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जैसी करनी वैसी भरनी – चालाक लोमड़ी की कहानी
एक घने जंगल में चंचल नाम की एक बहुत चालाक लोमड़ी रहती थी। वह हमेशा दूसरे जानवरों को धोखा देकर उनका खाना छीन लेती थी। जंगल के सभी जानवर उससे परेशान थे, लेकिन उसकी चालाकी के आगे सभी हार जाते थे।
एक दिन चंचल ने देखा कि मुन्ना खरगोश अपने बच्चों के लिए मीठी गाजर ला रहा था। चंचल के मुंह में पानी आ गया। उसने सोचा, “आज इस खरगोश को बेवकूफ बनाकर इसकी गाजरें हड़प लूंगी।”
चंचल ने मुन्ना के पास जाकर कहा, “अरे मुन्ना भाई! तुम्हारी गाजरें तो बहुत सुंदर लग रही हैं। लेकिन क्या तुम्हें पता है कि जंगल के राजा शेर ने आज घोषणा की है कि कोई भी जानवर गाजर नहीं खा सकता?”
मुन्ना घबरा गया और बोला, “सच में? तो अब मैं इन गाजरों का क्या करूं?”
चंचल ने झूठी दया दिखाते हुए कहा, “चलो, मैं तुम्हारी मदद करती हूं। तुम ये गाजरें मुझे दे दो, मैं इन्हें जंगल से बाहर फेंक दूंगी ताकि तुम्हें कोई सजा न मिले।”
भोला मुन्ना चंचल की बात मान गया और अपनी सारी गाजरें उसे दे दीं। चंचल खुशी से अपनी मांद में जाकर सारी गाजरें खा गई।
अगले दिन चंचल ने चीकू गिलहरी को अखरोट इकट्ठे करते देखा। उसने फिर वही चाल चली और कहा कि शेर ने अखरोट खाने पर भी पाबंदी लगा दी है। डरी हुई चीकू ने भी अपने सारे अखरोट चंचल को दे दिए।
इसी तरह चंचल ने पिंकी कबूतरी के दाने, मोती मछली के कीड़े, और गोलू भालू का शहद भी हड़प लिया। सभी जानवर उसकी झूठी बातों में आ गए।
एक दिन जंगल में दादाजी उल्लू आए। वे बहुत बुद्धिमान और अनुभवी थे। जब उन्होंने सुना कि सभी जानवर भूखे हैं और चंचल अकेली मोटी होती जा रही है, तो उन्हें शक हुआ।
दादाजी उल्लू ने सभी जानवरों को इकट्ठा किया और कहा, “मित्रों, मैंने शेर राजा से बात की है। उन्होंने कोई भी ऐसी घोषणा नहीं की है। तुम सब चंचल के झूठ में फंस गए हो।”
सभी जानवरों को अपनी गलती का एहसास हुआ। वे सब मिलकर चंचल के पास गए। मुन्ना ने कहा, “चंचल, तुमने हम सबको धोखा दिया है। अब तुम्हें इसकी सजा मिलेगी।”
चंचल ने हंसते हुए कहा, “तुम सब बेवकूफ हो! मैं तो बस अपनी चालाकी का इस्तेमाल कर रही थी।”
तभी दादाजी उल्लू ने कहा, “चंचल, याद रखो – जैसी करनी वैसी भरनी। तुमने जो बुरा किया है, वह तुम्हारे साथ भी होगा।”
अगले दिन चंचल को बहुत तेज भूख लगी। वह खाना ढूंढने निकली, लेकिन किसी भी जानवर ने उसकी मदद नहीं की। सभी ने कहा, “हमें शेर ने मना किया है कि चंचल को कुछ न दें।”
चंचल समझ गई कि यह उसी का खेल था जो अब उसके साथ खेला जा रहा था। वह भूखी रह गई और उसे अपनी गलती का एहसास हुआ।
आखिरकार चंचल ने सभी से माफी मांगी और वादा किया कि वह अब कभी किसी को धोखा नहीं देगी। दयालु जानवरों ने उसे माफ कर दिया और उसके साथ खाना बांटा।
सीख: जैसी करनी वैसी भरनी – हम जैसा व्यवहार दूसरों के साथ करते हैं, वैसा ही व्यवहार हमारे साथ भी होता है। इसलिए हमेशा अच्छे काम करने चाहिए और दूसरों के साथ ईमानदारी से पेश आना चाहिए। सामाजिकता की कहानी से सीखें कि कैसे चालाकी कभी-कभी उल्टी भी पड़ सकती है।













