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हातिम ताई की दरियादिली और गरीब विधवा की मदद

बहुत समय पहले अरब देश में हातिम ताई नाम का एक महान योद्धा रहता था। वह अपनी वीरता के साथ-साथ हातिम ताई की दरियादिली के लिए पूरे संसार में प्रसिद्ध था। उसका दिल समुद्र से भी बड़ा था और वह हमेशा जरूरतमंदों की सहायता करता था।

एक दिन हातिम ताई अपने घोड़े पर सवार होकर जंगल से गुजर रहा था। अचानक उसे एक बूढ़ी औरत की रोने की आवाज सुनाई दी। वह तुरंत घोड़े से उतरा और आवाज की दिशा में गया।

वहाँ उसने देखा कि एक गरीब विधवा अपने छोटे बेटे के साथ एक पेड़ के नीचे बैठी रो रही थी। हातिम ताई ने विनम्रता से पूछा, “माता जी, आप क्यों रो रही हैं? क्या मैं आपकी कोई सहायता कर सकता हूँ?”

बूढ़ी औरत ने आँसू पोंछते हुए कहा, “बेटा, मैं एक गरीब विधवा हूँ। मेरे पास खाने के लिए कुछ नहीं है। तीन दिन से मैंने और मेरे बेटे ने कुछ नहीं खाया है। भूख के मारे हम दोनों बेहाल हैं।”

हातिम ताई की दरियादिली देखकर उसका दिल पिघल गया। उसने तुरंत अपनी जेब से सोने के सिक्के निकाले और उस औरत को दे दिए। लेकिन औरत ने कहा, “बेटा, यहाँ आसपास कोई बाजार नहीं है। इन सिक्कों से मैं खाना कैसे खरीदूंगी?”

हातिम ताई ने सोचा और फिर अपने घोड़े की ओर देखा। वह जानता था कि उसका घोड़ा उसका सबसे प्रिय साथी था, लेकिन हातिम ताई की दरियादिली के आगे उसकी अपनी जरूरतें छोटी थीं।

उसने कहा, “माता जी, आप मेरे घोड़े को बेचकर खाना खरीद सकती हैं। यह एक अच्छा घोड़ा है और इसकी अच्छी कीमत मिलेगी।”

विधवा हैरान रह गई। उसने कहा, “लेकिन बेटा, तुम्हारे घोड़े के बिना तुम कैसे यात्रा करोगे? यह जंगल बहुत खतरनाक है।”

हातिम ताई मुस्कराया और बोला, “माता जी, घोड़ा तो मिल जाएगा, लेकिन भूखे इंसान की जान बचाना ज्यादा जरूरी है। आपका और आपके बेटे का जीवन मेरे घोड़े से कहीं ज्यादा कीमती है।”

यह सुनकर बूढ़ी औरत के आँसू खुशी के हो गए। उसने हातिम ताई के पैर छूकर आशीर्वाद दिया। हातिम ताई की दरियादिली देखकर उसका छोटा बेटा भी बहुत प्रभावित हुआ।

हातिम ताई ने अपना घोड़ा उस औरत को दे दिया और पैदल चलने लगा। रास्ते में उसे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन वह खुश था कि उसने दो जिंदगियाँ बचाई थीं।

कुछ दिन बाद जब हातिम ताई शहर पहुँचा, तो उसे पता चला कि वह बूढ़ी औरत दरअसल एक परी थी जो उसकी परीक्षा ले रही थी। परी ने हातिम ताई की दरियादिली से प्रभावित होकर उसे एक जादुई घोड़ा भेंट किया जो हवा की तरह तेज दौड़ता था।

परी ने कहा, “हातिम ताई, तुम्हारी दरियादिली अतुलनीय है। तुमने अपनी सबसे प्रिय चीज़ भी बिना सोचे दान कर दी। इसलिए अब तुम्हें यह जादुई घोड़ा मिला है जो तुम्हारे नेक कामों में तुम्हारी सहायता करेगा।”

हातिम ताई की दरियादिली की कहानी पूरे अरब में फैल गई। लोग उसे न केवल एक वीर योद्धा के रूप में बल्कि एक महान दानवीर के रूप में भी याद करने लगे।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सच्ची दरियादिली वही है जब हम अपनी जरूरतों से पहले दूसरों की जरूरतों को रखें। हातिम ताई ने दिखाया कि दान करना केवल अमीरों का काम नहीं है, बल्कि दिल की बड़ाई का मामला है। जो व्यक्ति दूसरों की भलाई के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देता है, ईश्वर उसे और भी ज्यादा देता है।

इस प्रकार की कहानियाँ हमें सिखाती हैं कि दान और दरियादिली का महत्व क्या है।

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हातिम ताई की तरह, हमें भी दूसरों की मदद करने का प्रयास करना चाहिए।

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