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रेगिस्तान का खजाना – अलादीन की नई कहानी

बहुत समय पहले की बात है, जब बगदाद शहर में एक गरीब लड़का रहता था जिसका नाम हसन था। वह अपनी बूढ़ी दादी माँ के साथ एक छोटी सी झोंपड़ी में रहता था। हसन बहुत ही दयालु और मेहनती था, लेकिन उसके पास पैसे नहीं थे।

एक दिन हसन बाज़ार में काम की तलाश में घूम रहा था, तभी उसे एक अजीब सा बूढ़ा आदमी मिला। बूढ़े आदमी की आँखें चमक रही थीं और उसके हाथ में एक पुराना नक्शा था।

“बेटा हसन,” बूढ़े आदमी ने कहा, “क्या तुम रेगिस्तान का खजाना खोजना चाहते हो?”

हसन हैरान हो गया। “आप मेरा नाम कैसे जानते हैं, बाबा जी?” उसने पूछा।

“मैं जादूगर इब्राहिम हूँ,” बूढ़े आदमी ने मुस्कराते हुए कहा। “यह नक्शे की खोज तुम्हारे भाग्य में लिखी है। लेकिन याद रखना, यह भूमिगत खजाना केवल सच्चे दिल वाले को ही मिलता है।”

जादूगर इब्राहिम ने हसन को नक्शा दिया और समझाया कि रेगिस्तान का खजाना एक गुप्त गुफा में छुपा है। “तुम्हें तीन परीक्षाओं से गुजरना होगा,” उसने कहा।

अगली सुबह हसन ने अपनी दादी माँ से आशीर्वाद लिया और नक्शे की खोज में निकल पड़ा। रेगिस्तान में चलते-चलते उसे एक प्यासा कौआ मिला।

“पानी… पानी…” कौआ कराह रहा था।

हसन ने तुरंत अपनी पानी की बोतल से कौए को पानी पिलाया। कौआ खुश हो गया और बोला, “धन्यवाद हसन! मैं तुम्हारी मदद करूंगा।”

आगे चलकर हसन को एक घायल सांप मिला। डर के बावजूद भी हसन ने सांप की मरहम-पट्टी की। सांप ने कहा, “तुम्हारा दिल सोने से भी कीमती है, हसन।”

तीसरी परीक्षा में हसन को एक भूखा शेर मिला। हसन ने अपना खाना शेर को दे दिया। शेर ने कहा, “तुम सच्चे योद्धा हो।”

नक्शे के अनुसार चलते हुए हसन एक बड़ी चट्टान के पास पहुंचा। वहाँ “खुल जा सिम सिम” कहने से एक गुप्त दरवाजा खुला। अंदर भूमिगत खजाना चमक रहा था – सोने के सिक्के, हीरे-जवाहरात, और जादुई दीपक।

लेकिन हसन ने केवल एक छोटा सा थैला सोने का लिया। “मुझे सिर्फ अपनी दादी माँ के लिए दवा खरीदने के पैसे चाहिए,” उसने कहा।

तभी जादुई दीपक से एक जिन्न निकला। “हसन, तुम्हारा दिल इतना साफ है कि मैं तुम्हें तीन वरदान देता हूँ।”

हसन ने पहला वरदान अपनी दादी माँ की सेहत के लिए माँगा, दूसरा अपने शहर में पानी की व्यवस्था के लिए, और तीसरा सभी गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए।

जिन्न बहुत खुश हुआ और सभी वरदान पूरे किए। हसन जब घर लौटा तो उसकी दादी माँ बिल्कुल स्वस्थ थी। शहर में कुएँ और स्कूल बन गए थे।

रेगिस्तान का खजाना हसन को मिला था, लेकिन असली खजाना था उसका दयालु दिल। कौआ, सांप और शेर भी उसके मित्र बन गए और हमेशा उसकी रक्षा करते रहे।

सीख: सच्चा खजाना पैसे में नहीं, बल्कि दयालु दिल और अच्छे कर्मों में होता है। जो दूसरों की मदद करता है, अल्लाह उसकी मदद करता है।

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