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महाराज की वाहवाही और बीरबल की चतुराई
बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन बहुत ही रोचक घटना घटी। उस दिन दरबार में कई राजा-महाराजा और मंत्री उपस्थित थे। सभी महाराज की वाहवाही में व्यस्त थे।
“हुजूर, आपके जैसा न्यायप्रिय और बुद्धिमान शासक संसार में कोई नहीं है,” एक दरबारी ने कहा।
“जी हाँ महाराज, आपकी महाराज की वाहवाही तो स्वर्ग तक पहुँचती है,” दूसरे ने जोड़ा।
अकबर इन सब बातों को सुनकर प्रसन्न हो रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि बीरबल चुपचाप एक कोने में बैठा है और मुस्कुरा रहा है।
“बीरबल, तुम क्यों चुप हो? तुम भी हमारी प्रशंसा क्यों नहीं कर रहे?” अकबर ने पूछा।
बीरबल ने विनम्रता से कहा, “हुजूर, मैं तो हमेशा आपकी सच्ची सेवा में लगा रहता हूँ। महाराज की वाहवाही करना और सच्ची सेवा करना दो अलग बातें हैं।”
अकबर को बीरबल की बात समझ नहीं आई। उन्होंने कहा, “इसका मतलब क्या है बीरबल?”
बीरबल ने कहा, “हुजूर, कल मैं आपको इसका उत्तर दूंगा। आज आप सभी दरबारियों से पूछिए कि वे आपके लिए क्या कर सकते हैं।”
अकबर ने सभी दरबारियों से पूछा। सभी ने कहा, “हुजूर, हम आपके लिए अपनी जान भी दे सकते हैं। आपकी महाराज की वाहवाही करना हमारा धर्म है।”
अगले दिन बीरबल दरबार में आया और बोला, “हुजूर, आज मैं आपको दिखाता हूँ कि सच्ची सेवा क्या होती है।”
बीरबल ने एक योजना बनाई। उसने राजमहल के बाहर आग लगवा दी और चिल्लाकर कहा, “आग लग गई! महाराज को बचाना होगा!”
यह सुनकर सभी दरबारी भाग खड़े हुए। जो कल महाराज की वाहवाही कर रहे थे, वे अपनी जान बचाने में लग गए।
लेकिन बीरबल दौड़कर अकबर के पास गया और बोला, “हुजूर, चलिए मैं आपको सुरक्षित स्थान पर ले चलता हूँ।”
जब अकबर को पता चला कि यह बीरबल की योजना थी, तो वे समझ गए। उन्होंने कहा, “बीरबल, अब मैं समझ गया कि महाराज की वाहवाही करने वाले और सच्चे सेवक में क्या अंतर है।”
बीरबल ने कहा, “हुजूर, जो लोग केवल महाराज की वाहवाही करते हैं, वे मुसीबत के समय साथ छोड़ देते हैं। लेकिन सच्चे सेवक हमेशा आपके साथ खड़े रहते हैं।”
अकबर ने बीरबल को गले लगाया और कहा, “तुमने मुझे एक महत्वपूर्ण सबक सिखाया है। अब मैं समझ गया कि चापलूसी और सच्ची सेवा में बहुत अंतर है।”
उस दिन के बाद से अकबर ने महाराज की वाहवाही करने वालों की बजाय सच्चे और ईमानदार सेवकों को अधिक महत्व दिया।
सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि चापलूसी और सच्ची सेवा में बहुत अंतर है। जो लोग केवल तारीफ करते हैं, वे मुसीबत के समय साथ नहीं देते। सच्चे मित्र और सेवक वे होते हैं जो कठिन समय में भी साथ खड़े रहते हैं।
आप समझदार बंदर की कहानी में भी देख सकते हैं कि कैसे सच्चे मित्र मुसीबत में साथ देते हैं।
इसके अलावा, व्यापारी का उदय और पतन कहानी में भी सच्ची सेवा और चापलूसी के बीच का अंतर दर्शाया गया है।









