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चतुर दुल्हन की बुद्धि – अलिफ लैला की कहानी

बहुत समय पहले, बगदाद शहर में एक धनी व्यापारी रहता था जिसका नाम अब्दुल रहमान था। उसकी एक अत्यंत सुंदर और बुद्धिमान बेटी थी जैनब। जैनब न केवल रूप में अप्रतिम थी, बल्कि उसकी चतुराई और बुद्धि की चर्चा दूर-दूर तक फैली हुई थी।

एक दिन शहर के काजी हकीम अली ने अब्दुल रहमान से कहा, “मित्र, तुम्हारी बेटी अब विवाह योग्य हो गई है। मैं चाहता हूं कि वह मेरे पुत्र से विवाह करे।”

परंतु जैनब ने अपने पिता से कहा, “पिताजी, मैं केवल उसी व्यक्ति से विवाह करूंगी जो मेरी तीन पहेलियों का उत्तर दे सके। यदि कोई व्यक्ति मेरी बुद्धि को समझ सके, तभी वह मेरा योग्य पति होगा।”

काजी के पुत्र यूसुफ ने यह चुनौती स्वीकार की। विवाह के दिन, जब सभी मेहमान एकत्रित हुए, जैनब ने अपना घूंघट उठाया और कहा:

“हे दूल्हे राज, यदि आप सच में मुझसे विवाह करना चाहते हैं, तो मेरी तीन पहेलियों का उत्तर दीजिए।”

पहली पहेली: “वह क्या है जो दिन में अंधा होता है और रात में देखता है?”

यूसुफ ने सोचा और कहा, “उल्लू।” जैनब मुस्कराई और बोली, “सही उत्तर।”

दूसरी पहेली: “वह क्या है जो बिना पैर के चलता है, बिना मुंह के बोलता है?”

यूसुफ ने कुछ देर सोचा और कहा, “समय।” जैनब ने सिर हिलाया, “यह भी सही है।”

तीसरी पहेली: “वह कौन सा खजाना है जो बांटने से बढ़ता है और छुपाने से घटता है?”

यूसुफ परेशान हो गया। उसने कई उत्तर सोचे – सोना, चांदी, हीरे-जवाहरात, परंतु कोई भी सही नहीं लग रहा था। अंततः उसने हार मान ली।

तभी भीड़ में से एक युवक आगे आया। उसका नाम हसन था और वह एक गरीब किंतु विद्वान व्यक्ति था। उसने कहा, “हे सुंदरी, क्या मैं इस पहेली का उत्तर दे सकता हूं?”

जैनब ने कहा, “अवश्य, परंतु यदि आपका उत्तर गलत हुआ तो आपको यहां से चले जाना होगा।”

हसन ने मुस्कराते हुए कहा, “वह खजाना है – ज्ञान। ज्ञान बांटने से बढ़ता है और छुपाने से नष्ट हो जाता है।”

जैनब के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई। उसने कहा, “यही तो मैं चाहती थी! एक ऐसा व्यक्ति जो स्त्री की चतुराई को समझे और सम्मान दे।”

परंतु काजी हकीम अली क्रोधित हो गया। उसने कहा, “यह अन्याय है! मेरे पुत्र का अपमान हुआ है। मैं इस विवाह को रद्द करता हूं।”

जैनब ने शांति से कहा, “काजी साहब, क्या न्याय यह नहीं है कि एक स्त्री अपना जीवनसाथी चुनने का अधिकार रखे? क्या यह उचित है कि केवल धन और पद के आधार पर विवाह हो?”

भीड़ में से लोगों ने जैनब का समर्थन किया। एक बुजुर्ग ने कहा, “लड़की सही कह रही है। बुद्धि और चरित्र ही सच्चा धन है।”

काजी को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने कहा, “तुम सही कह रही हो, बेटी। तुम्हारी चतुर दुल्हन की बुद्धि ने मुझे सिखाया है कि सच्चा न्याय क्या होता है।”

इस प्रकार जैनब और हसन का विवाह हुआ। जैनब ने अपनी बुद्धि से न केवल अपना सही जीवनसाथी चुना, बल्कि समाज को भी एक महत्वपूर्ण सबक दिया।

विवाह के बाद, जैनब और हसन ने मिलकर एक विद्यालय खोला जहां वे बच्चों को न केवल पढ़ाई सिखाते थे, बल्कि जीवन की सच्चाइयों से भी अवगत कराते थे। जैनब अक्सर कहती थी, “ज्ञान ही सबसे बड़ा धन है, और यह बांटने से बढ़ता है।”

वर्षों बाद, जब लोग इस कहानी को सुनाते थे, तो वे कहते थे कि चतुर दुल्हन की बुद्धि ने न केवल उसे सही पति दिलाया, बल्कि पूरे समाज को न्याय का पाठ भी पढ़ाया।

सीख: सच्ची बुद्धि वही है जो न्याय और सत्य के साथ खड़ी हो। स्त्री की चतुराई और बुद्धि का सम्मान करना हर समाज का कर्तव्य है। पहेली सुलझाना केवल दिमागी कसरत नहीं, बल्कि जीवन की समस्याओं का समाधान खोजने की कला है।

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