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हातिम ताई का तिलिस्मी जंगल और बीरबल की बुद्धि

बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन एक अजीब समस्या आई। एक व्यापारी रोते हुए दरबार में आया और बोला, “जहांपनाह, मेरा बेटा हातिम ताई का तिलिस्मी जंगल में खो गया है। वह जंगल इतना रहस्यमय है कि जो भी वहां जाता है, वह भटक जाता है।”

अकबर ने चिंतित होकर पूछा, “यह हातिम ताई का तिलिस्मी जंगल कहां है और इसमें क्या खासियत है?”

व्यापारी ने बताया, “महाराज, यह जंगल शहर से दस कोस दूर है। कहते हैं कि महान दानवीर हातिम ताई ने इस जंगल में अपना खजाना छुपाया था। लेकिन जंगल में एक तिलिस्म है – जो भी लालच में वहां जाता है, वह रास्ता भूल जाता है।”

दरबारी परेशान हो गए। कुछ ने सुझाव दिया कि सेना भेजी जाए, कुछ ने कहा कि जादूगर बुलाए जाएं। लेकिन बीरबल चुपचाप सुन रहे थे।

अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल, तुम्हारी क्या राय है? कैसे इस हातिम ताई के तिलिस्मी जंगल से लड़के को निकाला जाए?”

बीरबल मुस्कराए और बोले, “जहांपनाह, समस्या का समाधान समस्या में ही छुपा होता है। मुझे इस व्यापारी से कुछ सवाल पूछने दीजिए।”

बीरबल ने व्यापारी से पूछा, “आपका बेटा उस जंगल में क्यों गया था?”

व्यापारी ने झिझकते हुए कहा, “वह… वह हातिम ताई का खजाना ढूंढने गया था। हमारे व्यापार में नुकसान हो रहा था।”

बीरबल ने आगे पूछा, “क्या आपने उसे समझाया था कि यह गलत है?”

व्यापारी चुप रह गया। बीरबल समझ गए कि मामला क्या है।

बीरबल ने कहा, “महाराज, मैं कल सुबह उस हातिम ताई के तिलिस्मी जंगल में जाऊंगा और लड़के को वापस लाऊंगा।”

अगली सुबह बीरबल अकेले ही उस जंगल की तरफ निकले। जंगल के पास पहुंचकर उन्होंने देखा कि वाकई यह जंगल बहुत घना और रहस्यमय था। पेड़ इतने घने थे कि सूरज की रोशनी भी मुश्किल से अंदर आती थी।

बीरबल जंगल में दाखिल हुए। थोड़ी देर बाद उन्हें एक आवाज सुनाई दी। एक युवक पेड़ के नीचे बैठा रो रहा था।

“क्या तुम व्यापारी के बेटे हो?” बीरबल ने पूछा।

लड़के ने चौंककर देखा और बोला, “जी हां, लेकिन आप कौन हैं? और यहां कैसे आए? मैं तो तीन दिन से यहां फंसा हुआ हूं। जितना भी चलता हूं, वापस यहीं पहुंच जाता हूं।”

बीरबल ने मुस्कराते हुए कहा, “मैं बीरबल हूं। तुम्हारे पिता ने बादशाह अकबर से मदद मांगी है। बताओ, तुम यहां क्यों आए थे?”

लड़के ने शर्मिंदगी से कहा, “मैं हातिम ताई का खजाना ढूंढने आया था। हमारे घर में पैसों की तंगी है।”

बीरबल ने समझाया, “बेटा, यह हातिम ताई का तिलिस्मी जंगल वाकई में तिलिस्मी है, लेकिन इसका तिलिस्म लालच है। जब तक तुम्हारे मन में लालच रहेगा, तुम यहां से निकल नहीं सकते।”

“लेकिन मैं कैसे लालच छोड़ूं? घर में पैसे नहीं हैं।” लड़के ने पूछा。

बीरबल ने कहा, “हातिम ताई महान दानवीर थे। उनका असली खजाना सोना-चांदी नहीं, बल्कि उनके नेक काम थे। अगर तुम सच्चे मन से मेहनत करने का वादा करो और लालच छोड़ दो, तो यह जंगल तुम्हें रास्ता दिखा देगा।”

लड़के ने सोचा और फिर दिल से कहा, “मैं वादा करता हूं कि मैं मेहनत करूंगा और किसी के खजाने पर नजर नहीं डालूंगा।”

जैसे ही उसने यह कहा, अचानक जंगल में एक साफ रास्ता दिखाई दिया। बीरबल और लड़का आसानी से जंगल से बाहर निकल आए।

दरबार में वापस पहुंचकर व्यापारी अपने बेटे को देखकर खुश हो गया। अकबर ने पूछा, “बीरबल, तुमने यह कमाल कैसे किया?”

बीरबल ने समझाया, “जहांपनाह, हातिम ताई का तिलिस्मी जंगल का असली तिलिस्म लालच था। जब तक इंसान के मन में लालच रहता है, वह सही रास्ता नहीं देख सकता। जैसे ही लड़के ने लालच छोड़ा, रास्ता साफ हो गया।”

अकबर ने प्रशंसा की, “वाह बीरबल! तुमने बिना किसी जादू-टोने के इस समस्या का समाधान कर दिया।”

व्यापारी ने अपने बेटे को समझाया और दोनों ने मेहनत से काम शुरू किया। कुछ महीनों बाद उनका व्यापार फिर से फलने-फूलने लगा।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि लालच इंसान को भटका देता है। मेहनत और ईमानदारी से किया गया काम ही सच्ची संपत्ति है। हातिम ताई का असली खजाना उनकी दानवीरता और नेकी थी, सोना-चांदी नहीं।

और इसी तरह, व्यापारी का उदय और पतन की कहानी भी हमें सिखाती है कि मेहनत और ईमानदारी से किया गया काम ही सच्ची संपत्ति है।

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