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दो भाई की कहानी – भाईचारे की जीत
बहुत समय पहले, बगदाद शहर में एक धनी व्यापारी रहता था। उसके दो पुत्र थे – बड़ा अमीर और छोटा गरीब। पिता की मृत्यु के बाद, अमीर को सारी संपत्ति मिली और गरीब को केवल एक छोटी सी दुकान।
अमीर अपने महल में सुख-चैन से रहता था। उसके पास सोने-चांदी के खजाने, रेशमी वस्त्र और स्वादिष्ट भोजन था। वहीं गरीब अपनी छोटी दुकान चलाकर मुश्किल से गुजारा करता था। फिर भी वह अपने बड़े भाई से प्रेम करता था।
एक दिन गरीब अपने भाई के पास गया और बोला, “भाई साहब, मेरी पत्नी बीमार है। कुछ सहायता कर दीजिए।”
अमीर ने घमंड से कहा, “मैं क्यों तुम्हारी मदद करूं? तुम अपना काम करो।” और उसने अपने भाई को घर से निकाल दिया।
गरीब दुखी मन से वापस लौटा। रास्ते में उसे एक बूढ़ा फकीर मिला। फकीर ने पूछा, “बेटा, तुम इतने परेशान क्यों हो?”
गरीब ने अपनी सारी कहानी सुनाई। फकीर ने दया करके उसे एक जादुई दीपक दिया और कहा, “इसे रगड़ने से एक जिन्न निकलेगा जो तुम्हारी हर इच्छा पूरी करेगा।”
घर पहुंचकर गरीब ने दीपक रगड़ा। तुरंत एक विशाल जिन्न प्रकट हुआ और बोला, “हुकुम करिए मालिक, आपकी क्या सेवा करूं?”
गरीब ने कहा, “मेरी पत्नी को स्वस्थ कर दो और हमें थोड़ा धन दे दो।” जिन्न ने तुरंत उसकी इच्छा पूरी कर दी।
धीरे-धीरे गरीब का व्यापार फलने-फूलने लगा। कुछ महीनों में वह भी धनी बन गया। जब अमीर को यह पता चला तो उसके मन में ईर्ष्या की आग जल उठी।
अमीर ने सोचा, “यह गरीब अचानक इतना धनी कैसे बन गया? जरूर कोई राज है।” उसने अपने नौकरों को भेजकर अपने भाई की जासूसी कराई।
जब अमीर को जादुई दीपक के बारे में पता चला, तो उसने चोरी से वह दीपक चुरा लिया। उसने सोचा कि अब वह और भी अमीर बन जाएगा।
अमीर ने दीपक रगड़ा और जिन्न से कहा, “मुझे संसार का सबसे धनी आदमी बना दो।” जिन्न ने उसकी इच्छा पूरी कर दी, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी, “याद रखना, लालच का अंत बुरा होता है।”
अमीर अब पहले से भी ज्यादा धनी बन गया, लेकिन उसका लालच और बढ़ गया। वह रोज जिन्न से नई-नई चीजें मांगता रहता।
एक दिन अमीर ने जिन्न से कहा, “मुझे राजा बना दो।” जिन्न ने कहा, “यह मेरी शक्ति से बाहर है। मैं केवल धन-संपत्ति दे सकता हूं।”
अमीर गुस्से में आकर चिल्लाया, “तू बेकार है! मैं तुझे दीपक में वापस बंद कर देता हूं।” उसने गुस्से में दीपक को जमीन पर पटक दिया।
दीपक टूट गया और जिन्न गायब हो गया। साथ ही अमीर की सारी संपत्ति भी गायब हो गई। वह फिर से गरीब हो गया, बल्कि पहले से भी बुरी हालत में।
भूखा-प्यासा अमीर अपने छोटे भाई के पास गया। उसकी आंखों में आंसू थे। उसने कहा, “भाई, मुझे माफ कर दो। मैंने तुम्हारे साथ बहुत बुरा व्यवहार किया है।”
गरीब का दिल पिघल गया। उसने अपने बड़े भाई को गले लगाया और कहा, “भाई, आप मेरे बड़े हैं। आपका घर यही है।”
उस दिन के बाद दोनों भाई मिलकर व्यापार करने लगे। उन्होंने अपनी मेहनत और ईमानदारी से फिर से धन कमाया। अमीर ने अपने घमंड और लालच को त्याग दिया था।
दोनों भाई खुशी-खुशी रहने लगे। उनके बीच अब कोई ईर्ष्या नहीं थी, केवल प्रेम और भाईचारा था। गांव के लोग उनकी मिसाल देते और कहते कि सच्चा धन प्रेम और भाईचारे में है, सोने-चांदी में नहीं।
अंत में मिलाप हुआ और दोनों भाइयों ने सीखा कि रिश्ते सबसे बड़ा खजाना होते हैं। लालच और ईर्ष्या इंसान को बर्बाद कर देते हैं, लेकिन प्रेम और क्षमा से हर समस्या का समाधान हो जाता है।
इस प्रकार दो भाई की कहानी समाप्त होती है, जो हमें सिखाती है कि भाईचारा और प्रेम ही जीवन की सच्ची संपत्ति है।














