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तेनालीराम और जादूगर की कहानी

बहुत समय पहले की बात है, जब बादशाह अकबर का दरबार अपनी न्याय और बुद्धिमत्ता के लिए प्रसिद्ध था। एक दिन दरबार में एक अजीब सी घटना घटी। एक रहस्यमय जादूगर बादशाह अकबर के दरबार में आया।

जादूगर ने कहा, “हुजूर, मैं एक महान जादूगर हूँ। मैं किसी भी व्यक्ति के मन की बात जान सकता हूँ और भविष्य बता सकता हूँ।”

बादशाह अकबर को जादूगर की बातें दिलचस्प लगीं। उन्होंने कहा, “अगर तुम सच में जादूगर हो, तो हमारे दरबार के सबसे बुद्धिमान व्यक्ति बीरबल के मन की बात बताओ।”

जादूगर ने आत्मविश्वास से कहा, “जरूर हुजूर! लेकिन इसके लिए मुझे एक हजार स्वर्ण मुद्राएं चाहिए।”

बादशाह अकबर ने सोचा कि अगर यह जादूगर सच में बीरबल के मन की बात बता देगा, तो यह एक हजार मुद्राएं इसके लायक हैं। उन्होंने जादूगर को एक हजार स्वर्ण मुद्राएं देने का वादा किया।

जादूगर ने अपना जादू शुरू किया। वह अजीब से मंत्र पढ़ने लगा और हवा में हाथ हिलाने लगा। फिर उसने कहा, “बीरबल जी अभी सोच रहे हैं कि यह जादूगर झूठा है और वे इसे बेनकाब कर देंगे।”

दरबार के सभी लोग हैरान रह गए क्योंकि जादूगर की बात बिल्कुल सही थी। बीरबल वास्तव में यही सोच रहे थे।

बादशाह अकबर प्रभावित हुए और उन्होंने जादूगर को इनाम देने का फैसला किया। लेकिन बीरबल ने कहा, “हुजूर, मैं भी जादू जानता हूँ। क्या मैं भी अपना जादू दिखा सकता हूँ?”

बादशाह अकबर ने हामी भर दी। बीरबल ने कहा, “मैं इस जादूगर के मन की बात बताऊंगा।”

बीरबल ने जादूगर की तरफ देखा और कहा, “यह जादूगर अभी सोच रहा है कि कैसे यहाँ से भागकर निकला जाए क्योंकि इसका असली जादू पकड़ा जाने वाला है।”

जादूगर घबरा गया। उसने कहा, “नहीं, यह गलत है! मैं कुछ और सोच रहा था।”

बीरबल मुस्कराए और बोले, “अच्छा, तो फिर आप क्या सोच रहे थे?”

जादूगर ने कहा, “मैं सोच रहा था कि… कि… मैं अपने घर कब जाऊंगा।”

बीरबल ने तुरंत कहा, “देखिए हुजूर, मैंने सही कहा था। यह जादूगर यहाँ से भागने के बारे में सोच रहा था।”

अब बीरबल ने असली जादू दिखाया। उन्होंने कहा, “हुजूर, यह व्यक्ति कोई जादूगर नहीं है। यह एक चालाक धोखेबाज है। इसने पहले से ही हमारे बारे में जानकारी इकट्ठी की थी।”

बीरबल ने समझाया, “जब यह दरबार में आया, तो इसने दरबारियों से बातचीत करके मेरे बारे में जानकारी ली थी। इसीलिए यह मेरे मन की बात जान गया।”

बादशाह अकबर ने पूछा, “लेकिन बीरबल, तुमने इसके मन की बात कैसे जानी?”

बीरबल ने हंसते हुए कहा, “हुजूर, जब कोई झूठा व्यक्ति पकड़ा जाता है, तो वह हमेशा भागने के बारे में सोचता है। यह कोई जादू नहीं, बल्कि मानव स्वभाव की समझ है।”

जादूगर को अपनी हार स्वीकार करनी पड़ी। उसने माफी मांगी और सच्चाई स्वीकार की कि वह कोई जादूगर नहीं था।

बादशाह अकबर ने जादूगर को माफ कर दिया लेकिन चेतावनी दी कि वह फिर कभी किसी को धोखा न दे। उन्होंने बीरबल की बुद्धिमत्ता की प्रशंसा की।

बीरबल ने कहा, “हुजूर, असली जादू ज्ञान और बुद्धि में है, न कि झूठे दिखावे में। जो व्यक्ति दूसरों को समझता है और सच्चाई को पहचानता है, वही सच्चा जादूगर है।”

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें किसी के झूठे दावों पर आसानी से विश्वास नहीं करना चाहिए। सच्ची बुद्धि और ज्ञान ही सबसे बड़ा जादू है। हमें हमेशा सच्चाई को पहचानने की कोशिश करनी चाहिए और धोखेबाजों से सावधान रहना चाहिए।

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