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ब्रह्मा द्वारा गोप-गायों का हरण – कृष्ण की महान लीला

वृंदावन की हरी-भरी भूमि पर एक दिन भगवान कृष्ण अपने सखाओं के साथ गायों को चराने निकले। सुबह की सुनहरी किरणें यमुना के तट पर नृत्य कर रही थीं। छोटे-छोटे ग्वाल-बाल अपनी गायों के साथ खुशी से खेल रहे थे।

“आज हम सभी मिलकर वन में दूर तक जाएंगे,” कृष्ण ने मुस्कराते हुए कहा। उनके साथ सुदामा, श्रीदामा, मधुमंगल और अन्य सखा थे। सभी के चेहरे पर प्रसन्नता की लहर थी।

जब वे वन के गहरे हिस्से में पहुंचे, तो कृष्ण ने देखा कि ब्रह्माजी छुपकर उन्हें देख रहे हैं। ब्रह्माजी के मन में एक विचार आया – “क्या यह बालक वास्तव में परम ब्रह्म है? मैं इसकी परीक्षा लूंगा।”

जब कृष्ण और उनके सखा भोजन करने के लिए बैठे, तो ब्रह्माजी ने अपनी माया का प्रयोग किया। एक पल में ही सभी ग्वाल-बाल और गायें गायब हो गईं। ब्रह्मा द्वारा गोप-गायों का हरण हो गया था।

कृष्ण जब वापस आए तो उन्होंने देखा कि उनके सभी मित्र और गायें कहीं नजर नहीं आ रहीं। वे समझ गए कि यह ब्रह्माजी की लीला है। उन्होंने मुस्कराते हुए सोचा, “चलो, मैं भी अपनी लीला दिखाता हूं।”

तुरंत ही कृष्ण ने अपनी योगमाया से उतने ही ग्वाल-बाल और गायों को प्रकट किया जितने पहले थे। वे बिल्कुल वैसे ही दिखते थे। सभी खुशी से खेलने लगे और घर की ओर चल पड़े।

जब वे वृंदावन पहुंचे, तो एक अद्भुत घटना हुई। सभी माताओं का प्रेम अपने बच्चों के लिए पहले से कहीं अधिक बढ़ गया। गायों का दूध भी पहले से ज्यादा मीठा हो गया। “आज हमारे बच्चे कितने प्यारे लग रहे हैं,” यशोदा मैया ने कहा।

एक वर्ष तक यह स्थिति चलती रही। ब्रह्माजी को लगा कि उनकी माया सफल हो गई है। वे प्रसन्न होकर देखने आए कि कृष्ण क्या कर रहे हैं।

जब ब्रह्माजी ने देखा तो वे आश्चर्य में पड़ गए। वे ग्वाल-बाल जिन्हें उन्होंने छुपाया था, वे तो अभी भी उनके पास सो रहे थे। फिर ये दूसरे ग्वाल-बाल कौन हैं?

अचानक कृष्ण ने अपनी असली शक्ति दिखाई। सभी ग्वाल-बाल और गायें चतुर्भुज विष्णु के रूप में बदल गईं। आकाश में देवताओं के फूल बरसने लगे। “हे प्रभु! आप वास्तव में परम ब्रह्म हैं,” ब्रह्माजी ने कृष्ण के चरणों में गिरकर कहा।

“ब्रह्माजी, आपने मेरी परीक्षा ली, लेकिन मैं तो सदा ही अपने भक्तों के साथ हूं,” कृष्ण ने मुस्कराते हुए कहा। उन्होंने अपने असली सखाओं और गायों को वापस ला दिया।

ब्रह्माजी ने क्षमा मांगी और कहा, “हे कृष्ण! आपकी लीला अद्भुत है। आप छोटे बालक के रूप में भी सम्पूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी हैं।”

इस घटना से सभी को पता चला कि कृष्ण कोई साधारण बालक नहीं हैं। वे स्वयं भगवान हैं जो अपने भक्तों की रक्षा के लिए धरती पर आए हैं। ब्रह्मा द्वारा गोप-गायों का हरण की यह लीला आज भी लोगों को याद दिलाती है कि भगवान हमेशा अपने प्रेमियों के साथ हैं।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि भगवान कृष्ण अपने भक्तों से अगाध प्रेम करते हैं और हमेशा उनकी रक्षा करते हैं। चाहे कितनी भी बड़ी समस्या हो, भगवान का प्रेम और शक्ति सबसे ऊपर है।

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