातिम ताई का सारा माल वापस कर दिया और वादा किया कि वह अब किसी निर्दोष व्यापारी को परेशान नहीं करेगा।

जब वे वापस दरबार पहुंचे, तो अकबर ने बीरबल की बुद्धिमत्ता की प्रशंसा की। हातिम ताई ने कृतज्ञता से बीरबल के पैर छुए।

“बीरबल, तुमने एक बार फिर साबित कर दिया कि बुद्धि से बड़ी कोई शक्ति नहीं है,” अकबर ने कहा।

बीरबल ने विनम्रता से कहा, “जहांपनाह, हातिम ताई का राक्षस से सामना हमें सिखाता है कि डर से भागने के बजाय, बुद्धि और साहस से समस्याओं का सामना करना चाहिए। सच्चाई और ज्ञान ही हमारे सबसे बड़े हथियार हैं।”

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कोई भी समस्या कितनी भी बड़ी हो, बुद्धि, साहस और सच्चाई के साथ उसका समाधान निकाला जा सकता है। डरने के बजाय सोच-समझकर काम करना चाहिए।

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