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बुद्धिमान मछुआरे और चतुर मछली की कहानी
एक समय की बात है, गंगा नदी के किनारे एक छोटा सा गाँव था। उस गाँव में रामू नाम का एक मछुआरा रहता था। रामू बहुत ही मेहनती और ईमानदार था। वह रोज सुबह-सुबह अपना जाल लेकर नदी में मछली पकड़ने जाता था।
नदी में सुनहरी नाम की एक बहुत ही चतुर और बुद्धिमान मछली रहती थी। सुनहरी अन्य मछलियों से अलग थी – वह सुनहरे रंग की थी और उसमें अद्भुत शक्ति थी। वह इंसानों की भाषा समझ सकती थी और बोल भी सकती थी।
एक दिन रामू मछुआरे ने अपना जाल फेंका। जब उसने जाल खींचा तो उसमें सुनहरी मछली फंस गई थी। रामू बहुत खुश हुआ क्योंकि इतनी सुंदर मछली उसने पहले कभी नहीं देखी थी।
अचानक सुनहरी मछली बोली, “हे मछुआरे! मैं एक जादुई मछली हूँ। यदि तुम मुझे छोड़ दोगे तो मैं तुम्हारी एक इच्छा पूरी कर दूंगी।”
रामू को बहुत आश्चर्य हुआ। उसने कहा, “क्या सच में तुम बोल सकती हो? यह तो कमाल की बात है!”
सुनहरी मछली ने उत्तर दिया, “हाँ, मैं सच कह रही हूँ। मैं तुम्हें धन-दौलत, बड़ा घर, या जो भी चाहो वह दे सकती हूँ। बस मुझे वापस पानी में छोड़ दो।”
रामू मछुआरे ने थोड़ी देर सोचा। उसके मन में लालच आया। वह सोचने लगा कि अगर वह धन मांगे तो वह अमीर बन जाएगा। लेकिन फिर उसे अपने पिता की सीख याद आई – “बेटा, हमेशा दया और करुणा दिखाना। किसी भी जीव को बिना वजह कष्ट नहीं देना चाहिए।”
रामू ने मछली से कहा, “सुनहरी, मैं तुमसे कुछ नहीं चाहता। तुम एक जीवित प्राणी हो और तुम्हारा भी परिवार होगा। मैं तुम्हें वापस पानी में छोड़ देता हूँ।”
यह कहकर रामू मछुआरे ने सुनहरी मछली को धीरे से पानी में छोड़ दिया। मछली खुशी से पानी में तैरने लगी।
सुनहरी मछली ने कहा, “रामू, तुमने मुझ पर दया दिखाई है। मैं तुम्हारी इस दयालुता को कभी नहीं भूलूंगी। जब भी तुम्हें मेरी जरूरत हो, बस मेरा नाम लेकर पुकारना।”
कुछ दिन बाद गाँव में बहुत तेज बारिश हुई। नदी में बाढ़ आ गई और पूरा गाँव पानी में डूब गया। रामू और उसका परिवार छत पर फंस गया था। चारों तरफ पानी ही पानी था।
रामू को सुनहरी मछली की बात याद आई। उसने जोर से पुकारा, “सुनहरी! सुनहरी! मुझे तुम्हारी मदद चाहिए!”
तुरंत सुनहरी मछली पानी से बाहर निकली। उसके साथ सैकड़ों मछलियाँ थीं। सुनहरी ने कहा, “रामू, चिंता मत करो। हम सब मिलकर तुम्हारी और पूरे गाँव की मदद करेंगे।”
सभी मछलियों ने मिलकर एक बड़ी नाव का आकार बनाया। रामू मछुआरे और उसका पूरा परिवार उस पर बैठकर सुरक्षित जगह पहुँच गया। इसी तरह सुनहरी मछली ने पूरे गाँव के लोगों को बचाया।
बाढ़ के बाद जब पानी उतरा, तो सुनहरी मछली ने रामू से कहा, “तुमने मुझ पर दया दिखाई थी, इसलिए आज मैंने तुम्हारी और तुम्हारे गाँव की रक्षा की। याद रखो, जो व्यक्ति दूसरों पर दया करता है, संकट के समय उसकी भी मदद होती है।”
उस दिन के बाद रामू मछुआरे ने कभी भी छोटी मछलियों को नहीं पकड़ा। वह केवल बड़ी मछलियाँ पकड़ता था और अपना गुजारा चलाता था। सुनहरी मछली उसकी सच्ची मित्र बन गई।
शिक्षा: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि दया और करुणा सबसे बड़े गुण हैं। जो व्यक्ति दूसरे जीवों पर दया करता है, प्रकृति भी उसकी रक्षा करती है। लालच में अंधे होकर हमें कभी भी किसी निर्दोष जीव को कष्ट नहीं देना चाहिए। सच्ची मित्रता और दयालुता हमेशा फल देती है।
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