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गुरु नानक की दक्षिण भारत की यात्रा
बहुत समय पहले की बात है, जब गुरु नानक देव जी ने अपनी दक्षिण भारत की यात्रा का निर्णय लिया। वे अपने वफादार साथी मरदाना के साथ सत्य और धर्म का प्रचार करने निकले थे।
गुरु जी जब तमिलनाडु पहुंचे, तो वहां के लोग उन्हें देखकर आश्चर्यचकित हो गए। उनके सफेद वस्त्र और दिव्य तेज को देखकर सभी समझ गए कि कोई महान संत आया है।
एक दिन गुरु नानक एक गांव में पहुंचे जहां लोग बहुत परेशान थे। गांव के मुखिया ने कहा, “हे महात्मा जी, हमारे यहां कई महीनों से बारिश नहीं हुई है। फसलें सूख रही हैं और लोग भूखे मर रहे हैं।”
गुरु नानक ने मुस्कराते हुए कहा, “पुत्र, ईश्वर सबका पिता है। वह अपनी संतानों को कभी भूखा नहीं रखता। तुम सब मिलकर सच्चे मन से प्रार्थना करो।”
गुरु जी ने सभी गांववासियों को एक स्थान पर इकट्ठा किया। उन्होंने कहा, “धर्म केवल पूजा-पाठ में नहीं, बल्कि सच्चाई और मेहनत में है। आओ, हम सब मिलकर एक कुआं खोदते हैं।”
गांव के लोग हैरान हुए। एक बूढ़े व्यक्ति ने कहा, “गुरु जी, हमने यहां कई जगह कुआं खोदने की कोशिश की है, लेकिन पानी नहीं मिला।”
गुरु नानक ने धैर्य से समझाया, “जब हम सच्चे मन से मेहनत करते हैं और ईश्वर पर भरोसा रखते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है।”
अगले दिन से पूरा गांव एक साथ मिलकर कुआं खोदने लगा। गुरु जी भी उनके साथ मिट्टी खोदते रहे। मरदाना अपनी रबाब बजाकर सबका उत्साह बढ़ाते रहे।
तीन दिन की कड़ी मेहनत के बाद, जब वे काफी गहराई तक पहुंचे, तो अचानक मिट्टी से पानी की धारा फूट पड़ी। सभी लोग खुशी से चिल्लाने लगे। दक्षिण भारत की यात्रा में यह गुरु नानक का एक और चमत्कार था।
लेकिन गुरु जी ने कहा, “यह कोई चमत्कार नहीं है, पुत्रों। यह तुम्हारी मेहनत और सच्ची श्रद्धा का फल है। ईश्वर उन्हीं की मदद करता है जो अपनी मदद करते हैं।”
इसके बाद गुरु नानक ने गांववासियों को जीवन के महत्वपूर्ण सिद्धांत सिखाए। उन्होंने कहा, “सभी धर्म एक ही परमात्मा की राह दिखाते हैं। हिंदू हो या मुसलमान, सिख हो या ईसाई, सभी उसी एक ईश्वर की संतान हैं।”
गांव के पंडित जी ने पूछा, “गुरु जी, तो फिर हम अलग-अलग तरीकों से पूजा क्यों करते हैं?”
गुरु नानक ने उत्तर दिया, “जैसे एक ही सूर्य अलग-अलग खिड़कियों से घरों में प्रकाश फैलाता है, वैसे ही एक ही परमात्मा अलग-अलग रास्तों से हमारे दिलों में प्रेम भरता है।”
कई दिनों तक गुरु जी उस गांव में रहे। उन्होंने लोगों को सिखाया कि सच्चा धर्म दिखावे में नहीं, बल्कि दिल की सफाई में है। उन्होंने कहा, “नाम जपो, किरत करो, और वंड छको – यानी ईश्वर का नाम लो, मेहनत करो, और दूसरों के साथ बांटकर खाओ।”
जब गुरु नानक की दक्षिण भारत की यात्रा का समय पूरा हुआ, तो पूरा गांव उन्हें विदा करने आया। सभी की आंखों में आंसू थे।
गांव के मुखिया ने कहा, “गुरु जी, आपने हमें केवल पानी ही नहीं दिया, बल्कि जीवन जीने का सही तरीका भी सिखाया है।”
गुरु नानक ने आशीर्वाद देते हुए कहा, “पुत्रों, याद रखना – ईश्वर हर जगह है, हर इंसान में है। किसी को छोटा या बड़ा मत समझो। सबके साथ प्रेम और सम्मान से पेश आओ।”
इस प्रकार गुरु नानक की दक्षिण भारत की यात्रा ने न केवल उस गांव का कल्याण किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य शिक्षा भी छोड़ी।
शिक्षा: इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि सच्ची श्रद्धा और मेहनत के साथ किया गया कार्य हमेशा सफल होता है। सभी धर्मों का आदर करना और मानवता की सेवा करना ही सच्चा धर्म है। सच्चाई और मेहनत का महत्व समझने के लिए इस कहानी को पढ़ें।










