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सुनहरा पक्षी और तीन भाइयों की कहानी

बहुत समय पहले की बात है, जब दुनिया में जादू और करिश्मे का राज था। एक सुंदर राज्य में एक न्यायप्रिय राजा रहता था। उसके तीन पुत्र थे – बड़ा राजकुमार अर्जुन, मझला राजकुमार विक्रम और सबसे छोटा राजकुमार देव। तीनों भाई अपने-अपने गुणों के लिए प्रसिद्ध थे।

राजा के महल के बगीचे में एक अनोखा वृक्ष था जिस पर सुनहरे फल लगते थे। ये फल न केवल स्वादिष्ट थे बल्कि इनमें अद्भुत शक्ति भी थी। जो भी इन्हें खाता, उसकी सभी बीमारियां दूर हो जातीं।

एक दिन राजा ने देखा कि रात के समय कोई रहस्यमय चोर उसके बगीचे से सुनहरे फल चुरा ले जाता है। राजा बहुत परेशान हुआ और उसने अपने तीनों पुत्रों को बुलाया।

“मेरे प्यारे बेटों,” राजा ने कहा, “कोई चोर हमारे बगीचे से सुनहरे फल चुरा रहा है। तुम में से जो भी इस चोर को पकड़ेगा, उसे मेरा आधा राज्य मिलेगा।”

पहली रात बड़े राजकुमार अर्जुन ने पहरा दिया। वह बहुत बहादुर था लेकिन धैर्य की कमी थी। आधी रात के बाद उसे नींद आ गई और सुबह उठकर देखा कि फिर से फल गायब थे।

दूसरी रात मझले राजकुमार विक्रम की बारी थी। वह बुद्धिमान था पर अधीर था। उसने भी रात भर जागने की कोशिश की लेकिन सुबह होते-होते सो गया। फिर से फल चोरी हो गए।

तीसरी रात सबसे छोटे राजकुमार देव ने कहा, “पिताजी, मुझे एक मौका दीजिए। मैं धैर्य से पूरी रात जागूंगा।”

देव में धैर्य और दृढ़ता थी। उसने पूरी रात बिना पलक झपकाए पहरा दिया। आधी रात के समय अचानक आकाश से एक चमकदार सुनहरा पक्षी उड़ता हुआ आया। यह कोई साधारण पक्षी नहीं था – इसके पंख सोने की तरह चमक रहे थे और इसकी आंखें हीरों की तरह जगमगा रही थीं।

यह दुर्लभ पक्षी बगीचे में उतरा और अपनी चोंच से सुनहरे फल तोड़ने लगा। देव चुपचाप छुपकर देखता रहा। जब पक्षी उड़ने लगा, तो देव ने बड़ी सावधानी से उसका एक सुनहरा पंख पकड़ लिया।

पक्षी उड़ गया लेकिन उसका एक चमकदार पंख देव के हाथ में रह गया। सुबह होते ही देव अपने पिता के पास गया और सारी घटना सुनाई।

“पिताजी, यह एक जादुई सुनहरा पक्षी है जो हमारे फल चुराता है। देखिए, मैं इसका एक पंख लाया हूं।”

राजा ने पंख देखा तो हैरान रह गया। पंख इतना सुंदर और चमकदार था कि पूरा कमरा रोशन हो गया।

“बेटा देव,” राजा ने कहा, “तुमने बहुत अच्छा काम किया है। अब हमें इस दुर्लभ पक्षी को पकड़ना होगा।”

अगली रात देव ने एक जाल बिछाया और फिर से धैर्य से प्रतीक्षा की। जब सुनहरा पक्षी आया, तो वह जाल में फंस गया। लेकिन यह कोई साधारण पक्षी नहीं था।

पक्षी ने मानवीय आवाज में कहा, “हे राजकुमार, मैं कोई चोर नहीं हूं। मैं एक जादुई पक्षी हूं जो बीमार लोगों के लिए ये फल लेकर जाता हूं। मेरे जंगल में कई जानवर बीमार हैं और केवल ये सुनहरे फल ही उन्हें ठीक कर सकते हैं।”

देव का दिल दया से भर गया। उसने कहा, “तो आप चोरी क्यों करते हैं? आप सीधे मांग सकते थे।”

सुनहरा पक्षी ने उत्तर दिया, “मैंने कई बार कोशिश की, लेकिन इंसान हमारी भाषा नहीं समझते। केवल वही व्यक्ति मेरी बात सुन सकता है जिसके दिल में सच्चा धैर्य और दया हो।”

देव ने तुरंत पक्षी को जाल से मुक्त कर दिया और कहा, “आप जितने चाहें फल ले जा सकते हैं। लेकिन कृपया पहले बताया करें।”

पक्षी बहुत खुश हुआ और बोला, “तुम्हारे धैर्य और दया के कारण मैं तुम्हें एक वरदान देता हूं। जब भी तुम्हें मेरी जरूरत हो, इस पंख को हवा में उछालना। मैं तुरंत आ जाऊंगा।”

उसके बाद से सुनहरा पक्षी राजा से अनुमति लेकर फल ले जाने लगा। बदले में वह राज्य की रक्षा करता और जरूरत के समय राजा की मदद करता।

राजा ने देव के धैर्य का इनाम देते हुए उसे युवराज घोषित किया। “बेटा,” राजा ने कहा, “तुमने सिखाया है कि धैर्य और दया से हर समस्या का समाधान मिल जाता है।”

इस प्रकार छोटे राजकुमार देव ने अपने धैर्य, दया और समझदारी से न केवल रहस्य सुलझाया बल्कि एक नया मित्र भी बनाया। तीन भाई में से वही सबसे योग्य साबित हुआ जिसके पास धैर्य था।

सीख: जीवन में धैर्य रखना बहुत जरूरी है। जल्दबाजी में लिए गए फैसले अक्सर गलत होते हैं। धैर्य और दया से हर समस्या का समाधान मिल जाता है।

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