Summarize this Article with:

गुरु नानक और सोमनाथ का सत्य – पवित्र यात्रा

बहुत समय पहले की बात है, जब गुरु नानक देव जी अपनी पवित्र यात्राओं पर निकले थे। वे सत्य की खोज में भारत के कोने-कोने में घूम रहे थे। उनके साथ उनके वफादार साथी मरदाना भी थे, जो हमेशा अपना रबाब लेकर चलते थे।

एक दिन गुरु नानक जी ने मरदाना से कहा, “मरदाना, हमें सोमनाथ जाना चाहिए। वहाँ के लोगों को सत्य की आवश्यकता है।”

मरदाना ने पूछा, “गुरु जी, सोमनाथ तो बहुत दूर है। वहाँ क्यों जाना है?”

गुरु नानक जी मुस्कराए और बोले, “मरदाना, सोमनाथ का सत्य यह है कि वहाँ के लोग केवल पत्थरों की पूजा में खो गए हैं। उन्हें समझाना होगा कि सच्चा ईश्वर हर जगह है।”

दोनों साथी लंबी यात्रा करके सोमनाथ पहुँचे। वहाँ उन्होंने देखा कि हजारों श्रद्धालु मंदिर में आकर पत्थर की मूर्तियों के सामने सिर झुका रहे थे। कुछ लोग सोना-चाँदी चढ़ा रहे थे, कुछ घंटियाँ बजा रहे थे।

गुरु नानक जी ने देखा कि एक गरीब औरत अपने बीमार बच्चे को लेकर मंदिर के बाहर रो रही थी। वह कह रही थी, “हे भगवान, मेरे पास चढ़ावा नहीं है। क्या आप मेरी सुनेंगे नहीं?”

यह देखकर गुरु नानक जी का दिल दुखी हो गया। वे उस औरत के पास गए और बोले, “माता, तुम्हारा प्रेम और सच्ची भक्ति ही सबसे बड़ा चढ़ावा है। ईश्वर तुम्हारे दिल में बसता है, किसी पत्थर में नहीं।”

मंदिर के पुजारी ने यह सुना तो गुस्से से बोला, “कौन है यह व्यक्ति जो हमारे भगवान का अपमान कर रहा है?”

गुरु नानक जी शांति से बोले, “मैं किसी का अपमान नहीं कर रहा। मैं केवल सोमनाथ का सत्य बता रहा हूँ। सच्चा ईश्वर निराकार है, वह हर जगह है।”

पुजारी ने चुनौती दी, “अगर तुम्हारा ईश्वर सच्चा है तो प्रमाण दो।”

गुरु नानक जी ने मरदाना से कहा, “मरदाना, अपना रबाब बजाओ और ईश्वर का नाम गाओ।”

जैसे ही मरदाना ने रबाब बजाना शुरू किया और गुरु नानक जी ने ईश्वर की स्तुति गाई, एक अद्भुत चमत्कार हुआ। उस गरीब औरत का बीमार बच्चा अचानक स्वस्थ हो गया। वह खुशी से नाचने लगा।

यह देखकर सभी लोग हैरान रह गए। गुरु नानक जी ने समझाया, “देखो, यह सोमनाथ का सत्य है। ईश्वर प्रेम और सच्ची भक्ति से प्रसन्न होता है, धन-दौलत से नहीं।”

एक बुजुर्ग व्यक्ति ने पूछा, “गुरु जी, तो क्या हमारी पूजा व्यर्थ है?”

गुरु नानक जी ने प्रेम से उत्तर दिया, “नहीं भाई, पूजा व्यर्थ नहीं है। लेकिन सच्ची पूजा वह है जो दिल से की जाए। ईश्वर को पत्थर में बांधना उचित नहीं। वह तो सर्वव्यापी है।”

धीरे-धीरे भीड़ इकट्ठी हो गई। गुरु नानक जी ने सबको समझाया कि सोमनाथ का सत्य यह है कि यहाँ भी वही एक ईश्वर निवास करता है जो हर जगह है। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा – सभी जगह वही एक परमात्मा है।

कई दिनों तक गुरु नानक जी ने लोगों को सिखाया। उन्होंने बताया कि सच्चा धर्म प्रेम, दया और सेवा में है। जाति-पाति, अमीर-गरीब का भेद ईश्वर की नजर में नहीं है।

एक दिन एक धनी व्यापारी आया और बोला, “गुरु जी, मैंने बहुत दान किया है, फिर भी मन में शांति नहीं है।”

गुरु नानक जी ने कहा, “बेटा, दान तो अच्छा है, लेकिन अहंकार के साथ किया गया दान व्यर्थ है। सच्चा दान वह है जो बिना किसी दिखावे के, प्रेम से किया जाए।”

व्यापारी को समझ आ गई। वह गुरु नानक जी के चरणों में गिर पड़ा और बोला, “गुरु जी, आपने मुझे सोमनाथ का सत्य दिखा दिया।”

जब गुरु नानक जी सोमनाथ छोड़ने लगे तो सैकड़ों लोग उन्हें विदाई देने आए। सभी के चेहरों पर खुशी थी। उन्होंने समझ लिया था कि सच्चा ईश्वर कहीं दूर नहीं, बल्कि उनके दिल में ही बसता है।

मरदाना ने पूछा, “गुरु जी, क्या हमारा काम पूरा हो गया?”

गुरु नानक जी मुस्कराए और बोले, “मरदाना, सोमनाथ का सत्य अब इन लोगों के दिलों में बस गया है। यही हमारी सफलता है।”

शिक्षा: इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि सच्चा ईश्वर हर जगह है। वह किसी खास जगह या मूर्ति में कैद नहीं है। सच्ची भक्ति प्रेम, दया और सेवा में है, दिखावे में नहीं। सोमनाथ का सत्य यही है कि परमात्मा सबके दिल में बसता है और सभी धर्मों का मूल संदेश एक ही है – प्रेम और एकता।

Summarize this Article with:

About Me

Welcome to StoriesPub.com We started in 2019 with a simple idea to provide our readers with useful and interesting information. Our team is dedicated to curating a wide range of captivating content in different categories, including inspirational stories, funny tales, Parenting, Kids’ products, Educational AI content, Tech content, coloring books, how to draw, and more.