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श्री कृष्ण की दिव्य रास लीला – गोपियों के साथ

बहुत समय पहले की बात है, जब वृंदावन की धरती पर भगवान श्री कृष्ण का बचपन बीत रहा था। वे अपनी मधुर बांसुरी की आवाज़ से सभी के मन को मोह लेते थे। गोकुल की गोपियां उनकी बांसुरी की मीठी धुन सुनकर अपना सब काम छोड़कर उनके पास दौड़ी आती थीं।

एक शरद पूर्णिमा की रात, चांद की चांदनी में पूरा वृंदावन चमक रहा था। यमुना नदी के किनारे कुंज-गलियों में फूलों की सुगंध फैली हुई थी। उस रात श्री कृष्ण ने अपनी जादुई बांसुरी बजाई। उनकी बांसुरी की मधुर आवाज़ सुनकर सभी गोपियों के मन में अजीब सी बेचैनी हुई।

“हे कन्हैया! तुम्हारी बांसुरी की आवाज़ हमारे दिलों को छू जाती है,” राधा जी ने कहा। “आज की इस सुंदर रात में हमारे साथ नृत्य करोगे?”

श्री कृष्ण मुस्कराए और बोले, “प्रिय गोपियों! आज की रात हम सब मिलकर दिव्य रास लीला करेंगे। यह नृत्य केवल नृत्य नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा का मिलन है।”

यमुना के तट पर एक सुंदर वृत्त बना। श्री कृष्ण ने अपनी योगमाया से अनेक रूप धारण किए। हर गोपी के बगल में एक कृष्ण खड़े हो गए। सभी गोपियां आश्चर्य से देखने लगीं। राधा जी, ललिता, विशाखा, चित्रा, और अन्य सभी गोपियां खुशी से झूम उठीं।

रास लीला शुरू हुई। श्री कृष्ण के हाथ में बांसुरी थी और उनके चारों ओर गोपियां नृत्य कर रही थीं। उनके पैरों की आवाज़ से पूरा वातावरण संगीतमय हो गया। देवता भी स्वर्ग से इस दिव्य दृश्य को देखने आए।

अचानक श्री कृष्ण गायब हो गए। सभी गोपियां उन्हें ढूंढने लगीं। “कन्हैया कहां गए?” वे एक-दूसरे से पूछने लगीं। राधा जी बहुत दुखी हुईं और कृष्ण को पुकारने लगीं।

“हे प्रिय! तुम क्यों छुप गए? हमारी रास लीला अधूरी रह गई,” राधा जी ने आंसू भरी आंखों से कहा।

तभी श्री कृष्ण प्रकट हुए और बोले, “प्रिय राधे! मैं तो यहीं था। मैं तुम्हारे दिल में बसता हूं। जब तुम मुझे सच्चे मन से पुकारती हो, तो मैं तुरंत आ जाता हूं।”

फिर से रास लीला शुरू हुई। इस बार यह और भी सुंदर थी। गोपियों के घुंघरू की आवाज़, श्री कृष्ण की बांसुरी, और प्रकृति का संगीत मिलकर एक अद्भुत राग बना रहा था। पेड़-पौधे भी झूमने लगे, पशु-पक्षी भी मंत्रमुग्ध होकर देखने लगे।

रास लीला में श्री कृष्ण कभी गोपियों के साथ वृत्त में नृत्य करते, कभी बीच में आकर अकेले नृत्य करते। उनकी हर मुद्रा, हर भाव इतना सुंदर था कि देखने वाले मंत्रमुग्ध हो जाते।

जब सुबह होने लगी, तो श्री कृष्ण ने कहा, “प्रिय गोपियों! यह रास लीला हमेशा चलती रहेगी। जब भी तुम मुझे सच्चे मन से याद करोगी, मैं तुम्हारे साथ होऊंगा।”

सभी गोपियां खुश होकर अपने-अपने घर चली गईं। उनके मन में श्री कृष्ण की रास लीला की मधुर यादें बस गईं।

शिक्षा: श्री कृष्ण की रास लीला हमें सिखाती है कि भगवान हमेशा हमारे साथ हैं। जब हम उन्हें सच्चे मन से याद करते हैं, तो वे हमारे दिल में आकर बस जाते हैं। यह कहानी प्रेम, भक्ति और समर्पण का संदेश देती है।

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