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हातिम ताई और राजकुमारी की सुरक्षा – बीरबल की बुद्धि
बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन एक अजीब समस्या आई। पास के राज्य की राजकुमारी सुनयना को किसी दुष्ट जादूगर ने अपने महल में कैद कर लिया था। राजा ने अकबर से मदद मांगी थी।
“हुजूर, यह काम बहुत खतरनाक है,” दरबारियों ने कहा। “उस जादूगर के पास अनेक शक्तियां हैं। कोई भी योद्धा वहां जाकर वापस नहीं आया है।”
अकबर चिंता में पड़ गए। तभी बीरबल ने कहा, “जहांपनाह, मैंने हातिम ताई की कहानियां सुनी हैं। वे बहुत बहादुर और दयालु थे। क्यों न हम उनकी तरह बुद्धि का उपयोग करें?”
“कैसे?” अकबर ने पूछा।
बीरबल मुस्कराए, “हुजूर, हातिम ताई और राजकुमारी की सुरक्षा की कहानी में हातिम ताई ने कभी भी सीधे युद्ध नहीं किया था। वे हमेशा अपनी बुद्धि से काम लेते थे।”
अकबर ने बीरबल को योजना बनाने को कहा। बीरबल ने तुरंत एक चतुर योजना बनाई।
अगले दिन, बीरबल एक फकीर का भेष धारण करके जादूगर के महल पहुंचे। उन्होंने महल के द्वार पर जाकर कहा, “मैं एक गरीब फकीर हूं। मुझे भूख लगी है। कृपया कुछ खाना दे दीजिए।”
जादूगर हंसा, “अरे फकीर! तू जानता है मैं कौन हूं? मैं राजकुमारियों को कैद करता हूं। तुझे डर नहीं लगता?”
बीरबल ने विनम्रता से कहा, “महाराज, मैं तो सिर्फ भूखा हूं। हातिम ताई कहते थे कि दयालुता सबसे बड़ी शक्ति है।”
“हातिम ताई?” जादूगर की आंखें चमकीं। “मैंने उनके बारे में सुना है। वे बहुत महान थे।”
बीरबल ने कहा, “जी हां, हातिम ताई और राजकुमारी की सुरक्षा की कहानी बहुत प्रसिद्ध है। वे कभी भी किसी निर्दोष को कष्ट नहीं देते थे।”
जादूगर सोच में पड़ गया। बीरबल ने आगे कहा, “महाराज, आप भी बहुत शक्तिशाली हैं। लेकिन हातिम ताई की तरह दयालु बनकर देखिए। आपको और भी खुशी मिलेगी।”
“कैसे?” जादूगर ने पूछा।
बीरबल ने चतुराई से कहा, “अगर आप राजकुमारी सुनयना को मुक्त कर दें, तो लोग आपको हातिम ताई की तरह याद रखेंगे। आपका नाम अमर हो जाएगा।”
जादूगर के मन में द्वंद्व शुरू हुआ। बीरबल ने और कहा, “महाराज, हातिम ताई और राजकुमारी की सुरक्षा की कहानी में हातिम ताई ने दिखाया था कि सच्ची शक्ति दूसरों की मदद करने में है, उन्हें कष्ट देने में नहीं।”
जादूगर धीरे-धीरे पिघलने लगा। उसने कहा, “फकीर, तुम्हारी बातें सच हैं। मैं गलत रास्ते पर था।”
बीरबल ने मौका देखकर कहा, “महाराज, अभी भी देर नहीं हुई। आप राजकुमारी की सुरक्षा करके एक महान कार्य कर सकते हैं।”
जादूगर ने तुरंत राजकुमारी सुनयना को मुक्त कर दिया। राजकुमारी खुशी से रो पड़ी।
जब बीरबल राजकुमारी के साथ वापस दरबार पहुंचे, तो अकबर बहुत खुश हुए। “बीरबल, तुमने यह कमाल कैसे किया?”
बीरबल ने कहा, “हुजूर, मैंने हातिम ताई की तरह बुद्धि का उपयोग किया। हातिम ताई और राजकुमारी की सुरक्षा की कहानी से मैंने सीखा था कि कभी-कभी तलवार से ज्यादा शब्दों में शक्ति होती है।”
राजकुमारी सुनयना ने कहा, “बीरबल जी, आपने मुझे बचाया ही नहीं, बल्कि उस जादूगर का दिल भी बदल दिया।”
अकबर ने प्रशंसा की, “वाह बीरबल! तुमने सिखाया कि हातिम ताई की तरह दयालुता और बुद्धि से हर समस्या का समाधान हो सकता है।”
उस दिन के बाद, वह जादूगर भी अच्छे काम करने लगा। उसने अपनी शक्तियों का उपयोग लोगों की मदद के लिए करना शुरू किया।
सीख: इस कहानी से हमें पता चलता है कि हातिम ताई और राजकुमारी की सुरक्षा की तरह, बुद्धि और दयालुता से हर मुश्किल का हल निकाला जा सकता है। हिंसा से कहीं ज्यादा शक्तिशाली होते हैं प्रेम और समझदारी के शब्द।












