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चोटी का किस्सा – अकबर बीरबल की कहानी

बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन बड़ी चहल-पहल थी। सभी दरबारी अपनी-अपनी जगह बैठे हुए थे और बीरबल भी अपनी सामान्य जगह पर विराजमान था। अचानक बादशाह अकबर की नजर एक दरबारी की चोटी पर पड़ी।

उस दरबारी की चोटी बहुत ही सुंदर और लंबी थी। बादशाह अकबर ने मुस्कराते हुए कहा, “आज हमारे मन में एक विचित्र सवाल आया है। हमें लगता है कि इंसान के सिर पर जो चोटी होती है, वह सबसे बेकार चीज है।”

यह सुनकर सभी दरबारी चौंक गए। कई दरबारियों की अपनी चोटी थी और वे इस बात से परेशान हो गए। एक दरबारी ने कहा, “हुजूर, चोटी हमारी परंपरा का हिस्सा है।”

दूसरे दरबारी ने कहा, “जहांपनाह, चोटी हमारी संस्कृति की पहचान है।”

लेकिन बादशाह अकबर ने हंसते हुए कहा, “नहीं-नहीं, हमें तो लगता है कि चोटी बिल्कुल बेकार है। इससे कोई फायदा नहीं होता।”

सभी दरबारी परेशान हो गए। वे अपनी चोटी की रक्षा के लिए तर्क देने लगे, लेकिन बादशाह अकबर किसी की बात नहीं मान रहे थे। तभी सभी की नजर बीरबल पर पड़ी।

बीरबल शांति से बैठा हुआ था और मुस्कराता रहा। बादशाह अकबर ने पूछा, “बीरबल, तुम क्या कहते हो? क्या चोटी वाकई बेकार है?”

बीरबल ने विनम्रता से कहा, “हुजूर, आपकी बात बिल्कुल सही है। चोटी वाकई बेकार है।”

यह सुनकर सभी दरबारी हैरान रह गए। उन्होंने सोचा कि बीरबल भी बादशाह की हां में हां मिला रहा है। लेकिन बीरबल की चालाकी को समझने वाला कोई नहीं था।

अगले दिन बादशाह अकबर ने घोषणा की, “कल से दरबार में चोटी वाला कोई भी व्यक्ति नहीं आएगा। सभी को अपनी चोटी कटवानी होगी।”

यह सुनकर सभी दरबारी बहुत परेशान हो गए। उन्होंने अपनी चोटी कटवा ली। अगले दिन जब दरबार लगा तो बादशाह अकबर ने देखा कि बीरबल नहीं आया है।

बादशाह ने पूछा, “बीरबल कहां है? उसे बुलाओ।”

सिपाही गया और वापस आकर बोला, “हुजूर, बीरबल कहता है कि उसकी चोटी है इसलिए वह दरबार में नहीं आ सकता।”

बादशाह अकबर हैरान हुआ और बोला, “लेकिन बीरबल ने तो कहा था कि चोटी बेकार है। फिर उसने अपनी चोटी क्यों नहीं कटवाई?”

बादशाह अकबर खुद बीरबल के घर गया। वहां जाकर देखा कि बीरबल अपनी चोटी के साथ बैठा हुआ है।

बादशाह ने पूछा, “बीरबल, तुमने कहा था कि चोटी बेकार है, फिर तुमने अपनी चोटी क्यों नहीं कटवाई?”

बीरबल ने मुस्कराते हुए कहा, “हुजूर, मैंने कहा था कि चोटी बेकार है, लेकिन मैंने यह नहीं कहा था कि मैं अपनी चोटी कटवा दूंगा।”

“आज आपको पता चल गया कि चोटी कितनी उपयोगी है। जब आपने चोटी वालों को दरबार में आने से मना किया, तो आपका सबसे बुद्धिमान मंत्री ही दरबार में नहीं आ सका।”

बादशाह अकबर को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने समझा कि हर चीज का अपना महत्व होता है और किसी भी चीज को बेकार नहीं कहना चाहिए।

बादशाह ने कहा, “बीरबल, तुमने एक बार फिर मुझे सही राह दिखाई है। चोटी का किस्सा मुझे हमेशा याद रहेगा।”

अगले दिन बादशाह अकबर ने दरबार में घोषणा की कि सभी दरबारी अपनी इच्छा के अनुसार चोटी रख सकते हैं। सभी दरबारी खुश हो गए और बीरबल की बुद्धिमत्ता की प्रशंसा करने लगे।

सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें किसी भी चीज को बिना सोचे-समझे बेकार नहीं कहना चाहिए। हर चीज का अपना महत्व और उपयोग होता है। बीरबल ने अपनी चतुराई से बादशाह अकबर को यह समझाया कि चोटी भी एक महत्वपूर्ण चीज है और इसका अपना स्थान है। सामाजिक बुद्धिमत्ता और व्यापारी की कहानी भी हमें इसी तरह की सीख देती हैं।

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