
सुरेंद्रनाथ बनर्जी: राष्ट्रगुरु की प्रेरणादायक कहानी
सुरेंद्रनाथ बनर्जी: राष्ट्रगुरु की प्रेरणादायक कहानी बहुत समय पहले, जब हमारा भारत अंग्रेजों के शासन में था, तब कलकत्ता शहर में एक छोटे से घर में एक विशेष बालक का जन्म हुआ। यह बालक था सुरेंद्रनाथ बनर्जी, जो आगे चलकर भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और ‘राष्ट्रगुरु’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। बचपन की शुरुआत 10 नवंबर 1848 को जन्मे सुरेंद्रनाथ के पिता दुर्गाचरण बनर्जी एक डॉक्टर थे। घर में शिक्षा और संस्कारों का माहौल था। छोटे सुरेंद्रनाथ बहुत तेज़ बुद्धि के थे और हमेशा सवाल पूछते रहते थे। “पिताजी, ये अंग्रेज़ लोग हमारे देश में क्यों हैं?” एक दिन छोटे सुरेंद्रनाथ ने अपने पिता से पूछा। दुर्गाचरण जी ने प्यार से समझाया, “बेटा, वे यहाँ व्यापार करने आए थे, लेकिन अब वे हम पर शासन कर रहे हैं। हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ना होगा।” शिक्षा की यात्रा सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने हिंदू कॉलेज से अपनी शिक्षा पूरी की। वे

























