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किसका नौकर कौन – अकबर बीरबल की कहानी

बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन बड़ी चर्चा हो रही थी। दरबारी अपने-अपने पदों और अधिकारों की बात कर रहे थे। कोई कह रहा था कि वह राजा का सबसे बड़ा सेवक है, तो कोई अपने को सबसे महत्वपूर्ण मंत्री बता रहा था।

इस बहस को सुनकर बादशाह अकबर के मन में एक प्रश्न उठा। उन्होंने दरबार में उपस्थित सभी लोगों से पूछा, “बताओ, किसका नौकर कौन है? इस संसार में सबसे बड़ा स्वामी कौन है और सबसे छोटा सेवक कौन?”

यह सुनकर सभी दरबारी सोच में पड़ गए। किसी ने कहा, “जहांपनाह, आप सबसे बड़े स्वामी हैं और हम सब आपके सेवक हैं।” दूसरे ने कहा, “नहीं महाराज, भगवान सबसे बड़े स्वामी हैं।”

अकबर ने देखा कि सभी अलग-अलग उत्तर दे रहे हैं। तब उन्होंने बीरबल की ओर देखा और पूछा, “बीरबल, तुम्हारा क्या कहना है? किसका नौकर कौन है?”

बीरबल मुस्कराए और बोले, “जहांपनाह, यह प्रश्न बहुत गहरा है। इसका उत्तर देने के लिए मुझे कुछ दिन का समय चाहिए।”

अकबर ने कहा, “ठीक है, तुम्हें तीन दिन का समय मिलता है। तीन दिन बाद तुम्हें इस प्रश्न का उत्तर देना होगा।”

बीरबल घर जाकर सोचने लगे। उन्होंने अपनी पत्नी से कहा, “प्रिये, बादशाह ने एक कठिन प्रश्न पूछा है। मुझे समझना है कि किसका नौकर कौन है।”

अगले दिन बीरबल बाजार गए। वहां उन्होंने देखा कि एक धनी सेठ अपने नौकर को डांट रहा था। सेठ कह रहा था, “तुम मेरे नौकर हो, मेरी बात मानो।” लेकिन बीरबल ने गौर से देखा कि वही सेठ अपनी पत्नी के सामने सिर झुकाकर खड़ा था।

फिर बीरबल ने देखा कि सेठ की पत्नी अपने छोटे बच्चे की हर बात मान रही थी। बच्चा जो चाहता था, मां तुरंत लाकर देती थी। यहां किसका नौकर कौन था?

दूसरे दिन बीरबल ने एक किसान के घर जाकर देखा। किसान अपने बैलों से कह रहा था, “चलो, खेत जोतना है।” लेकिन बैल बिना घास-पानी के काम करने को तैयार नहीं थे। किसान को पहले उनकी सेवा करनी पड़ी।

तीसरे दिन बीरबल दरबार में पहुंचे। अकबर ने पूछा, “बीरबल, बताओ किसका नौकर कौन है?”

बीरबल ने विनम्रता से कहा, “जहांपनाह, मैंने तीन दिन में बहुत कुछ देखा और समझा। सच तो यह है कि इस संसार में हर व्यक्ति किसी न किसी का नौकर है।”

“कैसे?” अकबर ने आश्चर्य से पूछा।

बीरबल ने समझाया, “महाराज, आप बादशाह हैं, लेकिन आप प्रजा के सेवक हैं। आपका कर्तव्य है प्रजा की रक्षा करना। मैं आपका मंत्री हूं, लेकिन न्याय और सत्य का सेवक हूं। सेठ अपने नौकर का मालिक है, लेकिन अपनी पत्नी का सेवक है। पत्नी घर की मालकिन है, लेकिन अपने बच्चों की सेवक है।”

बीरबल ने आगे कहा, “किसान अपने बैलों का मालिक है, लेकिन धरती माता का सेवक है। यहां तक कि सूरज भी पृथ्वी की सेवा करता है, और पृथ्वी सभी जीवों की सेवा करती है।”

अकबर चकित रह गए। बीरबल ने अपनी बात जारी रखी, “जहांपनाह, किसका नौकर कौन है – यह हमारे कर्तव्यों पर निर्भर करता है। जब हम अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं, तो हम सेवक बन जाते हैं। और जब हम अधिकारों का उपयोग करते हैं, तो स्वामी बन जाते हैं।”

“सबसे बड़ी बात यह है कि हम सभी परमात्मा के सेवक हैं। वही सबका असली स्वामी है। बाकी सब तो केवल भूमिकाएं हैं जो हम जीवन में निभाते हैं।”

अकबर को बीरबल का उत्तर बहुत पसंद आया। उन्होंने कहा, “वाह बीरबल! तुमने सच कहा। हम सभी अपने-अपने कर्तव्यों के अनुसार कभी सेवक हैं, कभी किसी के स्वामी।”

दरबार के सभी लोग बीरबल की बुद्धिमत्ता से प्रभावित हुए। उन्होंने समझा कि जीवन में हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारियां हैं और हर किसी को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।

सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन में हर व्यक्ति के अपने कर्तव्य होते हैं। कभी हम किसी के सेवक होते हैं, कभी किसी के स्वामी। असली बात यह है कि हम अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाएं। किसका नौकर कौन है – यह सवाल हमें याद दिलाता है कि हमें विनम्र रहकर अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।

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