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कुएं का पानी – बीरबल की बुद्धिमानी
बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन एक अजीब मामला आया। फतेहपुर सीकरी के पास एक गांव के लोग अपनी समस्या लेकर आए थे। गांव के मुखिया ने कहा, “हुजूर, हमारे गांव में एक ही कुआं है और उसका पानी बहुत गंदा हो गया है। लोग बीमार पड़ रहे हैं।”
अकबर ने पूछा, “यह कैसे हुआ? कुएं का पानी अचानक गंदा कैसे हो गया?”
गांव के एक व्यक्ति ने कहा, “महाराज, हमारे गांव में एक धनी व्यापारी रहता है। उसने अपने घर के पास एक बड़ा कारखाना बनवाया है। उस कारखाने का गंदा पानी हमारे कुएं में मिल रहा है।”
अकबर ने तुरंत उस व्यापारी को दरबार में बुलवाया। व्यापारी आया और बोला, “हुजूर, मैंने कोई गलत काम नहीं किया है। मेरी जमीन है, मैं जो चाहूं कर सकता हूं।”
बीरबल चुपचाप सब सुन रहे थे। उन्होंने देखा कि व्यापारी बहुत अहंकारी था और उसे कुएं का पानी साफ रखने की कोई चिंता नहीं थी।
अकबर ने कहा, “व्यापारी जी, आप अपना कारखाना चला सकते हैं, लेकिन गांव के लोगों को साफ पानी मिलना चाहिए।”
व्यापारी ने जिद की, “महाराज, मैं अपना कारखाना बंद नहीं करूंगा। यह मेरा व्यवसाय है।”
तभी बीरबल ने कहा, “महाराज, मैं इस समस्या का समाधान करता हूं। व्यापारी जी, आप कल सुबह अपने परिवार के साथ मेरे घर खाना खाने आइए।”
व्यापारी हैरान हुआ लेकिन बीरबल का निमंत्रण स्वीकार कर लिया।
अगले दिन व्यापारी अपनी पत्नी और बच्चों के साथ बीरबल के घर पहुंचा। बीरबल ने उनका स्वागत किया और खाना परोसा। लेकिन जब व्यापारी ने पानी मांगा, तो बीरबल ने एक गिलास में गंदा, मैला पानी लाकर दिया।
व्यापारी ने कहा, “यह क्या है बीरबल साहब? यह पानी तो बहुत गंदा है। हम इसे कैसे पी सकते हैं?”
बीरबल मुस्कराए और बोले, “व्यापारी जी, यह वही कुएं का पानी है जो आपके कारखाने से निकलकर गांव के कुएं में मिलता है। अगर आप और आपका परिवार इसे नहीं पी सकते, तो गांव के बच्चे कैसे पिएं?”
व्यापारी की पत्नी ने कहा, “हे भगवान! हमारे बच्चे तो इस गंदे पानी से बीमार हो जाएंगे।”
बीरबल ने समझाया, “जी हां, और गांव के बच्चे भी यही गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। कुएं का पानी सबके लिए जीवन का आधार है। जब हम इसे गंदा करते हैं, तो हम दूसरों के जीवन के साथ खिलवाड़ करते हैं।”
व्यापारी को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने कहा, “बीरबल साहब, मुझे माफ करें। मैं समझ गया कि पानी की स्वच्छता कितनी महत्वपूर्ण है। मैं अपने कारखाने में तुरंत सफाई की व्यवस्था करूंगा।”
बीरबल ने कहा, “व्यापारी जी, पानी प्रकृति का अनमोल उपहार है। हमें इसकी रक्षा करनी चाहिए, न कि इसे गंदा करना चाहिए।”
व्यापारी ने वादा किया कि वह अपने कारखाने का गंदा पानी साफ करने की मशीन लगवाएगा और कुएं का पानी फिर से साफ हो जाएगा।
दरबार में वापस आकर अकबर ने बीरबल की तारीफ की। “बीरबल, तुमने बिना किसी सजा के व्यापारी को समझा दिया। यह तुम्हारी बुद्धिमानी का कमाल है।”
बीरबल ने कहा, “जहांपनाह, जब हम किसी को उसकी गलती का एहसास करा देते हैं, तो वह खुद ही सुधार जाता है। कुएं का पानी हो या कोई और प्राकृतिक संसाधन, हमें इनकी रक्षा करनी चाहिए।”
सीख: पानी जीवन का आधार है। हमें इसकी स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए और कभी भी इसे गंदा नहीं करना चाहिए। जो काम हमारे लिए हानिकारक है, वह दूसरों के लिए भी हानिकारक है। इसलिए हमें हमेशा दूसरों की भलाई के बारे में सोचना चाहिए। समझदार बंदर की कहानी और व्यापारी का उदय और पतन जैसी कहानियाँ भी हमें इसी तरह की महत्वपूर्ण सीख देती हैं।











