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बाल हनुमान के अद्भुत चमत्कार – सूर्य को निगलने की कथा

बहुत समय पहले की बात है, जब भगवान हनुमान छोटे बालक थे। उनकी माता अंजना और पिता केसरी उन्हें बहुत प्यार करते थे। बाल हनुमान के चमत्कार की शुरुआत उनके जन्म के साथ ही हो गई थी।

एक सुबह की बात है, छोटे हनुमान जी भूख से व्याकुल हो उठे। उन्होंने अपनी माता अंजना से कहा, “माता, मुझे बहुत भूख लगी है। कुछ खाने को दीजिए।”

अंजना माता ने प्यार से कहा, “वत्स, मैं तुम्हारे लिए फल लेकर आती हूं। तुम यहीं खेलते रहो।” यह कहकर वे फल लेने चली गईं।

बाल हनुमान अकेले खेल रहे थे। तभी उनकी नजर आकाश में चमकते हुए सूर्य भगवान पर पड़ी। सूर्य का लाल-सुनहरा रंग देखकर उन्हें लगा कि यह कोई बड़ा मीठा फल है।

बाल हनुमान के चमत्कार का सबसे प्रसिद्ध प्रसंग यहीं से शुरू होता है। छोटे हनुमान ने सोचा, “यह कितना सुंदर और बड़ा फल है! मैं इसे खाकर अपनी भूख मिटाऊंगा।”

यह सोचकर बाल हनुमान ने अपनी दिव्य शक्ति का प्रयोग किया। वे हवा में उड़ते हुए सूर्य की ओर बढ़ने लगे। उनका शरीर तेजी से बढ़ता गया और वे आकाश में ऊंचे से ऊंचे उड़ते गए।

जब सूर्य भगवान ने देखा कि एक छोटा बालक उनकी ओर आ रहा है, तो वे चकित रह गए। उन्होंने पूछा, “बालक, तुम कौन हो और यहां क्यों आए हो?”

बाल हनुमान ने मासूमियत से कहा, “मुझे भूख लगी है और आप एक बड़े मीठे फल लग रहे हैं। मैं आपको खाना चाहता हूं।”

सूर्य भगवान यह सुनकर हैरान रह गए। इससे पहले कि वे कुछ समझ पाते, बाल हनुमान के चमत्कार का प्रदर्शन हुआ। छोटे हनुमान ने अपना मुंह बहुत बड़ा किया और पूरे सूर्य को निगल गया।

जैसे ही सूर्य भगवान गायब हुए, पूरी पृथ्वी अंधकार में डूब गई। दिन में ही रात हो गई। सभी देवता, मनुष्य और जीव-जंतु परेशान हो गए।

इंद्र देव ने देखा कि सूर्य गायब हो गए हैं। वे तुरंत पता लगाने निकले कि यह कैसे हुआ। जब उन्होंने देखा कि एक छोटे बालक ने सूर्य को निगल लिया है, तो वे बहुत क्रोधित हुए।

इंद्र देव ने अपना वज्र उठाया और बाल हनुमान पर फेंका। वज्र लगने से छोटे हनुमान की ठुड्डी पर चोट आई और वे बेहोश होकर पृथ्वी पर गिर पड़े। सूर्य भगवान उनके मुंह से बाहर निकल आए।

जब पवन देव ने देखा कि उनके पुत्र हनुमान को चोट लगी है, तो वे बहुत क्रोधित हुए। उन्होंने सारी हवा को रोक दिया। पूरे संसार में हवा बंद हो गई।

सभी जीव-जंतु सांस लेने में परेशानी होने लगी। ब्रह्मा जी, विष्णु जी और सभी देवता पवन देव के पास गए और उनसे विनती की।

ब्रह्मा जी ने कहा, “पवन देव, आपका पुत्र बहुत शक्तिशाली है। बाल हनुमान के चमत्कार देखकर हम सभी प्रभावित हैं। कृपया अपना क्रोध शांत करें।”

सभी देवताओं ने मिलकर बाल हनुमान को आशीर्वाद दिया। ब्रह्मा जी ने कहा कि वे युद्ध में अजेय होंगे। इंद्र देव ने वरदान दिया कि उनका शरीर वज्र से भी मजबूत होगा।

सूर्य भगवान ने कहा, “बालक, तुम्हारी शक्ति अद्भुत है। मैं तुम्हें अपनी शक्ति का सौवां हिस्सा देता हूं।” अग्नि देव ने आशीर्वाद दिया कि आग उन्हें कभी जला नहीं सकेगी।

जब बाल हनुमान की चेतना वापस आई, तो उन्होंने देखा कि सभी देवता उनके चारों ओर खड़े हैं। उनकी माता अंजना भी वहां आ गई थीं।

अंजना माता ने प्यार से कहा, “वत्स, तुमने तो बहुत बड़ा काम कर दिया। अब तुम समझदारी से अपनी शक्ति का प्रयोग करना।”

बाल हनुमान ने सभी से माफी मांगी और कहा, “मुझे नहीं पता था कि सूर्य भगवान एक फल नहीं हैं। मैंने तो सिर्फ अपनी भूख मिटाने की सोची थी।”

सभी देवता हंसने लगे। उन्होंने समझ लिया कि यह बालक भविष्य में बहुत महान कार्य करेगा। बाल हनुमान के चमत्कार की यह घटना सभी लोकों में प्रसिद्ध हो गई।

इस घटना के बाद से बाल हनुमान और भी समझदार हो गए। उन्होंने अपनी शक्तियों का सदुपयोग करना सीखा। वे हमेशा धर्म के मार्ग पर चलते रहे और बाद में भगवान राम के सबसे बड़े भक्त बने।

इस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि शक्ति का प्रयोग हमेशा सोच-समझकर करना चाहिए। बाल हनुमान की तरह हमें भी अपनी क्षमताओं का सदुपयोग करना चाहिए और बड़ों का सम्मान करना चाहिए।

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