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हातिम ताई और राजकुमारी की सुरक्षा
बहुत समय पहले की बात है, जब अरब की धरती पर वीर योद्धा हातिम ताई का नाम सभी जानते थे। उनकी वीरता और दयालुता की कहानियां दूर-दूर तक फैली हुई थीं। एक दिन हातिम ताई को एक संदेश मिला कि पास के राज्य की राजकुमारी सुनयना को एक दुष्ट जादूगर ने बंदी बना लिया है।
राजकुमारी सुनयना अपनी दयालुता और सुंदरता के लिए प्रसिद्ध थी। वह हमेशा गरीबों की सहायता करती थी और प्रजा उससे बहुत प्रेम करती थी। जब दुष्ट जादूगर काला नाग ने उसे अपने काले महल में कैद कर लिया, तो पूरे राज्य में शोक छा गया।
हातिम ताई ने तुरंत अपना घोड़ा तैयार किया और राजकुमारी की सुरक्षा के लिए निकल पड़े। रास्ते में उन्हें एक बूढ़ा व्यक्ति मिला जो रो रहा था। हातिम ताई ने पूछा, “बाबा, आप क्यों रो रहे हैं?”
बूढ़े व्यक्ति ने कहा, “वीर योद्धा, मेरी बेटी भी उस दुष्ट जादूगर के कब्जे में है। वह सभी सुंदर लड़कियों को पकड़कर अपने महल में कैद कर देता है।”
हातिम ताई का दिल दुख से भर गया। उन्होंने बूढ़े व्यक्ति को आश्वासन दिया, “चिंता मत करो बाबा, मैं न केवल राजकुमारी की सुरक्षा करूंगा बल्कि सभी कैदी लड़कियों को भी मुक्त कराऊंगा।”
आगे बढ़ते हुए हातिम ताई को एक जंगल मिला जहां अजीब आवाजें आ रही थीं। वहां उन्हें एक बोलने वाला तोता मिला जो पेड़ पर बैठा था। तोते ने कहा, “हे वीर योद्धा, मैं जानता हूं तुम कहां जा रहे हो। काला नाग का महल यहां से तीन दिन की यात्रा पर है।”
हातिम ताई ने विनम्रता से पूछा, “मित्र, क्या तुम मुझे उस दुष्ट जादूगर को हराने का कोई उपाय बता सकते हो?”
तोते ने बताया, “काला नाग की शक्ति उसकी काली अंगूठी में है। यदि तुम वह अंगूठी तोड़ दो, तो वह एक साधारण इंसान बन जाएगा। लेकिन सावधान रहना, वह बहुत चालाक है।”
हातिम ताई ने तोते को धन्यवाद दिया और अपनी यात्रा जारी रखी। तीन दिन बाद वे काले महल के सामने पहुंचे। महल बहुत डरावना था और उसके चारों ओर काले बादल छाए हुए थे।
महल के द्वार पर दो विशाल राक्षस पहरा दे रहे थे। हातिम ताई ने अपनी तलवार निकाली और बहादुरी से उन पर आक्रमण किया। एक भयंकर युद्ध के बाद उन्होंने दोनों राक्षसों को हरा दिया।
महल के अंदर जाकर हातिम ताई ने देखा कि कई कमरों में लड़कियां कैद थीं। उन्होंने सबसे पहले राजकुमारी सुनयना को ढूंढा। राजकुमारी एक ऊंचे कमरे में बंद थी और रो रही थी।
“राजकुमारी, डरिए मत। मैं हातिम ताई हूं और आपकी सुरक्षा के लिए आया हूं,” हातिम ताई ने कहा।
राजकुमारी सुनयना ने आशा भरी आंखों से देखा और कहा, “हे वीर योद्धा, सावधान रहिए। काला नाग बहुत शक्तिशाली है।”
तभी काला नाग वहां आ गया। वह बहुत लंबा और डरावना था। उसकी आंखें लाल थीं और हाथ में एक काली छड़ी थी। उसकी उंगली में काली अंगूठी चमक रही थी।
“तो तुम हो हातिम ताई! तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे महल में आने की?” काला नाग गुस्से से चिल्लाया।
हातिम ताई ने निडरता से कहा, “दुष्ट जादूगर, इन निर्दोष लड़कियों को छोड़ दे। तेरा युद्ध मेरे साथ है।”
काला नाग ने अपनी छड़ी हिलाई और आग के गोले हातिम ताई की ओर फेंके। लेकिन हातिम ताई बहुत तेज थे। वे बचते रहे और मौका देखकर काला नाग पर आक्रमण किया।
युद्ध बहुत भयंकर था। काला नाग जादू का इस्तेमाल कर रहा था और हातिम ताई अपनी तलवार और बुद्धि से लड़ रहे थे। अचानक हातिम ताई को याद आया कि तोते ने काली अंगूठी के बारे में क्या कहा था।
हातिम ताई ने एक चालाकी की। उन्होंने काला नाग का ध्यान भटकाया और तेजी से उसके हाथ पर वार किया। काली अंगूठी टूटकर जमीन पर गिर गई और चकनाचूर हो गई।
अंगूठी टूटते ही काला नाग की सारी शक्ति खत्म हो गई। वह एक साधारण बूढ़ा आदमी बन गया और डर से कांपने लगा। “मुझे माफ कर दो, मैंने गलती की है,” वह गिड़गिड़ाया।
हातिम ताई ने कहा, “तुमने बहुत गलत काम किया है। अब तुम्हें अपनी गलतियों का प्रायश्चित करना होगा।”
हातिम ताई ने सभी कैदी लड़कियों को मुक्त कराया। राजकुमारी सुनयना और अन्य सभी लड़कियां खुशी से रो पड़ीं। उन्होंने हातिम ताई का धन्यवाद किया।
राजकुमारी सुनयना ने कहा, “हे वीर हातिम ताई, आपने न केवल मेरी सुरक्षा की बल्कि सभी निर्दोष लड़कियों को भी बचाया। आप सच्चे वीर हैं।”
हातिम ताई ने सभी को सुरक्षित उनके घर पहुंचाया। बूढ़े व्यक्ति को अपनी बेटी मिल गई और वह खुशी से रो पड़ा। राजकुमारी सुनयना के राज्य में भी खुशी का माहौल था।
राजा ने हातिम ताई को बहुत सारा धन और सम्मान देना चाहा, लेकिन हातिम ताई ने विनम्रता से मना कर दिया। उन्होंने कहा, “महाराज, निर्दोष लोगों की सुरक्षा करना मेरा कर्तव्य है। इसके लिए मुझे किसी पुरस्कार की आवश्यकता नहीं।”
इस प्रकार हातिम ताई ने एक बार फिर साबित किया कि सच्चा वीर वही होता है जो निस्वार्थ भाव से दूसरों की सहायता करता है। राजकुमारी की सुरक्षा करके उन्होंने दिखाया कि अच्छाई हमेशा बुराई पर विजय पाती है।
सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें हमेशा निर्दोष और असहाय लोगों की सहायता करनी चाहिए। सच्ची वीरता धन या शक्ति में नहीं, बल्कि दूसरों की भलाई में है। जब हम निस्वार्थ भाव से किसी की सुरक्षा करते हैं, तो भगवान हमारी सहायता करते हैं।








