Summarize this Article with:

किसकी दाढ़ी की आग – बीरबल की बुद्धिमानी
मुगल सम्राट अकबर के दरबार में एक दिन बड़ी चहल-पहल थी। दरबारी अपने-अपने काम में व्यस्त थे और बादशाह अकबर अपने सिंहासन पर बैठे किसी गंभीर मामले पर विचार कर रहे थे।
तभी दरबार में दो व्यापारी हांफते हुए आए। दोनों के चेहरे पर गुस्सा और परेशानी साफ दिख रही थी। पहला व्यापारी रामदास था और दूसरा श्यामदास। दोनों पड़ोसी थे और अपनी-अपनी दुकानें चलाते थे।
“हुजूर, इन्साफ चाहिए!” रामदास ने आगे बढ़कर कहा। “यह श्यामदास मेरे ग्राहकों को भड़काता है और मेरे व्यापार में दखल देता है।”
श्यामदास तुरंत बोला, “यह झूठ है, महाराज! यह रामदास ही मेरे काम में टांग अड़ाता है। जब भी कोई ग्राहक मेरी दुकान आता है, यह उसे मेरे खिलाफ भड़काता है।”
अकबर ने दोनों की बात सुनी और बीरबल की तरफ देखा। बीरबल समझ गया कि यह किसकी दाढ़ी की आग वाला मामला है, जहां दोनों एक-दूसरे की समस्याओं में अनावश्यक हस्तक्षेप कर रहे हैं।
“महाराज,” बीरबल ने विनम्रता से कहा, “क्या मैं इन दोनों से कुछ सवाल पूछ सकता हूं?”
अकबर ने सिर हिलाकर अनुमति दे दी।
बीरबल ने रामदास से पूछा, “तुम्हारी दुकान में क्या बिकता है?”
“मैं कपड़े बेचता हूं, हुजूर।” रामदास ने जवाब दिया।
“और तुम श्यामदास?” बीरबल ने दूसरे व्यापारी से पूछा।
“मैं मिठाइयां बेचता हूं।” श्यामदास ने कहा।
बीरबल मुस्कराया और बोला, “अच्छा, तो रामदास जी, आप बताइए कि श्यामदास के ग्राहक आपकी दुकान से कपड़े क्यों खरीदेंगे? वे तो मिठाई खरीदने आते हैं।”
रामदास थोड़ा सकपकाया, “वो… वो कभी-कभी कपड़े भी देखते हैं।”
“और श्यामदास जी,” बीरबल ने कहा, “आपके ग्राहक रामदास की दुकान से मिठाई तो नहीं खरीदते?”
श्यामदास भी असहज हो गया, “नहीं… लेकिन वो मेरे बारे में गलत बातें करता है।”
बीरबल ने दरबारियों की तरफ देखा और फिर कहा, “महाराज, मुझे लगता है यह किसकी दाढ़ी की आग का मामला है। दोनों व्यापारी एक-दूसरे के काम में बिना वजह दखल दे रहे हैं।”
अकबर ने पूछा, “बीरबल, तुम्हारा क्या मतलब है?”
“हुजूर,” बीरबल ने समझाया, “जब किसी की दाढ़ी में आग लगती है, तो दूसरे लोग अपनी दाढ़ी को पानी से भिगो लेते हैं। यहां भी यही हो रहा है। दोनों व्यापारी एक-दूसरे की समस्याओं में अनावश्यक हस्तक्षेप कर रहे हैं, जबकि उनका व्यापार बिल्कुल अलग है।”
बीरबल ने आगे कहा, “रामदास जी, आप कपड़े बेचते हैं और श्यामदास जी मिठाई। आप दोनों के ग्राहक अलग हैं। फिर एक-दूसरे से क्यों परेशान हो रहे हैं?”
दोनों व्यापारी एक-दूसरे की तरफ देखने लगे। उन्हें अहसास हो रहा था कि वे वाकई बेवजह एक-दूसरे से परेशान हो रहे थे।
बीरबल ने एक कहानी सुनाई, “एक बार दो पड़ोसी थे। एक के घर में आग लग गई। दूसरे ने सोचा कि कहीं आग उसके घर न आ जाए, इसलिए वह अपने घर पर पानी छिड़कने लगा। लेकिन जिसके घर में आग लगी थी, उसकी मदद नहीं की। नतीजा यह हुआ कि पहले का घर जल गया और दूसरे का घर भी पानी से खराब हो गया।”
“इसका मतलब यह है कि दूसरों की समस्याओं में अनावश्यक हस्तक्षेप करने से अपना भी नुकसान होता है।” बीरबल ने समझाया।
अकबर ने प्रशंसा की, “वाह बीरबल! तुमने बहुत अच्छी बात कही।”
बीरबल ने दोनों व्यापारियों से कहा, “आप दोनों अपने-अपने काम पर ध्यान दीजिए। एक-दूसरे की मदद करिए, दखलअंदाजी नहीं। रामदास जी, अगर कोई ग्राहक आपसे मिठाई के बारे में पूछे तो श्यामदास जी की दुकान का पता बताइए। और श्यामदास जी, अगर कोई कपड़े के बारे में पूछे तो रामदास जी के पास भेजिए।”
दोनों व्यापारियों को अपनी गलती का अहसास हो गया। उन्होंने एक-दूसरे से माफी मांगी और बीरबल का धन्यवाद किया।
“हुजूर,” रामदास ने कहा, “हमें समझ आ गया कि हम किसकी दाढ़ी की आग में अपना समय और ऊर्जा बर्बाद कर रहे थे।”
श्यामदास ने भी कहा, “जी हां, अब हम अपने-अपने काम पर ध्यान देंगे और एक-दूसरी की मदद करेंगे।”
अकबर ने खुश होकर कहा, “बीरबल, तुमने आज फिर अपनी बुद्धिमानी का परिचय दिया है। तुमने न केवल इनके झगड़े का समाधान किया, बल्कि एक महत्वपूर्ण सीख भी दी।”
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि दूसरों की समस्याओं में अनावश्यक हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। जैसे किसकी दाढ़ी की आग देखकर अपनी दाढ़ी को पानी से भिगोना व्यर्थ है, वैसे ही दूसरों के मामलों में बिना वजह दखल देना हानिकारक है। हमें अपने काम पर ध्यान देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की सहायता करनी चाहिए, दखलअंदाजी नहीं।










