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छोटा बांस, बड़ा बांस – बीरबल की बुद्धिमानी
बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन एक अजीब सा मामला आया। दो भाई आपस में झगड़ रहे थे। बड़ा भाई राम और छोटा भाई श्याम दोनों बांस के व्यापारी थे।
राम चिल्लाकर कह रहा था, “हुजूर, मेरा छोटा भाई मुझसे झूठ बोल रहा है। वो कहता है कि छोटा बांस बड़े बांस से ज्यादा कीमती है। यह कैसे हो सकता है?”
श्याम ने जवाब दिया, “जहांपनाह, मैं सच कह रहा हूं। छोटा बांस वाकई में बड़े बांस से ज्यादा उपयोगी और कीमती है।”
बादशाह अकबर परेशान हो गए। उन्होंने सोचा कि यह तो अजीब बात है। बड़ा बांस तो हमेशा से छोटे बांस से ज्यादा कीमती माना जाता रहा है।
अकबर ने बीरबल की तरफ देखा और कहा, “बीरबल, तुम इस मामले को सुलझाओ। पता लगाओ कि सच क्या है।”
बीरबल ने मुस्कराते हुए कहा, “जहांपनाह, मैं दोनों भाइयों से कुछ सवाल पूछना चाहता हूं।”
बीरबल ने राम से पूछा, “तुम बड़े बांस का क्या करते हो?”
राम ने जवाब दिया, “हुजूर, बड़े बांस से मकान की छत बनाई जाती है, बड़े पुल बनाए जाते हैं।”
फिर बीरबल ने श्याम से पूछा, “और तुम छोटे बांस का क्या करते हो?”
श्याम ने खुशी से कहा, “हुजूर, छोटे बांस से बांसुरी बनती है। भगवान श्री कृष्ण की बांसुरी भी छोटे बांस से ही बनी थी। छोटे बांस से टोकरियां बनती हैं, मछली पकड़ने के जाल बनते हैं।”
बीरबल ने आगे पूछा, “अच्छा, तो बताओ कि लोग किसे ज्यादा पसंद करते हैं?”
श्याम ने कहा, “हुजूर, बड़ा बांस तो केवल मकान बनाने के काम आता है, लेकिन छोटा बांस रोज के काम आता है। औरतें रसोई में छोटे बांस की टोकरी इस्तेमाल करती हैं। बच्चे छोटे बांस की बांसुरी बजाते हैं।”
बादशाह अकबर को अभी भी समझ नहीं आ रहा था। उन्होंने कहा, “लेकिन बीरबल, बड़ा बांस तो फिर भी बड़ा है।”
बीरबल ने चतुराई से कहा, “जहांपनाह, आकार में बड़ा होना और महत्व में बड़ा होना अलग बात है। देखिए, हाथी आकार में चींटी से बड़ा है, लेकिन चींटी अपने काम में हाथी से कहीं ज्यादा मेहनती है।”
“छोटा बांस हर घर में काम आता है। मां अपने बच्चों के लिए छोटे बांस की टोकरी में खाना रखती है। किसान छोटे बांस से अनाज की टोकरी बनाता है। संगीतकार छोटे बांस से मधुर बांसुरी बनाता है।”
बीरबल ने आगे कहा, “बड़ा बांस केवल कभी-कभार मकान बनाने के काम आता है, लेकिन छोटा बांस रोज किसी न किसी के काम आता है।”
अकबर को बात समझ आ गई। उन्होंने कहा, “वाह बीरबल! तुमने सही कहा। उपयोगिता ही असली कीमत है।”
राम को भी अपनी गलती का एहसास हो गया। उसने अपने छोटे भाई श्याम से माफी मांगी।
बीरबल ने दोनों भाइयों से कहा, “देखो, छोटा हो या बड़ा, हर चीज का अपना महत्व है। छोटा बांस और बड़ा बांस दोनों अपनी-अपनी जगह पर उपयोगी हैं। लेकिन जो चीज रोज काम आती है, वो ज्यादा कीमती होती है।”
सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि आकार से ज्यादा उपयोगिता महत्वपूर्ण है। छोटी चीजें भी बड़ी चीजों से कम महत्वपूर्ण नहीं होतीं। हर व्यक्ति और हर वस्तु का अपना विशेष महत्व होता है।














